घर पहुंचने पर 'ममतामयी स्वागत', मां से मिलने के बाद मीराबाई चानू की आखें हुईं नम

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भाषा
Updated Jul 27, 2021 | 20:33 IST

Mirabai Chanu Viral Photo: मीराबाई चानू का अपने गृह राज्य मणिपुर पहुंचने पर 'ममतामयी स्वागत' हुआ। टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद चानू पहली बारी अपनी मां से मिलीं तो उनकी आंखें नम हो गईं।

Mirabai Chanu meets mother
मां के साथ मीराबाई चानू  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • मीराबाई चानू सिल्वर जीतकर छाई हुईं हैं
  • वेटलिफ्चर चानू टोक्यो से भारत आ गई हैं
  • वह अपनी मां से मिलकर भावुक हो गईं

इंफाल: ओलंपिक भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली मीराबाई चानू मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह द्वारा सम्मानित किये जाने से पहले यहां हवाई अड्डे पर मंगलवार को अपनी मां से मिलने के बाद भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखें नम हो गयी। सोमवार को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए स्वागत समारोह की तरह ही यहां बीर टिकेंद्रजीत अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर मीराबाई की झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के साथ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे । उनके हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही अफरातफरी मच गयी। रियो (2016) ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मीराबाई को पिछले पांच वर्षों में बहुत बार घर आने का मौका नहीं मिला था।  

49 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता

ओलंपिक भारोत्तोलन में 49 किग्रा भार वर्ग में शनिवार को रजत पदक जीतने वाली मीराबाई यहां पहुंचने पर अपनी मां सेखोम ओंगबी तोम्गी लीमा और पिता सेखोम कृति मेइतेई से गले मिलीं, जिसके बाद उनकी आंखें नम हो गयी। इस बीच सुरक्षाकर्मियों ने उनके आसपास एक घेरा बनाया था। चानू ने खेलों के दौरान ओलंपिक प्रतीक चिह्न जैसी सोने की बालियां (कान का आभूषण) पहनी थी जो काफी लोकप्रिय हुआ। यह बालियां उनकी मां ने पांच साल पहले रियो खेलों से पहले अपने आभूषण बेच कर बनवायी थी। उनका मानना था कि यह मीराबाई के लिए भाग्यशाली साबित होगा।

नोगपोक काकचिंग गांव में रहती हैं चानू

यह 26 साल की खिलाड़ी यहां से लगभग 25 किलोमीटर दूर नोगपोक काकचिंग गांव में रहती हैं। मीराबाई हवाई अड्डे से मणिपुर राज्य सरकार के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंची, जिसकी मेजबानी मुख्यमंत्री ने की थी। मणिपुर की इस खिलाड़ी ने 49 किग्रा वर्ग में कुल 202 किग्रा (87 किग्रा + 115 किग्रा) भार उठाकर शनिवार को रजत पदक हासिल किया था। इससे पहले भारोत्तोलन में 2000 सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था।

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