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Wheat Prices: गेहूं के दामों में रिकॉर्ड उछाल, 3100 के पार पहुंचे भाव, जानें तेजी के बड़े कारण

Wheat Prices: सरकारी बिक्री (OMSS) के बावजूद दिल्ली में गेहूं के दाम रिकॉर्ड 3100 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए। मजबूत घरेलू मांग, त्योहारी सीजन और खुले बाजार में कम सप्लाई इसके मुख्य कारण हैं।

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गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी

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Wheat Prices : देश में गेहूं की कीमतों में लगातार आ रही तेजी रुकने का नाम नहीं ले रही है। दिल्ली के थोक बाजार में गेहूं का भाव उछलकर 3,100 रुपये से 3150 रुपये प्रति क्विंटल के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया है, जो इस सीजन का सबसे ऊंचा स्तर है। हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की दूसरी बिक्री निविदा जारी किए जाने के बाद भी बाजार में नरमी नहीं आई है। जब सरकार ने ओएमएसएस निविदा का ऐलान किया था, तब गेहूं का भाव 2,970 रुपये प्रति क्विंटल था। लेकिन उसके बाद से अब तक इसमें 130 रुपये प्रति क्विंटल (करीब 4.4%) की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है।

मांग मजबूत, लेकिन खुले बाजार में सीमित हुई सप्लाई

कृषि बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकारी निविदा के बावजूद कीमतों का बढ़ना इस बात का संकेत है कि देश में गेहूं की मांग काफी मजबूत है, जबकि उसके मुकाबले सप्लाई सीमित बनी हुई है।अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक 'आइग्रेन इंडिया' के निदेशक राहुल चौहान ने बताया कि सरकार की ओर से खुला बाजार बिक्री योजना (OMSS) में थोड़ी देरी होने की वजह से निजी व्यापारियों और स्टॉकिस्टों के पास मौजूद गेहूं का स्टॉक धीरे-धीरे कम हो गया। बीते सीजन में सरकार ने खुद भारी मात्रा में गेहूं की खरीदारी की थी, जिसकी वजह से इस समय खुले बाजार में निजी कारोबारियों के पास माल की उपलब्धता घट गई है।

क्यों नहीं थम रही गेहूं के दामों में तेजी? जानें मुख्य वजहें

गेहूं की कीमतों में आए इस तेज उछाल के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं:-

  • त्योहारी सीजन में मांग का दबाव:- दशहरा से दिवाली तक के त्योहारी सीजन में आटा, मैदा और सूजी की खपत काफी बढ़ जाती है। घरेलू बाजार में गेहूं की मांग इस समय अपने चरम पर है।
  • OMSS पर बढ़ती निर्भरता:- नवंबर और दिसंबर के महीनों में पूरा आटा-मैदा उद्योग और थोक बाजार पूरी तरह से सरकार की ओएमएसएस (OMSS) सप्लाई पर ही निर्भर रहने वाला है।
  • बांग्लादेश से मांग:- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काला सागर क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि भारतीय गेहूं का दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से ज्यादा है, फिर भी बांग्लादेश भारत से लगातार गेहूं खरीद रहा है।
  • एमएसपी में बढ़ोतरी का असर:- सरकार द्वारा हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की जाने वाली वृद्धि (इस बार 5% की बढ़ोतरी) से भी घरेलू बाजार में गेहूं के आधार मूल्य में तेजी आई है।

केंद्रीय पूल में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

एक तरफ जहां खुले बाजार में कीमतें रिकॉर्ड बना रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार का गेहूं का भंडार पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है। केंद्रीय पूल में वर्तमान में करीब 460 लाख टन गेहूं उपलब्ध है। यह स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि (अक्तूबर में 333 लाख टन) के मुकाबले काफी ज्यादा है। पिछले 3 से 4 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो देश के सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक लगातार बढ़ा है और यह काफी आरामदायक स्तर पर बना हुआ है।

आगे क्या हैं संभावनाएं?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन बाधित होने के कारण वहां भी गेहूं के दाम ऊंचे बने हुए हैं। भारत में एमएसपी बढ़ने से भले ही भारतीय गेहूं वैश्विक प्रतिस्पर्धा से थोड़ा बाहर हुआ हो, लेकिन पड़ोसी देशों की मांग और घरेलू त्योहारों के कारण बाजार में गरमाहट बनी हुई है। आने वाले दिनों में जब सरकार ओएमएसएस के जरिए बाजार में अधिक मात्रा में गेहूं उतारेगी, तभी कीमतों में स्थिरता या नरमी की उम्मीद की जा सकती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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