मंगलवार, 6 अक्टूबर जब सूर्य अपने परवान पर था तब भारतीय क्रिकेट में एक ऐसी खबर सामने आई जिसने गर्मी और बढ़ा दी। दरअसल भारत को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप में चैंपियन और एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल सहित लॉर्ड्स टेस्ट में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपने लीडरशिप रोल से आगे बढ़ने का ऐलान कर दिया। जेंटलमैन गेम कहे जाने वाले क्रिकेट में हरमन ने बड़े ही जेंटल विमेन की तर्ज पर इस रोल को अलविदा कहा। इसे क्रिकेट के प्रति उनका प्यार ही कहें कि उन्होंने साफ लिखा कि वो खेलना जारी रखेंगे। इस तरह 10 साल के उनके स्वर्णिम कप्तानी काल का अंत हो गया।
हरमन की महानता का अदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि जब बतौर कप्तान वो आखिरी बार उतरीं तो सबके गले में गोल्ड मेडल चमक रहा था। हरमन ने इस खबर के लिए धोनी की तरह इंस्टाग्राम का मंच चुना। विमेंस क्रिकेट में नंबर 7 की जर्सी को एक अलग मुकाम देने वाली हरमन ने भले कप्तानी छोड़ दी, लेकिन लीडर के तौर पर टीम में उनकी भूमिका आगे भी अहम रहेगी। हालांकि, हरमन ने वनडे वर्ल्ड कप से ठीक पहले अपनी जर्सी को 7 से नंबर 23 में बदल लिया था।
धोनी से जरा कम नहीं हरमन
हमने फिल्मी पर्दे पर बहुतों बार यह सुना है कि म्हारी छोरिया, छोरों से कम नही है, लेकिन हरमन ने इसे सच करके दिखाया। मेंस क्रिकेट में जो औरा एमएस धोनी का रहा वही विमेंस क्रिकेट में हरमनप्रीत कौर का रहा। चाहे वह टीम को वनडे वर्ल्ड चैंपियन बनाने की हो या फिर खिलाड़ियों के मन में विश्वास जगाने की। हरमन ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया। भारतीय क्रिकेट में उनकी उपलब्धि धोनी से जरा भी कम नहीं है।
HARMANPREET KAUR
हरमनप्रीत जैसी कोई नहीं
कप्तान ही नहीं एक खिलाड़ी के तौर पर भी हरमनप्रीत कौर को पूरे नंबर मिलने चाहिए। विमेंस क्रिकेट में सर्वाधित अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड भी हरमनप्रीत कौर के नाम है। सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले की बात हो या फिर बतौर कप्तान सबसे ज्यादा टी20 मैच में कप्तानी करने की हर लिस्ट में हरमन टॉप पर हैं। इतना ही नहीं वह पहली भारतीय क्रिकेटर बनी जिन्हें विदेशी लीग खेलने का कांट्रैक्ट मिला।
कप्तानी में हरमन का दौर
ज्यादातर क्रिकेटरों का कार्यकाल होता है, लेकिन हरमनप्रीत कौर की कप्तानी का दौर रहा। हरमन की कप्तानी में भारत ने 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में से 93, 51 वनडे में 30 और 5 टेस्ट मैच में से 4 में जीत दर्ज की। इसमें लॉर्ड्स का ऐतिहासिक जीत भी शामिल था जहां हरमन ऐसा करने वाली पहली कप्तान बनीं।
बात वनडे की करें तो 2025 में उनकी टीम ने साउथ अफ्रीका को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाई और भारतीय विमेंस क्रिकेट की दशा और दिशा बदल कर रख दी। इस जीत के बाद विमेंस क्रिकेट की व्यूवरशिप में भी बेतहाशा वृद्धि हुई। टी20 की बात करें तो एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल के अलावा उनकी कप्तानी में भारत ने चार बार एशिया कप की ट्रॉफी उठाई।
harmanpreet kaur
हरमन के मन की टीस...
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी की बात करें तो उन्होंने उम्मीद से बढ़कर खुद को साबित किया, लेकिन कहते हैं कि हर किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता। हरमन के मन में भी एक टीस रह गई कि वह टी20 फॉर्मेट में भारत को ट्रॉफी दिला पाईं। एक बार उनकी कप्तानी में टीम फाइनल तक पहुंची लेकिन ऑस्ट्रेलिया रूपी आखिरी बाधा नहीं पार कर पाई। एक कप्तान के तौर पर इसकी टीस उनके मन में हमेशा रहेगी।
कौर की आगे की राह...
हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी छोड़ी है। एक खिलाड़ी के तौर पर वह और भी बेफिक्र, निडर और विरोधी टीमों के लिए खतरा बन चुकी हैं। अब भारत की ये शेरनी बिना किसी दबाव के खेलेगी और अगले साल होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में टीम की जीत में अहम भूमिका निभाएगी। इसके साथ-साथ उन्हें स्मृति मंधाना को कप्तान के तौर पर तैयार करने में भी उनका रोल अहम रहने वाला है।
द शो मस्ट गो ऑन...
अब जबकि हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी छोड़ दी है तब 8 टेस्ट, 164 और 210 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में क्रमश: 304 रन, 4,541 रन और 4,346 रन बनाए हैं। हरमन ने वनडे में 7 और टी20 में एक शतक जड़ा है जबकि टेस्ट में उनका सर्वाधिक स्कोर 69 रन रहा। गेंदबाजी में भी खुद को आजमाने वाली हरमन ने टेस्ट में 12, वनडे में 31 और टी20 में 32 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने कप्तानी छोड़ भले छोड़ दी हो, लेकिन जब तक टीम के भीतर रहेंगी लीडर के तौर पर बनी रहेंगी।
