महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू, जानिए शिव पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती...सबकुछ
महाशिवरात्रि के पर्व में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान पूजा की जाती है। इस पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, इत्र, गंगाजल, पंचामृत, वस्त्र, कुमकुम समेत तमाम सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। यहां हम आपको बताएंगे महाशिवरात्रि की पूजा विधि और सामग्रि लिस्ट के बारे में हर एक जानकारी।
महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू, जानिए शिव पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती...सबकुछ
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महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (Maha Shivratri Puja Ka Shubh Muhurat 2025)
महाशिवरात्रि पूजा के लिए निशीथ काल मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। ये मुहूर्त इस साल 26 फरवरी की देर रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
Maha Shivratri Fasting Time 2025
महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त 2025 (Maha Shivratri Chaar Prahar Puja Muhurat 2025)
महाशिवरात्रि के दिन रात्रि के चारों पहरों की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। ये मुहूर्त इस प्रकार है...
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय- 06:19 PM से 09:26 PM
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय- 26 फरवरी को 09:26 PM से 27 फरवरी को 12:34 AM तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी 2025 को 12:34 AM से 03:41 AM
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय- 27 फरवरी 2025 तो 03:41 AM से 06:48 AM
महाशिवरात्रि पूजन सामग्री (Mahashivratri Pujan Samagri)
धूप, दीप, अक्षत, सफेद, घी, बेल, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, गंगा जल, कपूर, मलयागिरी, चंदन, पंच मिष्ठान, शिव व मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री,पंच मेवा, शक्कर, शहद, आम्र मंजरी, जौ की बालियां, वस्त्राभूषण, चंदन, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दही, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, तुलसी दल, मौली जनेऊ, पंच रस, इत्र, गंध रोली, कुशासन आदि।
Maha Shivratri Shiv Bhajan|| महाशिवरात्रि पूजा विधि इन हिंदी (Maha Shivratri Puja Vidhi In Hindi)
महाशिवरात्रि के मंत्र (Maha Shivratri Mantra)
ॐ ऊर्ध्व भू फट् । ॐ नमः शिवाय । ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय ।
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा ।
ॐ इं क्षं मं औं अं । ॐ प्रौं ह्रीं ठः ।
ॐ नमो नीलकण्ठाय । ॐ पार्वतीपतये नमः । ॐ पशुपतये नम:।
Maha Shivratri Vrat Kaise Rakhe
महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा (Maha Shivratri Ki Katha)
शिवरात्रि को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से एक कथा अनुसार माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। जिसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है।
वहीं गरुड़ पुराण में इस दिन के महत्व को लेकर एक अन्य कथा बताई गई है, जिसके अनुसार इस दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया किन्तु उसे कोई शिकार नहीं मिल सका। जिसके बाद वह थककर भूख-प्यास से परेशान होकर एक तालाब के किनारे गया, जहां बिल्व वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग था जिसका उस शिकारी को नहीं पता था। अपने शरीर को आराम देने के लिए जब उसने कुछ बिल्व-पत्र तोड़े, तो वो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैरों को साफ़ करने के लिए उसने उनपर तालाब का जल छिड़का, तो उसकी कुछ बून्दें शिवलिंग पर भी जा गिरीं। ऐसा करते समय उसका एक तीर नीचे गिर गया जब उसने तीर उठाने की कोशिश की तो वह शिव लिंग के सामने झुक गया। इस तरह शिवरात्रि के दिन अनजाने में ही सही लेकिन उसने व्रत भी रख लिया और शिव-पूजन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आए, तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की।
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Maha Shivratri Fasting Rules: महाशिवरात्रि व्रत के नियम
- महाशिवरात्रि व्रत में अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र जरूर चढ़ाना चाहिए।
- फलाहारी भोजन करना चाहिए।
- सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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महाशिवरात्रि रुद्राभिषेक मुहूर्त 2025 (Maha Shivratri Rudrabhishek Time 2025)
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय- 26 फरवरी को 09:26 PM से 27 फरवरी को 12:34 AM तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी 2025 को 12:34 AM से 03:41 AM
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय- 27 फरवरी 2025 तो 03:41 AM से 06:48 AM
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महाशिवरात्रि व्रत से मिलने वाले लाभ (Mahashivratri Vrat Ke Fayde)
इस व्रत के प्रभाव से विवाहितों को सुख- सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, जो जातक अविवाहित होते हैं, उनकी जल्द ही शादी के योग बनते हैं। घर-परिवार में भी सुख-समृद्धि आती है और सदैव बरकत बनी रहती है।
Mahashivratri Vrat Vidhi: महाशिवरात्रि व्रत कैसे रखा जाता है?
महाशिवरात्रि व्रत में फलाहार ले सकते हैं। ये व्रत निर्जला नहीं रखा जाता। इस व्रत में कूट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, फल, दूध से बनी चीजों, जीरा, आलू, टमाटर, लौकी इत्यादि चीजों का सेवन किया जा सकता है। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के समय किया जाता है।
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मखाने की खीर: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को मखाने की खीर का प्रसाद के रूप में भोग लगाएं।
हलवा: महाशिवरात्रि पर शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए उन्हें सूजी या कुट्टू के आटे का हलवा बनाकर अर्पित करें।
मालपुआ: मालपुआ भी शिव शंकर को अत्यंत प्रिय है इसलिए महाशिवरात्रि पर मालपुआ में थोड़ी भांग मिलाकर शिव जी को प्रसाद के रूप में चढ़ाएं।
लस्सी: महाशिवरात्रि पर शिव जी को लस्सी का भोग लगाने से आपको महादेव का आशीर्वाद मिलता है।
