अध्यात्म

Nag Panchami 2025: नाग पंचमी पर सांप को दूध क्यों चढ़ाया जाता है? शास्त्र से जानें पूरा सच

Nag Panchami 2025: सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता को दूध और लाई चढ़ाने की परंपरा है। लेकिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी मनाई जाती है। नाग देवता को ये दूध क्यों चढ़ता है और इसके पीछे की कहानी क्या है, ये आप यहां से जान सकते हैं।

Image

सांप को दूध क्यों चढ़ाया जाता है? (Photo Source: Times Now Navbharat)

Nag Panchami 2025: साल 2025 में 9 अगस्त को नाग पंचमी का त्योहार है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा अर्चना करना, उन्हें दूध चढ़ाने की परंपरा बीते कई दशकों से चली आ रही हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से व्यक्ति को सर्पदंश और कुंडली में स्थित कालसर्प दोष से छुटकारा मिल जाता है। लेकिन जब बात नाग देवता को दूध चढ़ाने की आती है तब हर किसी के मन में ये सवाल आता है कि सांप को दूध क्यों चढ़ता है। यहां हम आपके इस सवाल का जवाब देंगे।

नाग को दूध पिलाने के पीछे है यह वजह

नागपंचमी के दिन नाग देवता को विशेष रूप से दूध अर्पित करने के पीछे पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। जिसके अनुसार, अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाम के सांप द्वारा काटने के कारण हुई थी। जिसके बाद उनके पुत्र जन्मेजय ने पृथ्वी से सभी सांपों को समाप्त करने के लिए एक यज्ञ किया, जिसके प्रभाव दुनिया भर के सभी सांप उस यज्ञ कुंड की अग्नि में आकर गिरने लगे। ऐसे में घबराकर तक्षक नाग इंद्र देवता के सिंहासन में जाकर छिप गया। इसके बाद यज्ञ के प्रभाव से इंद्र देव का सिंहासन तक्षक नाग के साथ हवनकुंड की ओर खिंचने लगा। ऐसा होता देख देवताओं और ऋषि-मुनियों ने जन्मेजय से यज्ञ को रोकने को कहा। देवताओं का तर्क था कि इस यज्ञ के कारण सभी सर्प समाप्त हो गए तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा। इसके बाद राजा जन्मेजय ने तक्षक नाग को माफ करते हुए यज्ञ समाप्त कर दिया। मान्यता है कि यज्ञ के खत्म होने के बाद जले हुए सर्पों की जलन को दूर करने के लिए उन्हें दूध से स्नान कराया गया। यह दिन नागपंचमी का ही दिन था। जिसके बाद नाग देवता को दूध से स्नान की परंपरा चली आ रही है।

नाग देवता को दूध चढ़ाने के लाभ

ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की जन्म कुंडली में काल सर्प दोष होता है, उन्हें नाग देवता की पूजा करने और दूध अर्पित करने से राहत मिलती है। इससे जीवन में आ रही बाधाएं, आर्थिक संकट और मानसिक परेशानियों में कमी आती है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से नि:संतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। और शास्त्रों में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति नागों को सताता है या मारा है, उसे अगले जन्म में कष्ट होते हैं। दूध चढ़ाने से पूर्व जन्म के पाप शमित होते हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

और पढ़ें
End of Article