Explained: गूगल कीवर्ड एडवरटाइजिंग पर दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला क्यों है बेहद अहम?

2009 तक, गूगल भारत में कीवर्ड के तौर पर ट्रेडमार्क के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता था, लेकिन 2009 के बाद यह पॉलिसी बदल दी गई। कंपनी ने कहा कि भारत में लागू पॉलिसी, यूरोपियन यूनियन (EU) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के देशों के लिए गूगल की पॉलिसी से अलग है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों हिंडवेयर लिमिटेड की ओर से शुरू किए गए ट्रेडमार्क विवाद में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने टेक दिग्गज गूगल (Google) की नींद उड़ा दी है। कोर्ट ने 163 पन्नों के अपने एक बेहद कड़े फैसले में साफ कहा है कि गूगल दूसरों के ट्रेडमार्क को उनके प्रतिद्वंद्वियों को बेचकर "फ्री-राइडिंग" (दूसरों की साख पर मुफ्त की सवारी) कर रहा है। यानी गूगल वह चीज बेचने की कोशिश कर रहा है जिसका वह मालिक ही नहीं है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा विवाद और कैसे कोर्ट का फैसला भारत में डिजिटल विज्ञापन की दुनिया में बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है?

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गूगल एडवर्ड्स गूगल का एक विज्ञापन प्लेटफॉर्म है, जो कीवर्ड के आधार पर सर्च रिज़ल्ट के साथ विज्ञापन दिखाने की सुविधा देता है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

गूगल के साथ हिंडवेयर का विवाद किस बारे में था?

2013 की शुरुआत में, सैनिटरीवेयर प्रोडक्ट्स का कारोबार करने वाली कंपनी 'हिंडवेयर लिमिटेड' को पता चला कि उसकी प्रतिस्पर्धी सैनिटरीवेयर कंपनियों - 'ग्रोहे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और 'सेरा सैनिटरीवेयर लिमिटेड' ने गूगल के एडवर्ड्स प्रोग्राम के जरिए 'हिंडवेयर' ट्रेडमार्क को कीवर्ड के तौर पर खरीदा था। नतीजा यह हुआ कि जब भी कोई ग्राहक गूगल सर्च इंजन पर 'हिंडवेयर' शब्द सर्च करता, तो सबसे पहला नतीजा 'सेरा' की वेबसाइट का आता था। साथ ही, जब कोई 'हिंडवेयर सैनिटरी' या 'हिंडवेयर सैनिटरीवेयर' सर्च करता, तो पहला नतीजा 'ग्रोहे' की वेबसाइट का आता था।

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