डॉ. रामविलास वेदांती कौन थे, क्यों कहे जाते हैं अयोध्या राम मंदिर के प्रमुख सूत्रधार, पढ़ें उनके बारे में पूरी जानकारी
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 15, 2025, 02:47 PM IST
Who was Dr Ramvilas Vedanti (डॉ. रामविलास वेदांती कौन थे): राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख सूत्रधारों में से एक डॉ. रामविलास वेदांती का 15 दिसंबर को रीवा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। रामविलास वेदांती राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वो शख्स थे, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया था। आइए जानते हैं कि राम विलास वेदांती की जीवन से जुड़े उन संघर्षों को, जिन्होंने उन्हें अमर कर दिया।
कौन थे डॉ. रामविलास वेदांती
Who was Dr Ramvilas Vedanti (डॉ. रामविलास वेदांती कौन थे): राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख लोगों में एक डॉ. रामविलास वेदांती का 15 दिसंबर को मध्यप्रदेश के रीवा जिले के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। रामविलास वेदांती हिंदू धर्म, राम जन्मभूमि आंदोलन और राजनीति के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम थे।
वे एक संत, धार्मिक नेता और पूर्व सांसद थे, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। उनका जन्म 7 अक्टूबर 1958 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन राम जन्मभूमि न्यास और राम मंदिर आंदोलन को समर्पित किया और राजनीति के माध्यम से इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाया। 15 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया, इसको संत समाज और राम भक्तों द्वारा अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। आइए उनके जीवन, योगदान और संघर्षों पर विस्तार से जानते हैं।
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के जानकार थे वेदांती
रामविलास वेदांती का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रतापगढ़ से प्राप्त की और बाद में संस्कृत, वेदांत और धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। वे एक कुशल वक्ता और विद्वान थे, जो रामायण, महाभारत और पुराणों के विशेषज्ञ माने जाते थे। युवावस्था में ही वे संत परंपरा से जुड़ गए और राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय हो गए। उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य के रूप में कार्य किया और विभिन्न धार्मिक सभाओं में राम मंदिर के महत्व पर प्रवचन दिए। उनके प्रवचनों में राम की मर्यादा, हिंदू एकता और धार्मिक सद्भाव की बातें प्रमुख होती थीं।
राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई मुख्य भूमिका
रामविलास वेदांती राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी चेहरों में से एक थे। उन्होंने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में वे आरोपी भी थे, लेकिन 2020 में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत में अपने बयान में वेदांती ने कहा था कि उन्होंने किसी मस्जिद को नहीं तोड़ा, बल्कि एक खंडहर को साफ किया था। वे हमेशा कहते थे कि राम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की आस्था और न्याय का प्रतीक है।
संसद तक राम मंदिर को लेकर बुलंद की आवाज
वे अयोध्या से सांसद रहते हुए संसद से लेकर सड़कों तक राम मंदिर की आवाज बुलंद करते रहे। 1991 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे जेल भी गए थे। उन्होंने राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य के रूप में कार्य किया और विभिन्न धार्मिक सभाओं में राम मंदिर के महत्व बताया। उनके प्रयासों से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला। वेदांती का मानना था कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक भवन नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा था कि 'मंदिर वहीं बनेगा, क्योंकि वहां राम का जन्म हुआ है'।
प्रतापगढ़ से बने लोकसभा सांसद
रामविलास वेदांती राजनीति में भी सक्रिय रहे। वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े और साल 1996 में मछली नगर और उसके बाद 1998 में अयोध्या (फैजाबाद) से जीतकर संसद पहुंचे। वेदांती ने प्रतापगढ़ जिले में भाजपा का कमल खिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। वे राजा-रजवाड़ों की इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति में पहली बार कमल खिलाने वाले नेता थे।
संसद में उन्होंने राम मंदिर, हिंदू धर्म और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया। वे अयोध्या से पूर्व सांसद रहते हुए राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य भी थे। उनके राजनीतिक जीवन का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर निर्माण था और उन्होंने इसके लिए सड़कों से लेकर संसद तक संघर्ष किया। वेदांती का राजनीतिक योगदान राम मंदिर आंदोलन को राजनीतिक मंच प्रदान करने में था।
राम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की पहचान
वेदांती ने सामाजिक क्षेत्र में भी काम किया। वे राम जन्मभूमि न्यास के अलावा विभिन्न धार्मिक संगठनों से जुड़े थे। उन्होंने हिंदू समाज में एकता की अपील की और राम मंदिर को सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया। वे कहते थे कि राम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की पहचान है। उनके प्रवचनों में राम की मर्यादा, हिंदू एकता और धार्मिक सद्भाव की बातें प्रमुख होती थीं। उन्होंने कहा था कि 1,111 फुट ऊंचा राम मंदिर बनाया जाना चाहिए, जो इस्लामाबाद, कोलंबो और काठमांडू से भी दिखाई दे।
रीवा के अस्पताल में ली अंतिम सांस
15 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। निधन की खबर से अयोध्या, संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक व्याप्त है। उनका पार्थिव शरीर को अयोध्या लाया जाएगा, जहां अंतिम दर्शन और जलसमाधि दी जाएगी।