VR Tourism: वर्चुअल रियलिटी यानी VR टूरिज्म ने पर्यटन की दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया है। कुछ साल पहले अगर आपसे कहा जाता कि बिना घर से निकले आप स्विटजरलैंड की गलियों में घूम सकते हैं, दुबई की ऊंची इमारतों को देख सकते हैं तो शायद आपको ये सब मजाक लगता और इस बात पर यकीन कर पाना आपके लिए मुश्किल होता। लेकिन, अब वर्चुअल रियलिटी ने इसे सच कर दिखाया है। अब आप दुनिया की खूबसूरत जगहों को मोबाइल, लैपटॉप या VR हेडसेट की मदद से ऐसे एक्सपीरियंस कर सकते हैं जैसे सच में आप वहां मौजूद हों।
क्या है वर्चुअल रियलिटी टूरिज्म
सबसे पहले ये समझना बेहद जरूरी है कि आखिर वर्चुअल रियलिटी टूरिज्म है क्या। सीधे और सरल शब्दों में समझें टेक्नोलॉजी की मदद से किसी जगह का डिजिटल अनुभव लेना वर्चुअल रियलिटी कहलाता है। इसमें 360 डिग्री वीडियो, VR हेडसेट और खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके इंसान को ऐसा महसूस कराया जाता है जैसे वह अपनी मनचाही जगह पर घूम रहा है।
उदाहरण से इसे समझते हैं। अगर आप VR हेडसेट पहनकर ताजमहल का वर्चुअल टूर देखते हैं, तो आपको ऐसा लगेगा जैसे आप सच में उसके सामने खड़े हों। आप अलग-अलग एंगल से चीजों को महसूस कर सकते हैं और कई बार तो आपको वहां की आवाजें भी बिल्कुल असली जैसी सुनाई देती हैं।
वर्चुअल रियलिटी टूरिज्म
क्यों तेजी से बढ़ रहा है VR टूरिज्म
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ना तो लोगों के पास ज्यादा वक्त है और ना ही बार-बार ट्रिप पर जाने का बजट। ऐसे में घूमने-फिरने का शौक रखने वाले पर्यटकों के लिए VR टूरिज्म आसान विकल्प बनकर सामने आया है।
1- घर बैठे घूम लो दुनिया
अब आपको किसी खास जगह को देखने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा करने की जरूरत नही है। घर बैठे ही VR हेडसेट की मदद से अब आप दुनिया की मशहूर जगहों को महसूस कर सकते हैं।
2- कम खर्च में घूम लो दुनिया
VR टूरिज्म के जरिए पैसे की भी बचत होती है। अगर आप कहीं घूमने का प्लान करते हैं तो फ्लाइट, होटल और खाने-पीने का खर्च काफी ज्यादा होता है। कम पैसों में VR के जरिए शानदार अनुभव लिया जा सकता है।
3- बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए आसान
ज्यादातर बुजुर्ग और दिव्यांग लोग स्वास्थ्य कारणों से ट्रैवल नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वर्चुअल रियलिटी टूरिज्म उनके लिए नई उम्मीद बनकर आई है।
तेजी से बढ़ रहा है VR टूरिज्म
टूरिज्म इंडस्ट्री को कैसे मिल रहा है इसका फायदा
वर्चुअल रियलिटी ना सिर्फ लोगों के लिए, बल्कि ट्रैवल इंडस्ट्री के लिए भी बड़ा बदलाव लेकर आई है। टूरिज्म इंडस्ट्री को कैसे वर्चुअल रियलिटी का फायदा मिल रहा है इसे यहां आसान भाषा में समझते हैं।
1- वर्चुअल टूर का कर रहे हैं इस्तेमाल
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अब कई होटल अपनी वेबसाइट पर VR टूर देते हैं। VR टूर के जरिए लोग पहले ही देख लेते हैं कि होटल कैसा है, कमरा कैसा है और आसपास का माहौल कैसा है।
2- ट्रैवल कंपनियां बढ़ा रही हैं ग्राहकों का भरोसा
VR टूर के जरिए ग्राहकों का भरोसा बढ़ रहा है। अगर आप पहले से ही किसी जगह को वर्चुअली देख लेते हैं, तो आपके लिए ट्रिप बुक करना आसान हो जाता है।
3- पर्यटन स्थलों का प्रमोशन
पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने के लिए कई देश अब वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। सिर्फ मनोरंजन तक ही वर्चुअल रियलिटी सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल अब शिक्षा और इतिहास समझाने में भी हो रहा है। अब छात्र घर बैठे मिस्र के पिरामिड से लेकर रोम के कोलोसियम तक का वर्चुअल टूर कर सकते हैं।
टूरिज्म इंडस्ट्री को मिल रहा है इसका फायदा
पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद है VR टूरिज्म?
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज दुनिया में पर्यटन के कारण कार्बन उत्सर्जन तेजी से बढ़ा है। फ्लाइट्स और ट्रांसपोर्ट प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जहां संभव हो वहां टूरिस्ट वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अगर लोग छोटी-छोटी यात्राओं की जगह VR का इस्तेमाल करें, तो प्रदूषण कम हो सकता है।
VR Tourism के नुकसान
हर टेक्नोलॉजी की तरह VR टूरिज्म के कुछ नुकसान भी हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए।
1- असली अनुभव की कमी
वर्चुअल रियलिटी कितना भी एडवांस हो जाए, लेकिन असली दुनिया जैसा अनुभव देना अभी मुश्किल है।
2- महंगी है टेक्नोलॉजी
टेक्नोलॉजी के लिए भी आपको अच्छे खासे पैसे चुकाने होते हैं। अच्छे VR हेडसेट और सिस्टम अभी भी काफी महंगे हैं।
3- हेल्थ से जुड़ी समस्याएं
कुछ लोगों को ज्यादा देर तक VR इस्तेमाल करते समय चक्कर, सिरदर्द या आंखों में परेशानी महसूस होती है।
4- कम हो जाता है सोशल एक्सपीरियंस
असल यात्रा यानी जब आप सचमुच किसी जगह घूमने जाते हैं तब नए-नए लोगों से मिलने और नई संस्कृति को समझने का मौका मिलता है, जो VR में सीमित हो जाता है।
क्या असली यात्रा की जगह ले सकती है वर्चुअल रियलिटी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्चुअल रियलिटी असली यात्रा को पूरी तरह से रिप्लेस कर सकती है? इसका जवाब है नहीं। वर्चुअल रियलिटी किसी जगह का शानदार डिजिटल अनुभव जरूर दे सकती है लेकिन, असली यात्रा की फीलिंग अलग होती है। जब आप कहीं घूमने जाते हैं तो उस जगह की हवा महसूस करते हैं, वहां का लोकल फूड, लोगों से मिलना और असली माहौल को जीना सिर्फ वास्तविक यात्रा में ही संभव है। असली ट्रैवल में भावनाएं और यादें भी जुड़ी होती हैं।
