Blinkit ambulance service: आज तकनीक केवल सामान या ग्रॉसरी पहुंचाने तक सीमित नहीं रही। अब कई डिजिटल सेवाएं आपात स्थिति में भी काम आ रही हैं और लोगों को समय पर मदद पहुंचाकर उनकी जान भी बचा रही है। हाल ही में गुरुग्राम से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है और एक नई तरह की सेवा की अहमियत को भी दिखाया है। एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपने दोस्त के साथ हुई एक आपात स्थिति का अनुभव साझा किया, जिसमें एक एम्बुलेंस सेवा ने बेहद तेजी और जिम्मेदारी के साथ मदद की।
Blinkit Ambulance Service: ऐप से बुलाई एम्बुलेंस और तुरंत मिली मदद (Photo: X/@CestMoiz)
पैरामेडिक स्टाफ और ड्राइवर ने पूरे रास्ते मरीज का रखा ध्यान
बताया गया कि सुबह के समय उसके एक क्लासमेट को अचानक अपनी मां की तबीयत खराब होने पर तुरंत एम्बुलेंस की जरूरत पड़ी। उसने मोबाइल ऐप के जरिए ब्लिंकिट एम्बुलेंस (Blinkit Ambulance) बुक की। हैरानी की बात यह रही कि एम्बुलेंस (Blinkit Ambulance Service) सिर्फ चार मिनट के अंदर उनके घर पहुंच गई। इसके बाद मरीज को जल्दी से अस्पताल ले जाया गया और करीब 20 मिनट के अंदर उन्हें अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती भी करा दिया गया। एम्बुलेंस में मौजूद पैरामेडिक स्टाफ और ड्राइवर ने पूरे रास्ते मरीज का बहुत अच्छे से ध्यान रखा। उन्होंने जरूरी प्राथमिक देखभाल दी और अस्पताल पहुंचने तक मरीज को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश की। परिवार के लोगों के लिए यह मदद किसी राहत से कम नहीं थी।
एम्बुलेंस कर्मचारियों को कहा धन्यवाद
जब अस्पताल में जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी हो गई और मरीज की हालत थोड़ी स्थिर हो गई, तो मरीज का बेटा एम्बुलेंस के स्टाफ को धन्यवाद कहने के लिए बाहर गया। लेकिन तब तक एम्बुलेंस टीम वहां से जा चुकी थी। उसे यह भी पता चला कि इस सेवा के लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया गया था। बाद में उसकी पत्नी ने उसे इस बात के लिए डांटा कि उसने एम्बुलेंस कर्मचारियों को धन्यवाद के तौर पर कोई छोटा सा उपहार या रकम नहीं दी। दरअसल, उसे लगा था कि जब उसकी पत्नी ने एम्बुलेंस बुक की होगी, तो उसका भुगतान भी उसी समय हो गया होगा। इसलिए उसने इस बारे में ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह सुझाव भी दिया गया कि ऐप में एक ऐसा विकल्प होना चाहिए, जिससे लोग एम्बुलेंस सेवा देने वाले कर्मचारियों को धन्यवाद के रूप में छोटा सा भुगतान या टिप दे सकें। साथ ही एक रेटिंग सिस्टम भी होना चाहिए, जिससे ऐसे कर्मचारियों के काम की सराहना की जा सके। यह घटना दिखाती है कि समय पर मिलने वाली मदद किसी की जान बचाने में कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। सोशल मीडिया के एक्स पर इस वायरल पोस्ट को @CestMoiz नामक अकाउंट से शेयर किया गया है। जिसे अभी तक लाखों लोगों ने पढ़ा है, वहीं पर हजारों लोगों ने शेयर भी किया है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
