Vaishakh Purnima 2026 kab Hai: वैशाख पूर्णिमा आज, जानें आज का स्नान और दान शुभ मुहूर्त और कब दिखेगा पूर्णिमा का चांद
Vaishakh Purnima 2026 Kab Hai, बैशाख पूर्णिमा कब है, स्नान, दान का शुभ समय, पूजा का मुहूर्त, चंद्र दर्शन: वैशाख माह का अंतिम दिन पूर्णिमा बेहद ही खास मानी जाती है। इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा का भी पर्व मनाया जाता है। आज ही वैशाख पूर्णिमा है। आइए जानते हैं कि आज किस समय पर क्या करना शुभ होगा?
Vaishakh Purnima 2026 kab Hai: वैशाख पूर्णिमा आज, जानें आज का स्नान और दान शुभ मुहूर्त और कब दिखेगा पूर्णिमा का चांद
आज का पंचांग 1 मई 2026-
इस दिन ही मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा
वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बुद्ध पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन को त्रिविध पावन अवसर भी कहा जाता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। वर्षों का साधना के बाद बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसी दिन वे सिद्धार्थ से बुद्ध बने थे। बुद्ध ने अपना पार्थिव शरीर भी इसी दिन ही त्यागा था। यह मोक्ष का प्रतीक है।
आज ही है वैशाख पूर्णिमा
आज 1 मई को ही वैशाख पूर्णिमा है। आज के दिन पूजा-पाठ दान आदि का समय क्या है, आइए जानते हैं।
क्या वैशाख पूर्णिमा पर स्नान करना चाहिए
वैशाख पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए?
वैशाख पूर्णिमा जैसी पावन तिथि पर जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर आप किसी गरीब व्यक्ति को छाता दान कर सकते हैं। इसके अलावा जल से भरा कलश (घड़ा), पंखा, सत्तू, अन्न, गुड़, वस्त्र, सफेद तिल, मौसमी फल (तरबूज, खरबूजा) और चप्पल-जूते दान करने चाहिए।
वैशाख पूर्णिमा की व्रत विधि
वैशाख पूर्णिमा (1 मई 2026) का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु की सत्यनारायण रूप में पूजा की जाती है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
वैशाख पूर्णिमा चंद्र गहण है क्या
आज वैशाख पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण नहीं है। इसलिए किसी भी प्रकार का सूतक काल लागू नहीं होता है। आप बिना किसी चिंता के पूजा, व्रत, स्नान-दान और चंद्र दर्शन कर सकते हैं। यह दिन धार्मिक कार्यों के लिए पूरी तरह शुभ और फलदायी माना जाता है।
आज वैशाख पूर्णिमा का चांद कब निकलेगा
वैशाख पूर्णिमा व्रत से कौन-कौन से पाप कटते हैं?
- अनजाने पापों से मुक्ति: विधि-विधान से पूजा और दान करने से झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या अनजाने में हुए गलत कार्यों के दोष खत्म हो जाते हैं।
- नकारात्मकता का अंत: यह व्रत ‘पाप विमोचनी’ (पापों से मुक्त करने वाली) तिथि के समान फल देता है। यह हमारे अंदर से नकारात्मकता को मिटाकर कोमलता लाता है।
- दरिद्रता से छुटकारा: मानसिक अशांति और गरीबी जैसे दोषों को दूर करने के लिए यह व्रत एक रामबाण उपाय माना जाता है।
वैशाख पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बुद्ध ने सत्य की खोज करते हुए इसी पावन दिन पर ज्ञान (निर्वाण) प्राप्त किया था।
- भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने इसी दिन व्रत रखा था। इसके प्रभाव से उन्हें राजसूय यज्ञ के बराबर महान पुण्य की प्राप्ति हुई थी।
- शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन गंगा स्नान करने और दान देने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र (बंधन) से मुक्ति मिल जाती है।
- इस शुभ तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने और रात में चंद्र देव को अर्घ्य (जल) देने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
वैशाख पूर्णिमा पर क्या खरीदना चाहिए?
- भगवान बुद्ध की प्रतिमा
- पीतल का हाथी
- लघु नारियल
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति
- सुहाग का सामान
- गुलाब का फूल
- कौड़ी
वैशाख पूर्णिमा के उपाय
- गंगाजल से स्नान- कहा जाता है कि इस दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करने का प्रयास करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
- सत्यनारायण भगवान की कथा- इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा कराना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख और समृद्धि आती है।
- दान का महत्व- वैशाख पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व है। इस दिन सफेद तिल, पानी, चीनी, पंखा, सत्तू, जल और कपड़ों का दान करना लाभकारी होता है।
- पीपल की पूजा- पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना फलदायी माना जाता है। इससे देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- चंद्रमा को अर्घ्य- पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने से जीवन में सुख और शांति आती है।
वैशाख पूर्णिमा की आरती
ॐ जय जगदीश हरे...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे...
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे...
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
वैशाख पूर्णिमा व्रत कथा
साधु ने स्पष्ट कहा कि निःसंतान घर से भिक्षा लेना अशुभ माना जाता है, इसलिए वह उनके घर नहीं जाता। यह सुनकर धनेश्वर व्यथित हो गया और उसने साधु से संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। तब साधु ने उन्हें सोलह दिनों तक मां चंडी की विधिपूर्वक पूजा करने का उपदेश दिया। दंपत्ति ने श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां काली प्रकट हुईं और सुशीला को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्होंने पूर्णिमा के व्रत की विधि भी बताते हुए कहा कि हर पूर्णिमा को दीपक जलाना और प्रत्येक बार दीपकों की संख्या बढ़ाते जाना, जब तक उनकी संख्या 32 न हो जाए। दंपत्ति ने इस नियम का पालन किया और कुछ समय बाद सुशीला ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम देवदास रखा गया।
जब देवदास बड़ा हुआ, तो उसे शिक्षा के लिए काशी भेजा गया। वहां उसके साथ एक विचित्र घटना घटी और उसका विवाह धोखे से करा दिया गया, जबकि वह स्वयं को अल्पायु बता रहा था। कुछ समय बाद जब उसके प्राण लेने का समय आया, तो मृत्यु भी उसे छू न सकी। अंततः यमराज ने इस रहस्य को जानने का प्रयास किया।
तब यह ज्ञात हुआ कि देवदास के माता-पिता द्वारा पूर्णिमा का व्रत और मां काली की आराधना के प्रभाव से उसे दिव्य संरक्षण प्राप्त था। इस प्रकार वैशाख पूर्णिमा का व्रत संतान सुख और दीर्घायु का वर देने वाला माना जाता है।
वैशाख पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?
वैशाख पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
वैशाख पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त 2026
वैशाख पूर्णिमा के मंत्र
वैशाख पूर्णिमा दान लिस्ट
वैशाख पूर्णिमा पर दही, चावल, मूली, चीनी सफेद चीजों के साथ ही पानी से भरा घड़ा, फल, पंखा, छाता और वस्त्र का दान करना चाहिए।
क्या वैशाख पूर्णिमा पर व्रत रखना जरूरी होता है?
व्रत करना जरूरी तो नहीं होता, लेकिन धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने और दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ता है।
वैशाख पूर्णिमा पर कितने बजे होगा चंद्रोदय
वैशाख पूर्णिमा किस दिन है
1 मई 2026, शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा मनाई जा रही है।
