स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह अपने क्रिकेट करियर के ज्यादातर समय रूमेटाइड आर्थराइटिस नामक बीमारी से जूझते रहे। यह बात उनके करीबी दोस्तों को भी नहीं पता थी। उन्होंने खास इलाज और होने वाले बदनामी से बचने के लिए अपनी बीमारी को छिपाकर रखा।
ऑस्ट्रेलिया के लिए 88 टेस्ट मैच खेलने वाले उस्मान ख्वाजा ने अपना इंटरनेशनल करियर खत्म करने के कुछ महीनों बाद इसका खुलासा किया है। जब उन्हें यह जानलेवा बीमारी पता चली, तब वह सिर्फ 22 साल के थे। यहां तक कि उनके करीबी दोस्त डेविड वार्नर और माइकल हसी भी ख्वाजा की बीमारी से अनजान थे, क्योंकि 39 साल के ख्वाजा ने अपने पूरे करियर में इसे छिपाकर रखा था।
टीम के साथी खिलाड़ियों से छिपाई बात
उन्होंने दावा किया कि ख्वाजा ने अपनी बीमारी के बारे में अपने टीम के साथियों से इसलिए छिपाया, क्योंकि वह स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं चाहते थे या इस बीमारी का इस्तेमाल उनके खिलाफ होने का खतरा नहीं उठाना चाहते थे। भले ही मेडिकल, कोचिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव लोगों को इसके बारे में पता था।
'ABC Sport' से बात करते हुए ख्वाजा ने चिंता जताई कि इस बीमारी की वजह से क्रिकेट खेलने का उनका लक्ष्य शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा। जब मेडिकल प्रोफेशनल्स पहले उनके बाएं घुटने के दर्द की वजह का पता नहीं लगा पाए, तो उन्हें भी लगा कि उन्हें कोई लाइलाज बीमारी है।
'मैं मरने वाला हूं'
ABC स्पोर्ट के अनुसार, ख्वाजा ने कहा, मुझे सच में लगा कि मैं मरने वाला हूं। मैं एक एथलीट था जो प्रोफेशनल क्रिकेट खेलता था, लेकिन मैं बाथरूम तक 10 मीटर भी नहीं चल सकता था।
ख्वाजा के अनुसार, उन्हें उम्मीद है कि अपनी बीमारी का पता चलने से ऑटोइम्यून डिसऑर्डर वाले लोगों को उम्मीद मिल सकती है। अपनी जल्द ही पब्लिश होने वाली ऑटोबायोग्राफी 'सब्र' में उन्होंने यह भी बताया है कि उन्होंने इस बीमारी से कैसे संघर्ष किया।
उन्होंने कहा, अगर कोई व्यक्ति रूमेटाइड आर्थराइटिस के साथ एक प्रोफेशनल क्रिकेटर के तौर पर टॉप लेवल पर खेल सकता है, तो मुझे लगता है कि बहुत से दूसरे लोग भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।
दवा बनी वरदान
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ने यह भी बताया कि वह अपनी बीमारी के इलाज के लिए रेगुलर तौर पर एक दवा लेते हैं जिसे वह 'भगवान का दिया हुआ वरदान' कहते हैं। ख्वाजा ने कहा, उस ड्रग के बिना, मैं कभी दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाता या फिर नॉर्मल जिंदगी भी नहीं जी पाता।
8 बार टीम से हुए अंदर-बाहर
ऑस्ट्रेलिया के लिए ख्वाजा ने 6,229 इंटरनेशनल रन बनाए, जिसमें 16 शतक शामिल हैं। इसके अलावा, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पाकिस्तान के पहले एथलीट थे। मुश्किलों को पार करने की उनकी काबिलियत ने उनके करियर की पहचान बनाई। ख्वाजा ने आठ बार अपनी जगह खोई, जिससे वह ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा बाहर किए जाने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए। जब उन्होंने जनवरी 2022 में 35 साल की उम्र में सिडनी एशेज टेस्ट में दो शतक (137 और 101 नॉट आउट) लगाए, तो यह उनके करियर के सबसे अच्छे पलों में से एक था।
क्या है रूमेटाइड आर्थराइटिस नामक बीमारी
यह एक ऑटोइम्यून (स्वप्रतिरक्षी) बीमारी है। इसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से शरीर के स्वस्थ ऊतकों और जोड़ों की परत (साइनोवियल झिल्ली) पर हमला कर देती है। इससे जोड़ों में गंभीर सूजन, दर्द और जकड़न पैदा होती है। इसमें हाथों और पैरों की अंगुलियां ऐठन की वजह से कई बार टेढ़ी तक हो जाती हैं।
