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Krishna pingala Sankashti Chaturthi 2026: इस व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है पूजन, पढ़ें कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

Krishna Pingala Sankashti Chaturthi 2026: आज यानी 3 जुलाई 2026 को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जा रहा है। सुयोग्य संतान की प्राप्ति के लिए किया जाने वाले व्रत गणेश भगवान को समर्पित है। आगें पढ़ें कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा...

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कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

Krishna Pingala Sankashti Chaturthi 2026: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश के कृष्ण पिंगल स्वरूप की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत के साथ यदि श्रद्धापूर्वक कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाए, तो भगवान गणेश (krishna pingala ganesh) शीघ्र प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति, विघ्नों के नाश और सुख-समृद्धि के लिए इस कथा का अत्यंत महत्व बताया गया है। पढ़ें कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा...

कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान गणेश से आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी के महत्व, कथा और पूजा-विधान के बारे में पूछा। तब गणेश जी ने बताया कि यही प्रश्न कभी राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से किया था। श्रीकृष्ण ने उन्हें कृष्ण पिंगल गणेश की महिमा सुनाई, जो आज संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा के रूप में प्रसिद्ध है।

कथा के अनुसार द्वापर युग में माहिष्मति नगरी के राजा महीजित अत्यंत धर्मात्मा, न्यायप्रिय और प्रजावत्सल थे। उनके पास अपार वैभव था, लेकिन संतान न होने का दुख उन्हें हमेशा परेशान करता था। अनेक यज्ञ, दान और तप करने के बाद भी उन्हें संतान सुख नहीं मिला। राजा की चिंता देखकर उनकी प्रजा और विद्वान ब्राह्मण महर्षि लोमश के आश्रम पहुंचे और समाधान पूछा। महर्षि ने बताया कि यदि राजा आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी के दिन भगवान कृष्ण पिंगल गणेश का विधिपूर्वक व्रत और पूजन करें तथा ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र का दान दें, तो उन्हें निश्चित रूप से संतान प्राप्त होगी।

महर्षि लोमश के निर्देशानुसार राजा महीजित और रानी सुदक्षिणा ने श्रद्धा और नियमपूर्वक कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया। भगवान गणेश की कृपा से कुछ समय बाद रानी को एक तेजस्वी, गुणवान और सुलक्षण पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार यह व्रत संतान सुख प्रदान करने वाला और सभी प्रकार के विघ्नों का नाश करने वाला माना गया।

धार्मिक ग्रंथों में केवल व्रत रखने की अपेक्षा व्रत कथा के श्रवण और पाठ को भी समान रूप से आवश्यक बताया गया है। मान्यता है कि कथा सुनने से व्यक्ति को व्रत का वास्तविक उद्देश्य, भगवान गणेश की महिमा और धर्म का संदेश समझ में आता है। साथ ही यह श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करता है, जिससे व्रत का पुण्यफल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है।

मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन कृष्ण पिंगल गणेश की कथा का पाठ या श्रवण करते हैं, उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है, संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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व्रत का महत्व

कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ व्रत रखने के अलावा व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विघ्नहर्ता गणेश भक्त के जीवन से संकट दूर कर सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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