Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: नवरात्रि की आरती हिंदी लिरिक्स, जानें आज कब करनी है माता रानी की आरती
Chandra Navratri 2026 Jai Ambe Gauri Maiy jai Shayam Gauri Aarti Lyrics, Likhit Mein Mata Rani Ki, चंद्र नवरात्रि 2026 जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती लिखित में लाइव अपडेट: नवरात्रि व्रत में पूजा के दौरान कई बार लोगों को समझ नहीं आता कि कौन-सी आरती करना सही रहेगा। ऐसे में यहां आपको 'जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी' आरती के बोल मिलेंगे और 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' के पूरे लिरिक्स भी, जिससे आप अपनी पूजा को पूरी श्रद्धा और सही तरीके से कर सकें।
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: नवरात्रि की आरती हिंदी लिरिक्स, जानें आज कब करनी है माता रानी की आरती
हालांकि, बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि पूजा के समय कौन-सी आरती पढ़नी चाहिए। ऐसे में यहां आप पढ़ सकते हैं 'जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी' की आरती और नोट कर सकते हैं 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' के पूरे लिरिक्स, ताकि आपकी पूजा पूरी श्रद्धा और सही विधि से संपन्न हो सके।
नवरात्रि में नहीं करने चाहिए ये काम
दूसरे दिन माता के किस स्वरूप का होगा पूजन
नवरात्रि पर करें मां विंध्येश्वरी चालीसा का पाठ
नमो नमो विन्ध्येश्वरी,
नमो नमो जगदम्ब।
सन्तजनों के काज में,
करती नहीं विलम्ब॥
जय जय जय विन्ध्याचल रानी।
आदिशक्ति जगविदित भवानी॥
सिंहवाहिनी जै जगमाता।
जै जै जै त्रिभुवन सुखदाता॥
कष्ट निवारण जै जगदेवी।
जै जै सन्त असुर सुर सेवी॥
महिमा अमित अपार तुम्हारी।
शेष सहस मुख वर्णत हारी॥
दीनन को दुःख हरत भवानी।
नहिं देखो तुम सम कोउ दानी॥
सब कर मनसा पुरवत माता।
महिमा अमित जगत विख्याता॥
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै।
सो तुरतहि वांछित फल पावै॥
तुम्हीं वैष्णवी तुम्हीं रुद्रानी।
तुम्हीं शारदा अरु ब्रह्मानी॥
रमा राधिका श्यामा काली।
तुम्हीं मातु सन्तन प्रतिपाली॥
उमा माध्वी चण्डी ज्वाला।
वेगि मोहि पर होहु दयाला॥ 10
तुम्हीं हिंगलाज महारानी।
तुम्हीं शीतला अरु विज्ञानी॥
दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता।
तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता॥
तुम्हीं जाह्नवी अरु रुद्रानी।
हे मावती अम्ब निर्वानी॥
अष्टभुजी वाराहिनि देवा।
करत विष्णु शिव जाकर सेवा॥
चौंसट्ठी देवी कल्यानी।
गौरि मंगला सब गुनखानी॥
पाटन मुम्बादन्त कुमारी।
भाद्रिकालि सुनि विनय हमारी॥
बज्रधारिणी शोक नाशिनी।
आयु रक्षिनी विन्ध्यवासिनी॥
जया और विजया वैताली।
मातु सुगन्धा अरु विकराली॥
नाम अनन्त तुम्हारि भवानी।
वरनै किमि मानुष अज्ञानी॥
जापर कृपा मातु तब होई।
जो वह करै चाहे मन जोई॥ 20
कृपा करहु मोपर महारानी।
सिद्ध करहु अम्बे मम बानी॥
जो नर धरै मातु कर ध्याना।
ताकर सदा होय कल्याना॥
विपति ताहि सपनेहु नाहिं आवै।
जो देवीकर जाप करावै॥
जो नर कहँ ऋण होय अपारा।
सो नर पाठ करै शत बारा॥
निश्चय ऋण मोचन होई जाई।
जो नर पाठ करै चित लाई॥
अस्तुति जो नर पढ़े पढ़ावै।
या जग में सो बहु सुख पावै॥
जाको व्याधि सतावे भाई।
जाप करत सब दूर पराई॥
जो नर अति बन्दी महँ होई।
बार हजार पाठ करि सोई॥
निश्चय बन्दी ते छुट जाई।
सत्य वचन मम मानहु भाई॥
जापर जो कछु संकट होई।
निश्चय देविहिं सुमिरै सोई॥ 30
जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई।
सो नर या विधि करे उपाई॥
पाँच वर्ष जो पाठ करावै।
नौरातन महँ विप्र जिमावै॥
निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी।
पुत्र देहिं ता कहँ गुणखानी॥
ध्वजा नारियल आन चढ़ावै।
विधि समेत पूजन करवावै॥
नित प्रति पाठ करै मन लाई।
प्रेम सहित नहिं आन उपाई॥
यह श्री विन्ध्याचल चालीसा।
रंक पढ़त होवे अवनीसा॥
यह जन अचरज मानहु भाई।
कृपा दृष्टि जापर होइ जाई॥
जै जै जै जग मातु भवानी।
कृपा करहु मोहि निज जन जानी॥
नवरात्रि में करें माता दुर्गा के इन 5 मंत्रों के जाप
1- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
2- ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।।
3- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।
4- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
5- रोगानशेषानपहंसि तुष्टा।
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान।।
देवी माता को अर्पित न करें ये सामान
Chaitra Navratri 2026 LIVE Updates: नौ दिनों में कर लें माता दुर्गा के इन 32 नामों का जप
ॐ दुर्गा
दुर्गतिशमनी
दुर्गाद्विनिवारिणी
दुर्गमच्छेदनी
दुर्गसाधिनी
दुर्गनाशिनी
दुर्गतोद्धारिणी
दुर्गनिहन्त्री
दुर्गमापहा
दुर्गमज्ञानदा
दुर्गदैत्यलोकदवानला
दुर्गमा
दुर्गमालोका
दुर्गमात्मस्वरुपिणी
दुर्गमार्गप्रदा
दुर्गम विद्या
दुर्गमाश्रिता
दुर्गमज्ञान संस्थाना
दुर्गमध्यान भासिनी
दुर्गमोहा
दुर्गमगा
दुर्गमार्थस्वरुपिणी
दुर्गमासुर संहंत्रि
दुर्गमायुध धारिणी
दुर्गमांगी
दुर्गमता
दुर्गम्या
दुर्गमेश्वरी
दुर्गभीमा
दुर्गभामा
दुर्गमो
दुर्गोद्धारिणी
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: durga chalisa lyrics
॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
॥ चौपाई ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुंदरी बाला॥
प्रलय काल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥
शिव योगी तुमरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
प्रकट भई फाड़ कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्यकश्यप को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीर सिंधु में करत विलासा।
दया सिंधु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजे।
जाको देख काल डर भाजे॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुं लोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन्ह पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बसव लोकां।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो कोई गावै।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम क्रोध जीत सब लीन्हो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछतायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपु मुरख मोह नित धावें॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं एकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परम पद पावै॥
॥ दोहा ॥
देवी दास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: maa durga chalisa
यह 40 चौपाइयों का स्तोत्र है जिसमें माता की महिमा बताई गई है। यह दुर्गा माता की भक्ति में पढ़ा जाने वाला प्रसिद्ध पाठ है।
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Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: maa shailputri mantra
पहले दिन “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। यह मंत्र शांति, शक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक है। इसे 108 बार जपना विशेष फलदायक माना जाता है।
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Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: माता की आरती
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: navratri ka pehla din
यह दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है और यहीं से व्रत और पूजा की शुरुआत होती है।
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: maa shailputri mantra
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” इस दिन का मुख्य मंत्र होता है।
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: नवरात्रि में कौन सी आरती जरूर करनी चाहिए
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: Mata Ki Aarti Lyrics Hindi Mein Kahan Milegi
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: Navratri Mata Ki Aarti Kaun Si Hoti Hai
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: shailputri mata ki aarti
शैलपुत्री माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
वृषभ पर सवार हो माता,
हाथ में त्रिशूल सुहावे।
मस्तक पर चंद्र विराजे,
तीनों लोक झुक जावे॥
नाभि कमल से निकली गंगा,
शीतलता बरसावे।
भक्तों के दुख हरने वाली,
सुख-समृद्धि दे जावे॥
सदा करे जो ध्यान तुम्हारा,
भवसागर तर जावे।
दुख-दरिद्र सब दूर करों,
जीवन में खुशियां लावे॥
शैलपुत्री माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
Chandra Navratri 2026, जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती LIVE Updates: pahle navratri ki aarti
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोऊ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
शुंभ-निशुंभ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हर्ता, सुख संपत्ति करता॥
भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावै॥
