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केंद्र की बड़ी पहल: SEZ नियमों में ढील से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को मिलेगा बढ़ावा

Semiconductors manufacturing in india: यह कदम वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है। यह नियम गोवा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, सिक्किम, लद्दाख, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली में लागू होगा।

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Semiconductors manufacturing in india

Semiconductors manufacturing in india: केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए नियमों में ढील दी है। इसके तहत कंपनियों को विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में छोटे भूखंडों पर कारखाने स्थापित करने की अनुमति दी गई है, जिससे प्रवेश की लागत कम होगी। इन इकाइयों को निर्यात के अलावा घरेलू बाजार में अपने उत्पाद बेचने की भी अनुमति होगी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर या इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स बनाने के लिए एसईजेड में कारखानों के लिए न्यूनतम भूमि की आवश्यकता को पहले की 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसी तरह, मल्टी-प्रोडक्ट एसईजेड में, न्यूनतम भूमि की आवश्यकता को पहले की 20 हेक्टेयर से घटाकर 4 हेक्टेयर कर दिया गया है।

यह नियम गोवा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, सिक्किम, लद्दाख, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली में लागू होगा। आसान किए गए मानदंड सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले मॉड्यूल सब एसेंबली, कई दूसरे मॉड्यूल सब-एसेंबली, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स, लिथियम-आयन बैटरी सेल, मोबाइल और आईटी हार्डवेयर कंपोनेंट्स, हियरेबल्स और वियरेबल्स सहित कई अन्य क्षेत्रों पर लागू होंगे। विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) नियम, 2025 के तहत ये बदलाव 3 जून को लागू हुए हैं।

यह कदम वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है। देश में स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में जोरदार वृद्धि के साथ हाल के वर्षों में भारत में चिप्स की मांग बढ़ी है। सरकार द्वारा 3 जून को अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) नियम, 2025 भी निर्माताओं को तैयार माल को स्थानांतरित करने या बेचने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान करते हैं।

आसान किए गए नियमों के तहत, कंपनियां अब या तो भारत से सीधे माल निर्यात कर सकती हैं या आवश्यक करों का भुगतान कर देश में (घरेलू टैरिफ क्षेत्र) उन्हें बेच सकती हैं। वे अपने माल को उसी या किसी अन्य एसईजेड में एक मुक्त व्यापार और भंडारण क्षेत्र में या एक कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में भी ले जा सकते हैं, जो सरकारी नियंत्रण के तहत एक विशेष भंडारण है। इससे कंपनियों को अपने इन्वेंटरी का प्रबंधन करने और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

इसके अलावा, एसईजेड में स्थित सेवा प्रदाता अब आयात के अलावा घरेलू बाजार से कच्चा माल, पूंजीगत सामान, घटक और उपभोग्य वस्तुएं प्राप्त कर सकते हैं। इससे चीजें आसान हो जाएंगी क्योंकि एसईजेड इकाइयों को आयात पर खर्च करने की तुलना में निर्यात के माध्यम से अधिक विदेशी मुद्रा लाने की आवश्यकता होती है।

इनपुट-आईएएनएस

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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