सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो इस वक्त छाया हुआ है। जहां एक स्कूली छात्रा ने फोन पर अपनी मां को 10वीं की परीक्षा पास होने की खुशखबरी दी। लोग इस वीडियो को देखने के बाद भावुक हो गए। यह खुशी का पल सिर्फ परीक्षा पास करने का नहीं बल्कि लड़की की संघर्ष, मेहनत और उसके सपनों के साकार होने का है।
फोन पर अपनी मां को खुशखबरी देते हुए लड़की (Instagram/@Times Now)
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बहुत ही खास है इस लड़की की कहानी
वीडियो दिल्ली का बताया जा रहा है। इस वीडियो को @thansinghkipathshala नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया गया है। जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा और हजारों लोगों ने लाइक किया है। बता दें कि थानसिंह की पाठशाला जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा और मदद देने का काम करती है। इस पाठशाला को कॉन्सटेबल थान सिंह चलाते हैं। जो दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्सटेबल के पद पर कार्यरत हैं। वे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं।
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वीडियो में लड़की के चेहरे पर दिखे खुशी के आंसू
वायरल वीडियो (Viral Video) में थान सिंह को लड़की की मां से फोन पर बात करते देखा जा सकता है और फिर उन्हें उसकी मां को खुशखबरी देते हुए भी सुना जा सकता है। इतनी सी बात होने के बाद वे फोन उस लड़की को पकड़ा देते हैं ताकि वह भी अपनी मां को यह खुशखबरी दे सके। लड़की फोन लेते ही अपनी मां से बोलती है कि, "मां, मैं पास हो गई।" यह खुशखबरी देते ही लड़की की आंखें नम हो जाती हैं। उधर, अपनी बेटी को कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते देख मां भी खुश हो जाती है। दोनों की आवाज में खुशी साफ झलक रही होती है। फोन पर बात करने के बाद लड़की अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाती और थान सिंह को गले लगा लेती है। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू होते हैं। यह पल इतना भावुक है कि इसे देखने वाला भी भावुक हो जाता है।
दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल की पहल से संवर रही है गरीब बच्चों की जिंदगी
वीडियो (Video) में दिख रही लड़की का नाम साक्षी है। साक्षी, एक प्रवासी मजदूर परिवार की बेटी है। जिसका परिवार मध्य प्रदेश में रहता है। साक्षी की पढ़ाई 7वीं के बाद रुक गई थी, मगर आज वह थान सिंह की पाठशाला की मदद से 10वीं की परीक्षा पास कर चुकी है। लाल किले के पास शुरू हुई उनकी छोटी-सी पहल आज 80 से ज्यादा बच्चों का सहारा बन चुकी है। 2015 में सिर्फ 4 बच्चों से शुरू हुई यह पाठशाला आज उन बच्चों के लिए उम्मीद है, जो कभी सड़कों पर भीख मांगते या कचरा बीनते थे। वो सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि उन बच्चों को किताबें, कॉपी, और जरूरत की हर चीज भी देते हैं। दूर रहने वाले बच्चों के लिए ई-रिक्शा तक का इंतजाम किया गया है और सबसे खास बात यह कि यहां के बच्चों को सिर्फ पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उनका दाखिला अच्छे स्कूलों में भी करवाया जाता है। थान सिंह कहते हैं, “अगर ये बच्चे आगे बढ़ जाएं, तो यही मेरी सबसे बड़ी सफलता है।”
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
