Phoolera Dooj: राधा रानी की पूजा से प्रेम संबंधों के सभी मनमुटाव होते हैं दूर, जानिए फुलेरा दूज का महत्व

फुलेरा दूज का पर्व वसंत ऋतु और फाल्गुन मास के बीच मनाया जाता है। यह साल का दोषमुक्त दिन होता है, इस दिन का हर क्षण शुभ होता है इसलिए इस दिन को अबूझ मुहुर्त भी कहा जाता है।

Phoolera Dooj
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मुख्य बातें

  • मथुरा वृंदावन में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है फुलेरा दूज का पावन पर्व।
  • वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और प्रेम संबंधों को अच्छा बनाने के लिए की जाती है भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की अराधना।
  • यह साल का दोषमुक्त दिन होता है, इस दिन बिना पंचांग देखे किया जा सकता है शुभ कार्य

नई दिल्ली. फुलेरा दूज वैसे तो पूरे भारत में मनाया जाता है लेकिन यह उत्तरी भारत का प्रमुख त्योहार है जिसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है। इस पावन पर्व को मथुरा व वृंदावन में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। 

इस दिन भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों में भजन औऱ कीर्तन के माध्यम से श्री कृष्ण की लीलाओं का गान किया जाता है। यह साल का दोषमुक्त दिन होता है, इस दिन का हर क्षण शुभ होता है इसलिए इस दिन को अबूझ मुहुर्त भी कहा जाता है। 

इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने से पहले पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती। वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए यह दिन विशेष होता है। इस दिन विधि विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अराधना करने से प्रेम संबंधों में आ रहे मनमोटाव दूर होते हैं। सुखमय वैवाहिक जीवन का वरदान प्राप्त होता है।

फुलेरा दूज का महत्व
फुलेरा दूज का पर्व मुख्यत: वसंत ऋतु से जुड़ा पर्व है। यह वसंत ऋतु औऱ फाल्गुन मास के बीच मनाया जाता है। यह साल का दोषमुक्त दिन होता है, इस दिन का हर क्षण शुभ होता है इसलिए इस दिन को अबूझ मुहुर्त भी कहा जाता है। 

इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने से पहले शुभ मुहुर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। वैवाहिक जीवन को खुशमय बनाने के लिए और प्रेम संबंधों को अच्छा बनाने के लिए यह पर्व मनाया जाता है। 

जिनकी कुंण्डली में प्रेम का अभाव हो उन्हें विशेष रूप से इस दिन भगवान श्री कृष्ण औऱ राधा रानी की पूजा करनी चाहिए। ऐसें में आइए जानते हैं फुलेरा दूज पर कैसे करें श्याम सुंदर औऱ राधा रानी की अराधना।

फुलेरा दूज पर पूजा विधि
इस पावन पर्व के अवसर पर शाम के समय स्नान कर पूर्ण श्रंगार करें। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को सुगंधित फूलों से सजाएं औऱ अबीर गुलाल अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के लिए सफेद मिठाई, पंचामृत और मिश्री का प्रसाद तैयार करें राधा-कृष्णा को अर्पित करें। 

मधुराष्टक या राधा कृपा कटाक्ष का पाठ करें। अगर यह पढ़ने में आपको कठिन लगता हो तो आप राधेकृष्णा मंत्रों का जाप कर सकते हैं। तथा श्रंगार के वस्तुओं का दान करें औऱ इसके बाद प्रसाद ग्रहंण कर आप पूजा संपन्न कर सकते हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
जब आप फुलेरा दूज का पर्व मनाते हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें। आपको बता दें फुलेरा दूज में पूजा का सही समय संध्याकाल का होता है, जब भी आप पूजा करें तो साफ औऱ रंगीन वस्त्र धारण करें।

अगर आप प्रेम के लिए पूजा करते हैं तो पूजा के दौरान गुलाबी वस्त्र धारण करें। तथा यदि आप सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए पूजा करते हैं तो पीले वस्त्र धारण करें। 

पूजा के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस दौरान जो भोजन बनेगा उसका भोग भगवान को लगाया जाएगा। इस भोजन को बनाते वक्त लहसन प्याज का प्रयोग भूलकर भी ना करें।
 

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