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हार्ट अटैक का खतरा
दुनिया के करीब 34 देशों में ई-सिगरेट बैन है। अभी कुछ समय पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के सभी देशों से कहा था कि ई-सिगरेट की गिनती भी अन्य तंबाकू प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में ही की जाए। पिछले कुछ साल में ई-सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाले खतरों को लेकर कई स्टडी हुई हैं। एक रिसर्च के अनुसार, ई-सिगरेट से हार्ट अटैक का खतरा 19 फीसदी तक बढ़ सकता है।

E-Cigarette
भारत में प्रतिबंधित
एक आंकड़े के अनुसार, भारत में लगभग 23 फीसदी लोग ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से 8 फीसदी लोग ऐसे है, जिन्हें इसकी लत लग चुकी है। यह डेटा पिछले साल हुए एक सर्वे में सामने आया था। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि भारत में ई-सिगरेट का प्रोडक्शन, इंपोर्ट और बिक्री प्रतिबंधित है। लेकिन लोगों के हाथों में यह प्रोडक्ट ग्रे मार्केट के जरिए पहुंच रहा है।
कैसे काम करती हैं ई-सिगरेट
ई-सिगरेट एक तरह की मशीन है, जिसमें लिक्विड निकोटिन, ग्लिसरीन और फ्लेवर भरा जाता है। इस्तेमाल के दौरान लिक्विड होकर भाप में बदलता है और फिर धुआं का रूप ले लेता है। यही धुआं सेहत के लिए हानिकारक है। आमौतर पर कागज के रोल वाली सिगरेट में निकोटिन और टार भरा होता है, जो कैंसर की वजह बनता है। पहली बार जब ई-सिगरेट दुनिया के बाजारों में पहुंचा, तो लोग इसे सिगरेट छोड़ने के विकल्प के रूप में देख रहे थे। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग गई। सबसे चिंताजनक बात है कि यह छात्रों और युवाओं के बीच एक ट्रेंड की तरह उभरा है।

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ई-सिगरेट से हार्ट अटैक
ई-सिगरेट से निकला हुआ धुआं निकोटिन ब्लड वेसल्स में सिकुड़न पैदा करता है। इसे हार्ट की मसल्स भारी हो जाती हैं। इस वजह से बल्ड प्रेशर बढ़ जाता है और हार्ट बल्ड को ठीक तरह से बल्ड को पंप नहीं कर पाता है।
