Vat Savitri Vrat

Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए रखती हैं। ये व्रत हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पड़ता है। इस दिन वट यानि बरगद के पेड़ की पूजा होती है। मान्यताओं अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही वट वृक्ष के नीचे सावित्री के पति सत्यवान को यमराज ने जीवन दान दिया था। जिस वजह से इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं महिलाओं द्वारा ये व्रत करने से पति पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। वट सावित्री व्रत की पूजा के समय महिलाएं वट वृक्ष यानि बरगद के वृक्ष की परिक्रमा करते हुए अपने पति की लंबी आयु और अपने वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।