Hidden Online Expenses: आज के समय में ऑनलाइन पेमेंट (Online Payment) करना बेहद आसान हो गया है। चाय-कॉफी, फूड-डिलिवरी, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, कैब बुकिंग, शॉपिंग या छोटी-मोटी ऑनलाइन खरीदारी जैसे अधिकतर भुगतान कुछ सेकंड में यूपीआई (UPI) या कार्ड (Debit Card/Credit Card) से हो जाते हैं। समस्या यह है कि छोटी रकम खर्च करते समय हमें अक्सर ज्यादा पैसे खर्च होने का एहसास नहीं होता। लेकिन महीनेभर की ऐसी छोटी-छोटी पेमेंट्स को जोड़ें तो साल के अंत तक यह रकम हजारों रुपये तक पहुंच सकती है।
छोटी-छोटी पेमेंट्स को न करें नजरअंदाज
मान लीजिए आप रोजाना औसतन 100 रुपये का कोई छोटा ऑनलाइन खर्च करते हैं। रकम छोटी लग सकती है, लेकिन महीने में यह करीब 3,000 रुपये और सालभर में करीब 36,500 रुपये हो जाती है। यानी रोज सिर्फ 100 का खर्च भी एक साल में अच्छी-खासी रकम बन सकता है।
छोटे खर्चों का समझें बड़ा हिसाब
अब एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति के हर महीने ऑनलाइन होने वाले छोटे खर्च इस तरह हैं-
फूड डिलीवरी – 1,200 रुपये
ऑनलाइन शॉपिंग – 1,000 रुपये
ओटीटी और दूसरे सब्सक्रिप्शन – 600 रुपये
कैब/ऑटो बुकिंग – 800 रुपये
कॉफी और स्नैक्स – 900 रुपये
दूसरे छोटे ऑनलाइन पेमेंट – 500 रुपये
यानी कुल मासिक खर्च 5000 रुपये हुआ। सालभर का हिसाब देखें तो यही रकम 60 हजार रुपये बन जाएगी।
अगर यही रकम बचाकर निवेश की जाए तो लंबे समय में इसका इस्तेमाल किसी बड़े Financial Goal के लिए किया जा सकता है।
Subscription को भी नजरअंदाज न करें
कई बार छोटे खर्चों के साथ-साथ कई ऐसे सब्सक्रिप्शन भी चलते रहते हैं जिनका इस्तेमाल बहुत कम होता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास तीन अलग-अलग सब्सक्रिप्शन हैं, जिन पर कुल 500 रुपये महीने खर्च होते हैं। सालभर में यह रकम 6 हजार रुपये हो जाती है।
अगर कोई Subscription इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो उसे बंद करना आसान बचत हो सकती है। इसलिए महीने में एक बार अपने बैंक खाते और यूपीआई ऐप्स में होने वाले Automatic Payments जरूर चेक करें।
हर Payment को रोकना जरूरी नहीं
छोटे खर्चों का हिसाब रखने का मतलब यह नहीं है कि हर Coffee, Movie या Food Order बंद कर दिया जाए। बेहतर तरीका है कि पहले यह पता लगाया जाए कि पैसा कहां जा रहा है और कौन-सा खर्च वास्तव में जरूरी है।
सालाना खर्च देखकर फैसला आसान होगा
छोटे खर्चों को कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका है कि हर महीने की रकम को 12 से गुणा करके सालाना खर्च निकालें। इससे पता चलेगा कि कौन-सा छोटा खर्च वास्तव में बड़ा बन चुका है। अगर महीने में 300 रुपये किसी ऐसी चीज पर खर्च हो रहे हैं, जिसकी जरूरत नहीं है तो साल में यह 3,600 रुपये बन जाता है। वहीं 1,000 की मासिक बचत सालभर में 12,000 रुपये हो सकती है।
