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फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने के लिए भी कराना होगा KYC? सरकार जल्द ला सकती है कानून

Mandatory KYC For Social Media: भारत सरकार जल्द ही Social Media के लिए नया कानून ला सकती है जिसके बाद सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए पहले KYC कराना होगा। सरकार का यह कदम सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल पर लगाम लगाने के लिए है।

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फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने के लिए भी कराना होगा KYC? सरकार जल्द ला सकती है कानून/Photo- iStock

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भारत में सोशल मीडिया धीरे-धीरे एक लाइलाज बीमारी का रूप ले रहा है। बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसकी चपेट में हैं। हर कोई स्मार्टफोन के चंगुल में फंस चुका है। देश के कई राज्यों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की भी बात हो रही है, लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर आई है जो प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए लिहाज से तो अच्छी और अहम है। दरअसल सोशल मीडिया के लिए केवाईसी (KYC) अनिवार्य करने की बात हो रही है।

सोशल मीडिया चलाने के लिए KYC अनिवार्य!

भारत में सोशल मीडिया, डेटिंग एप्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए जल्द ही KYC आधारित पहचान प्रणाली लागू हो सकती है। एक संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में आईटी और गृह मंत्रालय को यह सिफारिश दी है। यह सुझाव खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।

अकाउंट बनाने से पहले करना होगा KYC

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यूजर्स को किसी भी सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने या लॉगिन करने से पहले KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसका मतलब है कि अब ऑनलाइन पहचान पूरी तरह गुमनाम नहीं रह पाएगी और हर यूजर को अपनी असली पहचान से जुड़ना होगा। इस प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया, डेटिंग एप्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर KYC आधारित उपयोगकर्ता पहचान और उम्र की जांच करने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।

फर्जी अकाउंट बने बड़ी समस्या

समिति ने बताया कि फर्जी प्रोफाइल आज सबसे बड़ी चिंता बन चुके हैं। इनका इस्तेमाल साइबर स्टॉकिंग, धोखाधड़ी, उत्पीड़न और पहचान चोरी जैसे अपराधों में किया जाता है। खासकर महिलाएं और बच्चे इन फर्जी अकाउंट्स के जरिए होने वाले उत्पीड़न का ज्यादा शिकार होते हैं। ऐसे में KYC लागू होने से इन गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकती है। यह सिफारिश महिलाओं के सशक्तिकरण पर संसदीय समिति द्वारा 'साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा' विषय पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का हिस्सा है।

उम्र की सख्त जांच पर जोर

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र का सही वेरिफिकेशन करना चाहिए। खासकर डेटिंग और गेमिंग एप्स पर नाबालिगों की मौजूदगी को रोकने के लिए समय-समय पर उम्र की दोबारा जांच भी जरूरी बताई गई है। नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माना लगाने की भी बात कही गई है।

AI से बढ़ रहा खतरा

समिति ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों ने ऑनलाइन खतरे को और बढ़ा दिया है। डीपफेक और ऑटोमेटेड बॉट्स के जरिए गलत और हानिकारक कंटेंट तेजी से फैल रहा है। ऐसे में सख्त नियमों की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। समिति ने जोर देकर कहा है कि फर्जी प्रोफाइल और गुमनाम उत्पीड़न जैसी समस्याओं को रोकने के लिए सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य केवाईसी सत्यापन होना चाहिए।

प्राइवेसी को लेकर भी उठे सवाल

इन उपायों से जहां एक ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कम होगा और पहचान सुनिश्चित करना आसान होगा, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर निजता और डेटा सुरक्षा पर बहस छिड़ने की भी संभावना है। यूजर्स का निजी डेटा सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती होगी। साथ ही, छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए इस तरह की व्यवस्था लागू करना मुश्किल हो सकता है।

डिजिटल दुनिया में बड़ा बदलाव संभव

अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। गुमनाम अकाउंट्स की जगह वेरिफाइड पहचान का चलन बढ़ेगा, जिससे ऑनलाइन दुनिया अधिक सुरक्षित लेकिन कम गुमनाम हो सकती है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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