Somvar Vrat Katha, Puja Vidhi: सोमवार को करें शिव पार्वती की उपासना, जानें व्रत कथा, पूजा विधि, आरती और महत्व

Somvar Vrat Katha, Puja Vidhi, Aarti in Hindi (सोमवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती): सनातन धर्म के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित। इस दिन व्रत करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी करते हैं। 

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सोमवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती (Pic: iStock) 
मुख्य बातें
  • सोमवार का दिन भगवान शिव को है समर्पित।
  • सोमवार के दिन की जाती है शिव-पार्वती की पूजा।
  • कथा का पाठ करने से मिलता है व्रत का पूर्ण फल।

Somvar Vrat Katha, Puja Vidhi, Aarti in Hindi (सोमवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती): सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत तरीके से पूजा की जाती है। त्रिदेवों में से एक महादेव भक्तों के प्रति काफी दयालु हैं इसीलिए उन्हें प्रसन्न करना काफी आसान माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। भगवान शिव के आशीर्वाद से भक्तों को किसी भी प्रकार का भय नहीं होता है तथा वह हर मुश्किल से मुक्त होते हैं। शिव जी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है। कुंवारी लड़कियों के लिए भी सोमवार का व्रत रखना लाभदायक माना गया है। अगर आप सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो यहां जानें पूजा विधि, आरती, महत्व और कथा।

Somvar Vrat Puja Vidhi (सोमवार व्रत पूजा विधि) 

नारद पुराण के अनुसार, सोमवार के दिन शिव भक्तों को प्रातः काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव और पार्वती को स्मरण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत का संकल्प लेने के बाद शिवजी को जल और बेलपत्र चढ़ाएं और भगवान शिव के साथ संपूर्ण शिव परिवार की पूजा करें। पूजा करने के बाद कथा सुनें और आरती करने के बाद घर के सदस्यों में प्रसाद बांटें। 

Somvar Vrat Puja Aarti (सोमवार व्रत पूजा आरती) 

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा  
         ॥ॐ जय शिव..॥
  एकानन चतुरानन पंचानन राजे
  हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे
         ॥ॐ जय शिव..॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे
         ॥ ॐ जय शिव..॥

 अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
  चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी
         ॥ ॐ जय शिव..॥

  श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
  सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे
         ॥ ॐ जय शिव..॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता
         ॥ ॐ जय शिव..॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका
         ॥ ॐ जय शिव..॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी
         ॥ ॐ जय शिव..॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे
        ॥ ॐ जय शिव..॥

Somvar Vrat Importance (सोमवार व्रत महत्व)

हिंदू वेद और पुराणों के अनुसार, सोमवार के दिन जो भक्त शिव शंभू की पूजा करता है वह हर प्रकार की समस्याओं से दूर रहता है। शिवजी की उपासना करने से घर में माता लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। आर्थिक समस्याओं से भी शिव के भक्तों को छुटकारा मिलता है। 

Somvar Vrat Katha (सोमवार व्रत कथा) 

एक शहर में एक साहूकार रहता था जिसे किसी चीज की कमी नहीं थी। हर तरह से परिपूर्ण होने के बाद भी वह हमेशा परेशान रहा करता था। ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए वह सोमवार का व्रत रखता था और शिव मंदिर जाकर शिव-पार्वती की पूजा करता था। साहूकार की भक्ति देखकर मां पार्वती खुश हो गईं और उन्होंने भगवान शिव से साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने पार्वती माता को यह समझाया कि हर किसी को उसके कर्मों का फल मिलता है जो उसे भोगना ही पड़ता है। भगवान शिव के समझाने पर पार्वती मां नहीं मानी और उन्होंने वापस भगवान शिव से साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। 

शिव जी ने दिया पुत्र का वरदान

पार्वती मां की वजह से भगवान शिव ने साहूकार को पुत्र का वरदान दिया लेकिन उस पुत्र की उम्र सिर्फ 12 वर्ष ही रखी। पुत्र पाकर भी साहूकार खुश नहीं था लेकिन उसने शिव जी की भक्ति करना नहीं छोड़ा। कुछ समय के बाद साहूकार का बेटा हुआ। जब साहूकार का बेटा 11 वर्ष का हो गया था तब उसे पढ़ाई के लिए काशी भेज दिया गया था। साहूकार ने अपने बेटे के साथ उसके मामा को भी ढेर सारा धन देकर भेज दिया था। साहूकार ने कहा था कि रास्ते में ब्राह्मणों को भोजन करवाना और यज्ञ करवाना। साहूकार की बात मानकर मामा और भांजे काशी की ओर चल पड़े। रास्ते में उन्हें जो भी ब्राह्मण मिलता वह उसे भोजन करवाते और दक्षिणा देते

साहूकार के बेटे का हो गया विवाह 

रास्ते में मामा और भांजे को एक राज्य मिला जहां के राजा की बेटी की शादी हो रही थी। राजा की बेटी की शादी जिस राजकुमार के साथ हो रही थी वह काना था और यह बात राजा को नहीं पता थी। मामा और भांजे को राजकुमार का पिता मिला जो उन्हें अपने साथ ले गया। साहूकार के बेटे को देखकर उसने एक चाल चली और अपने बेटे की जगह साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर विवाह करने के लिए भेज दिया। साहूकार का बेटा बहुत इमानदार था और उसने राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर लिख दिया कि उसकी शादी साहूकार के पुत्र के साथ हुई है लेकिन उसको जिस राजकुमार के साथ भेजा जाएगा वह काना है। 

बिगड़ गया साहूकार के बेटे का स्वास्थ्य

राजकुमारी ने यह बात जाकर अपने माता-पिता को बता दी। राजा ने अपनी बेटी को विदा नहीं किया जिस वजह से बारात को वापस जाना पड़ा। यह सब होने के बाद साहूकार का बेटा और उसका मामा काशी की ओर निकल गए। काशी पहुंच कर उन्होंने यज्ञ करवाया। जिस दिन साहूकार के बेटे की उम्र 12 साल हुई उस दिन यज्ञ रखा गया था। यज्ञ के दौरान साहूकार के बेटे ने अपने मामा से कहा कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है इसीलिए वह अंदर जाकर सोने लगा। 

निकल गया साहूकार के बेटे का प्राण

शिवजी के वरदान अनुसार, जब साहूकार का बेटा आराम कर रहा था तब उसके प्राण निकल गए। जब मामा को पता चला कि उसके भांजे की मृत्यु हो गई है तो वह रोने लगा। उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहीं मौजूद थे। रोने की आवाज सुनकर माता पार्वती ने कहा कि उनसे यह आवाज सहन नहीं हो रही है। उन्होंने शिव जी से प्रार्थना की कि वह व्यक्ति के दुख दूर कर दें। जब भगवान शिव उस व्यक्ति के पास पहुंचे तब उन्होंने मृत बच्चे को देखकर पहचान लिया कि यह साहूकार का बेटा है। उन्होंने कहा कि अब साहूकार का बेटा 12 वर्ष का हो गया है इसी के लिए इसके प्राण निकल गए हैं।

पुनर्जीवित हो गया साहूकार का बेटा

महादेव की बात सुनकर पार्वती माता ने उनसे कहा कि वह इस बालक को पुनर्जीवित कर दें नहीं तो इसके माता-पिता इस दर्द को सहन नहीं कर पाएंगे। पार्वती माता की बात मानकर भगवान जी ने साहूकार के बेटे को पुनर्जीवित कर दिया। जब मामा और भांजा वापस अपने शहर की ओर जा रहे थे तब उन्हें वह राजा मिला जिसकी बेटी की शादी साहूकार के बेटे से हो गई थी। वह राजा साहूकार के बेटे से बहुत प्रसन्न था इसीलिए उसने साहूकार के बेटे के साथ अपनी बेटी को विदा कर दिया। 

साहूकार हो गया आश्चर्यचकित

साहूकार का बेटा अपनी नई नवेली दुल्हन को अपने साथ लेकर आ रहा था। दूसरी ओर साहूकार और उसकी पत्नी अपने बेटे की राह देख रहे थे। साहूकार और उसकी पत्नी ने यह सोच लिया था कि अगर उनका बेटा वापस नहीं आएगा तब वह अपने प्राण त्याग देंगे। लेकिन जब उन्होंने अपने बेटे को देखा तब वह बहुत खुश हुए। रात में साहूकार के सपने में भगवान शिव आए और भगवान शिव ने उस व्यापारी से कहा कि वह उसके सोमवार के व्रत से बहुत खुश हैं इसीलिए उन्होंने उसके बेटे को लंबी आयु प्रदान की है। 


 

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