अभी रमजान का पाक महीना इन दिनों चल रहा है। आज यानी 10 मार्च 2026 से रमजान का तीसरा अशरा भी शुरू हो गया है। इस आखिरी अशरे को जहन्नुम से मुक्ति का समय माना जाता है। इस दौरान मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से माफी मांगते हैं। रमजान में रोजेदार पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के बाद सूर्यास्त के समय इफ्तार करते हैं और दुनिया भर में एक परंपरा लगभग हर जगह देखने को मिलती है कि रोजा सबसे पहले खजूर खाकर ही खोला जाता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर रोजा खजूर से ही क्यों खोला जाता है और पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किस तरह से इफ्तार करते थे।
पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत है खजूर से इफ्तार करना
इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा खजूर से खोलना पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत माना जाता है। हदीस की किताब सुनन अबू दाऊद में बताया गया है कि पैगंबर इफ्तार के समय पहले ताजे खजूर खाते थे। अगर ताजे खजूर उपलब्ध न होते तो सूखे खजूर से रोजा खोलते थे। अगर खजूर भी न मिले तो पानी से रोजा खोलना भी सही बताया गया है। इसी वजह से मुसलमानों के बीच इफ्तार की शुरुआत खजूर से करना एक अहम परंपरा बन गई है।
पैगंबर को कौन सा खजूर पसंद था
हदीसों में यह भी जिक्र मिलता है कि पैगंबर को अजवा खजूर बहुत पसंद थे। यह खजूर खास तौर पर सऊदी अरब के मदीना शहर में उगता है और इसे बहुत खास माना जाता है। सहीह बुखारी की एक हदीस में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति सुबह के समय सात अजवा खजूर खा ले, तो उस दिन उसे जहर और जादू से नुकसान नहीं होता। इसी कारण अजवा खजूर को इस्लामिक परंपरा में खास महत्व दिया जाता है।
अल्लाह की नेमत है खजूर
कुरान शरीफ में खजूर को अल्लाह की दी हुई नेमत बताया गया है। कई आयतों में खजूर के पेड़ और उसके फलों का जिक्र मिलता है। उदाहरण के तौर पर सूरह मरयम (19:25) में कहा गया है कि ‘खजूर के पेड़ के तने को अपनी ओर हिलाओ, उससे तुम पर ताजे पके खजूर गिरेंगे।’
इसी तरह सूरह रहमान (55:11) में भी बताया गया है कि धरती पर फलों के साथ गुच्छों वाले खजूर के पेड़ भी अल्लाह की बनाई हुई नेमतों में शामिल हैं। इन आयतों से यह समझा जाता है कि खजूर को इस्लाम में एक अहम और बरकत वाला फल माना गया है।
खजूर से रोजा खोलने के पीछे स्वास्थ्य से भी जुड़ा है कारण
धार्मिक मान्यता के साथ-साथ खजूर से रोजा खोलने के पीछे स्वास्थ्य से जुड़ा कारण भी बताया जाता है। पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के बाद शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है। खजूर में प्राकृतिक शक्कर जैसे ग्लूकोज और फ्रुक्टोज होते हैं, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा देने में मदद करते हैं।
इसके अलावा खजूर में फाइबर, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। यही कारण है कि खजूर खाने से शरीर को तुरंत ताकत मिलती है और पाचन प्रक्रिया भी धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है। इस तरह देखा जाए तो खजूर से रोजा खोलने की परंपरा सिर्फ धार्मिक आस्था से नहीं जुड़ी है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े कारण भी बताए जाते हैं। यही वजह है कि पैगंबर की सुन्नत को मानते हुए आज भी दुनिया भर में मुसलमान इफ्तार की शुरुआत खजूर से ही करते हैं।
