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अमेरिका में 9/11 हमले के 24 साल: 500 घंटे का अनदेखा VIDEO होगा जारी !

इतिहास के पन्नों में 11 सितंबर का दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। अमेरिका के सीने पर इस दिन हुए घातक आतंकवादी हमले ने एक ऐसा घाव दिया, जिसकी टीस दुनिया रहने तक कायम रहेगी। इस दर्दनाक घटना का 500 घंटे का अनदेखा फुटेज जारी किया जा सकता है जो कई स्रोतों से जुटाया गया है।

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9/11 हमले के 24 साल (PHOTO-AP)

नई दिल्ली: वर्ष 2001 में 11 सितंबर के दिन आतंकवादियों ने यात्री विमानों का अपहरण कर अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ और पेंटागन मुख्यालय को निशाना बनाया। इसे अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी हमले के तौर पर देखा जाता है। आज इस दर्दनाक हमले की 24वीं बरसी है। इस हमले के कई वीडियो उस वक्त मीडिया में आए और बाद में भी आते रहे। इससे जुड़े वीडियो को विभिन्न स्रोतों से जुटाया गया और वीडियो फुटेज बनाया गया । न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी ने 9/11 हमलों के सबसे बड़े क्राउडसोर्स्ड फुटेज संग्रह को प्राप्त किया है।

11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों का दस्तावेजीकरण अनगिनत तस्वीरों और वीडियो फुटेज, जो पत्रकारों, राहगीरों, सुरक्षा कैमरों, एफबीआई जांचकर्ताओं, और यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक अंतरिक्ष यात्री द्वारा कैद किए गए थे। इन्हें यकीनन याद करना दुखदायी है और भूलना असंभव है। इस दुखद घटना के अब 24 साल हो चुके है । दशकों बाद वो अनेदेखे फुटेज जल्द ही जनता के लिए उपलब्ध हो सकता है।

500 घंटे का रॉ फुटेज

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार फिल्म निर्माताओं स्टीवन रोसेनबाम और पामेला योडर ने 500 घंटे से अधिक का रॉ वीडियो जुटाया जो अपार्टमेंट की खिड़कियों, छतों, फुटपाथों और पार्कों से शूट किया गया, जिसमें से अधिकांश न्यूयॉर्क के लोगों ने रिकॉर्ड किया गया। कुछ सामग्री को उनके 2002 के डॉक्यूमेंट्री "7 डेज़ इन सितंबर" में दिखाया गया था, लेकिन अधिकांश अब तक जारी नहीं हुए है और अबतक अनदेखे है और किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं है। 2027 में यह लाइबेर्री में उपलब्ध हो सकता है जबकि 2030 के आसपास पूरी तरह से ऑनलाइन उपलब्ध होगा। अमेरिका 11 सितंबर, 2001 के हमलों की 24वीं वर्षगांठ को समारोहों, स्वयंसेवी कार्यों और अन्य श्रद्धांजलियों के साथ मना रहा है । ( न्यूज एजेंसी एपी इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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