Artificial Intelligence यानी AI को लेकर दुनिया में पहले से ही उथल-पुथल मची है। IT और टेक सेक्टर में AI की वजह से पहले ही लाखों लोगों बेरोजगार हो चुके हैं। अब AI के क्षेत्र में अपने काम के लिए ‘Godfather of AI’ कहे जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन (Geoffrey Hinton) ने ऐसी चेतावनी दी है, जिससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। हिंटन का कहना है कि AI की वजह से दुनिया में भारी बेरोजगारी पैदा हो सकती है।
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स (Bernie Sanders) के साथ जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी (Georgetown University) में बातचीत के दौरान हिंटन ने कहा कि इस बात की आशंका अब काफी ज्यादा बढ़ गई है कि AI की वजह से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी आएगी। उनके मुताबिक टेक कंपनियां डेटा सेंटर और चिप्स पर खरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और इसके पीछे एक बड़ा दांव यह है कि AI इंसानों की तुलना में काफी कम लागत पर उनका काम कर सके।
इंसानों की जगह लेने पर लगा रहीं दांव?
हिंटन ने कहा कि एआई कंपनियां केवल तकनीक को बेहतर बनाने के लिए निवेश नहीं कर रहीं, बल्कि उनके बिजनेस मॉडल में इंसानों के किए जाने वाले काम को एआई से कराने की संभावना भी शामिल है। यानी कंपनियां ऐसी तकनीक पर दांव लगा रही हैं जो कम लागत में ज्यादा काम कर सके।
यह चिंता अकेले जेफ्री हिंटन की नहीं है। टेक दुनिया के कई बड़े नाम पहले ही एआई और रोजगार के भविष्य को लेकर अपनी राय रख चुके हैं।
AI पर क्या कह रहे दिग्गज?
Nvidia के CEO जेनसन हुआंग (Jensen Huang) का मानना है कि AI धीरे-धीरे मौजूद हर तरह की नौकरी में पहुंच सकता है। हालांकि, उनका नजरिया पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। उनका मानना है कि एआई से काम करने का तरीका बदल सकता है और भविष्य में चार दिन का वर्कवीक भी संभव हो सकता है। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स इससे भी आगे की तस्वीर बताते हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में इंसानों की ज्यादातर कामों में जरूरत कम हो सकती है। यानी एआई और ऑटोमेशन कई ऐसे काम कर सकते हैं जिन्हें अभी लोग करते हैं।
मस्क ने दिखाई सबसे अलग तस्वीर
दुनिया के सबसे अमीर शख्स और एलन मस्क का अनुमान सबसे बड़ा है। उनका कहना है कि 20 साल से भी कम समय में ऐसा दौर आ सकता है जब ज्यादातर लोगों के लिए काम करना जरूरी ही नहीं रह जाएगा। एआई और रोबोटिक्स इतनी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं कि इंसानों की जरूरत वाले कामों की संख्या काफी घट जाए। वे इसे सिंगुलैरिटी इवेंट बताते हैं, यानी ऐसी स्थिति जिसमें AI और रोबोट खुद से खुद को तैयार करेंगे और आगे बढ़ाएंगे।
करीब 10 करोड़ नौकरियां खत्म होने का खतरा
एआई से नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स भी लगातार चेतावनी देते रहे हैं। 2025 में जारी उनके एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में ऑटोमेशन की वजह से करीब 10 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं। इनमें सिर्फ साधारण या कम वेतन वाली नौकरियां शामिल नहीं हैं। फास्ट फूड और कस्टमर सर्विस के साथ-साथ अकाउंटिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और नर्सिंग जैसे काम भी एआई और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकते हैं।
फिर क्या इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी?
जेफ्री हिंटन खुद भी इस सवाल का सीधा और निश्चित जवाब नहीं देते। उनका कहना है कि एआई के भविष्य की भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है। उनके मुताबिक एक-दो साल आगे की स्थिति का कुछ अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन 10 साल बाद एआई कहां पहुंच चुका होगा, यह बताना लगभग असंभव है। यही वजह है कि एआई को लेकर दो तस्वीरें सामने हैं। एक तरफ एआई काम को तेज, सस्ता और आसान बना सकता है। नई नौकरियां और नए उद्योग भी पैदा हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर तकनीक इंसानों के मुकाबले ज्यादा सस्ते में वही काम करने लगे तो लाखों लोगों की जरूरत कम हो सकती है।
