अध्यात्म

15 या 16 दिसंबर, कब है सफला एकादशी, जानिए दिसंबर 2025 की दूसरी एकादशी की सही तिथि और पूजा मुहूर्त

Safala Ekadashi 2025 : पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। साल 2025 में यह दिसंबर माह की दूसरी एकादशी होगी। मान्यता है कि इस एकादशी के व्रत को करने से जीवन में सफलताएं मिलने लगती हैं। इसके साथ ही हर प्रकार की परेशानियों का अंत हो जाता है।

सफला एकादशी 2025 कब है

सफला एकादशी 2025 कब है

Safala Ekadashi 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। यह दिसंबर 2025 की दूसरी एकादशी होगी, जो सफलता, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पाप नाश होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

कब है सफला एकादशी 2025?

पौष कृष्ण एकादशी तिथि का आरंभ 14 दिसंबर 2025, रविवार शाम 6:50 बजे से होगा और समापन 15 दिसंबर 2025, सोमवार रात 9:21 बजे होगा। उदय तिथि के नियम के अनुसार सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को ही रखा जाएगा। इस दिन सुबह से शाम तक विधि-विधान से पूजा करें और व्रत का पारण अगले दिन 16 दिसंबर को द्वादशी तिथि में करें।

सफला एकादशी के दिन पूजा के शुभ मुहूर्त

इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जो पूजा और व्रत संकल्प के लिए अच्छे माने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:17 से 06:12 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 05:44 से 07:06 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:56 से दोपहर 12:37 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 से 02:41 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:24 से 05:51 बजे तक

सायाह्न संध्या: शाम 05:26 से 06:48 बजे तक

इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

सफला एकादशी का महत्व

शास्त्रों में सफला एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान दिया गया है। इस व्रत से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। जैसा नाम से ही स्पष्ट है कि यह ‘सफल’ बनाने वाली एकादशी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से 5000 वर्ष की तपस्या का फल मिलता है। भगवान विष्णु की कृपा से पाप नष्ट होते हैं, संतान सुख मिलता है और मोक्ष प्राप्ति का द्वार खुलता है।

पूजा की सरल विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र की चौकी बिछाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। गंगाजल छिड़कें, घी का दीपक जलाएं, तुलसी दल, फूल-माला अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, कनक स्तोत्र और सफला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। भोग में दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। शाम को भी आरती करें और तुलसी पूजन करें। जरूरतमंदों को दान दें।

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

End of Article