Makar Sankranti 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: मकर संक्रांति पर इन सूर्य मंत्र से करें सूर्य देव को प्रसन्न
Makar Sankranti 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat Kab Hai, Samagri, Mantra: मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी 2022 को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। तथा महापुण्य काल सुबह 09 बजे से शुरू होकर 10:30 तक रहेगा।
Makar Sankranti 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List : मकर संक्रांति का पर्व बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन नदी स्नान और दान की परंपरा भी है। इसे अलग अलग जगहों पर अलग नाम से भी जाना जाता है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल और गुजरात में उत्तरायण कहते हैं। इसे खिचड़ी या पौष संक्रांति भी कहते हैं। वैज्ञानिकीय दृष्टि से भी मकर संक्रांति का पर्व बेहद खास है। इस दिन से मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है, सूर्य के प्रकाश में गर्मी और तपन बढ़ने लगती है। इसे शीत ऋतु के समापन और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
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Makar Sankranti 2022 date (कब है मकर संक्रांति 2022): हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस बार संक्रांति 14 जनवरी 2022, शुक्रवार को है।
Makar Sankranti 2022 Puja Muhurat: इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी 2022 को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। तथा महापुण्य काल सुबह 09 बजे से शुरू होकर 10:30 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महापुण्य काल में किया गया दान अक्षय फलदायी होता है तथा इस दौरान जाप का विशेष महत्व होता है।
Makar Sankranti 2022: यहां देखें सूर्य मंत्र
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
ॐ मरीचये नमः
ॐ आदित्याय नमः
ॐ सवित्रे नमः
ॐ अर्काय नमः
ॐ भास्कराय नमः
ॐ श्री सबित्रू सुर्यनारायणाय नमः
Makar Sankranti 2022: सावधान रहें यह जातक
आज मकर संक्रांति पर मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर, कर्क और कुंभ राशि के जातकों को सावधान रहने के लिए कहा जा रहा है। मकर संक्रांति पर इन राशि के जातकों को स्वास्थ्य में खराबी, मानसिक अशांति और तनाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Makar Sankranti 2022 Mantra: करें इन मंत्रों का जाप
ॐ मित्राय नमः
ॐ रवये नमः
ॐ सूर्याय नमः
ॐ भानवे नमः
ॐ खगाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
Makar Sankranti 2022 Puja Vidhi: मकर संक्रांति पर ऐसे करें पूजा
मकर संक्रांति पर प्रातः काल स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। इस दिन स्त्रोत का पाठ करें और सूर्य देव को तिल सहित जल अर्पण करें। मुमकिन हो तो गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। पूजा करने के बाद कंबल, तिल, गुड़, लड्डू, खिचड़ी और शुद्ध घी जरूरतमंदों को दान में दें।
Makar Sankranti 2022 Mantra: मकर संक्रांति के प्रभावशाली मंत्र
मकर संक्रांति पर भक्तों को सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्र का जाप अवश्य करें।
ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।।
Makar Sankranti 2022: हुई खरमास की समाप्ति
आज मकर संक्रांति के साथ खरमास की समाप्ति हो गई है। जब सूर्य धनु राशि में गोचर करते हैं तब यह समय अवधि खरमास कहलाती है। खरमास के समय मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। जब मकर संक्रांति आती है तब खरमास की समाप्ति हो जाती है। खरमास की समाप्ति के साथ मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर यह जातक होंगे प्रभावित
मकर संक्रांति के दिन जातकों की चंद्र राशि पर प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में तिल, गुड़, खिचड़ी, चावल और दाल का दान करना लाभदायक माना जा रहा है। अपनी राशि के अनुसार, जातक दान करें इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर बन रहे महासंयोग
मकर संक्रांति पर इस बार चार महासंयोग बन रहे हैं। इन शुभ योगों के निर्माण की वजह से लोग नए कार्यों की शुरूआत कर सकते हैं। इस दिन दान करें व भगवान सूर्य की उपासना करें।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर लगेगा ये नक्षत्र
इस वर्ष मकर संक्रांति की सही तिथि 14 जनवरी है। मकर संक्रांति आज रोहिणी नक्षत्र में लग रहा है। इस वजह से आज शुभ योग बन रहा है। यह नक्षत्र शुभ फल प्रदान करने वाला होता है। इसके साथ आज यह त्यौहार वृष लग्न से भी युक्त होगा।
Makar Sankranti 2022 Mantra: करें इस मंत्र का जाप
आज मंकर संक्रांति की पूजा करते समय नीचे दिए दए मंत्र का जाप अवश्य करें। यह मंत्र बहुत प्रभावशाली माना गया है। इस मंत्र का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर बन रहा है तीन ग्रही योग
आज मकर संक्रांति के दिन तीन ग्रही योग का निर्माण होगा। इस दौरान मकर राशि में शनि, सूर्य और बुध का योग रहेगा। इस योग के दौरान कई महत्वपूर्ण बदलाव भी नजर आएंगे।
मकर संक्राति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी?
मकर संक्रांति को खिचड़ी त्योहार भी कहा जाता है। इसकी वजह ये है कि चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और उड़द की दाल को शनि का। खिचड़ी में मिलाई जाने वाली सब्जियों को बुध का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि ये सुपरफूड आपकी ग्रह स्थिति को मजबूत रखने में मदद करता है। खिचड़ी को पचाना आसान है, इसलिए भी इसे खाने का हेल्दी विकल्प माना जाता है।
Makar Sankranti: मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व
मकर संक्रांति के शुभ दिन पर कहा जाता है यदि पवित्र नदी गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा और कावेर में कोई डुबकी लगता है तो वह अपने सभी अतीत और वर्तमान पापों को धो देता है और आपको एक स्वस्थ, समृद्ध और खुशहाल जीवन प्रदान करता है। मकर संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पूजा विधि
आप इस पूजा को करने के लिए अपने पास एक साफ सुथरा लकड़ी की चौकी रखें और थोड़ा गंगाजल छिड़ कर शुद्ध करें। फिर उस पर कलश रख दें, फिर उसके बाद आप भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और सूर्य भगवान की मूर्ति रखें, इसके बाद आप आप जैसे अपने देवी देवताओ को पूजते है वैसे ही पूजा करें और साथ ही गणेश गायत्री मंत्र का जाप भी करें।
Makar Sankranti: क्यों खाना चाहिए तिल और गुड़
मकर संक्रांति सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है। ऐसे मौसम में हमारे शरीर का तापमान बहुत कम हो जाता है। यदि आप मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ से बने पकवान खाएं, तो आपके शरीर में गर्मी आ सकती हैं। उत्तर भारत में इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
Makar Sankranti 2022 Rules: पतंग उड़ाना
भारत में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए, तो इस दिन पतंग उड़ाने के कारण हम खुद को सूर्य के प्रकाश में घंटों रखते हैं जिसके कारण हमारी त्वचा और हड्डियां को लाभ पहुंचता है।
Makar Sankranti 2022: इसी दिन से ठंड में कमी आनी होती है शुरू
हिंदू शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में की ओर जाता हैं। शास्त्र के अनुसार इसी दिन से ठंड में कमी आनी शुरू हो जाती है। इसलिए लोग इस दिन सूर्य देवता की आराधना करते है।
क्या है उत्तम तिथि?
हालांकि कुछ ज्योतिषों का मानना है कि काफी समय बाद इस साल 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों ही दिन शुभ मुहूर्त बन रहा है। लेकिन, उत्तम तिथि 14 जनवरी ही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान के बाद सबसे पहले सूर्य सहित नवग्रहों की पूजा और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद दान आरंभ करना चाहिए।
सूर्य देवता की ऐसे करें पूजा
सूर्य देवता को अर्घ्य देने के नियम
- मकर संक्रांति के दिन सूर्य देवता को अर्घ्य देने से पहले शुद्ध हो जाए।
- अब उगते हुए सूर्य भगवान के तरफ मुंह करके कुश का आसन लगाएं।
- अब उस आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में जल लें।
- अब उस जल में मिश्री डाल लें। ऐसी मान्यता है कि सूर्य भगवान को मीठा जल देने से जन्मकुंडली के दोषीमंगल दूर हो जाते है।
- मंगल शुभ होने पर ही उसकी शुद्धता में प्रगति होती है
मकर संक्रांति के दिन जरूर करें ये काम
तिल और गुड़ खाना
मकर संक्रांति सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है। ऐसे मौसम में हमारे शरीर का तापमान बहुत कम हो जाता है। यदि आप मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ से बने पकवान खाएं, तो आपके शरीर में गर्मी आ सकती हैं। उत्तर भारत में इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
दान पुण्य करना
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के दिन दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी या नए वस्त्र दान करने के साथ दक्षिणा भी ब्राह्मणों को दिया जाता हैं।
गाय को चारा खिलाना
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को सुख-समृद्धि का दिन माना जाता हैं। इस दिन खासतौर पर गाय को चारा खिलाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन के बाद से शुभ कार्य प्रारंभ किये जाते है।
दोनों ही दिन शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति का त्यौहार हर वर्ष पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष मकर संक्रांति पर चार महासंयोग बन रहे हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में विराजमान होते हैं। ज्योतिषों का कहना है कि काफी समय बाद इस साल 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों ही दिन शुभ मुहूर्त बन रहा है।
मकर संक्रांति सूर्य मंत्र
1. ॐ सूर्याय नम: ।
2. ॐ आदित्य: नम:।
3. ॐ सप्तार्चिषे नम:।
4. ॐ ऋगमंडलाय नमः।
5. ॐ सवित्रे नमः।
6. ॐ वरुणाय नमः।
7. ॐ सप्तसप्त्य नमः।
8. ॐ मार्तण्डाय नमः।
9. ॐ विष्णवे नमः।
10. ॐ घृणि सूर्याय नम:।
11. ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
12. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।
13. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
14. ॐ घृणि सूर्यादित्योम
15. ॐ ह्रां, ह्रीं, ह्रौं स: सूर्याय नमः
गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला
गोरखनाथ मंदिर और वहां का खिचड़ी पर्व, दोनों ही पूरी दुनिया में मशहूर हैं। त्रेतायुग से जारी बाबा गोरखनाथ को मकर संक्रांति की तिथि पर खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा की सूत्रधार गोरक्षपीठ ही है। बाबा का परिसर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां सभी भेद समाप्त नजर आते हैं। इस परिसर में कारोबारी गतिविधियों से अनेक लोगों का परिवार पलता है, जितने सनातनी तकरीबन उतने ही परिवार मुस्लिम समाज के। मंदिर परिसर में करीब माह भर तक लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है।
कब है मकर संक्रांति की उत्तम तिथि
इस बार तिथि को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग कहा है कि संक्रांति 14 को और कुछ लोग 15 जनवरी को होने की बात कह रहे है। ज्योतिष के जानकार पंडित सुजीत कुमार के मुताबिक मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही है। सूर्य मकर में 14 को दोपहर 2:27 पर आएंगे। मकर संक्रांति मुहूर्त विचार में मकर में सूर्य प्रवेश के सूर्यास्त के 16 घटी पहले और 16 घटी बाद पुण्यकाल होता इसलिए मकर संक्रांत 14 की प्रातःकाल सुबह 07 बजटकर 15 मिनट से माना जायेगा। यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। इसलिए यहां उदय तिथि मान्य नहीं होती। कहीं कहीं 15 को भी मनायी जाएगी।
मीन राशि वाले गुड़ का दान करें
धनु- गुरु के बीज मंत्र का जप करें। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। गुड़ व खिचड़ी का दान करें। श्री सूक्त का पाठ करें।
मकर- हनुमानबाहुक व श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। श्री विष्णुसहस्रनाम के पाठ से सुख का आगमन होता है।
कुंभ- शनि व शुक्र के बीज मंत्र का जप करें। सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। तिल का दान करें। कम्बल का दान करें।
मीन- गुरु व सूर्य के बीज मंत्र का जो करें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ व तिल तथा गुड़ का दान करें।
सिंह राशि वाले अन्न दान करें
सिंह- सूर्य उपासना करें। तिल व गुड़ का दान अवश्य करें। आज दान का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति पर चावल,दाल,आलू,सब्जी इत्यादि कम से कम 18 व्यक्तियों के भोजन के बराबर अन्न दान अवश्य करना चाहिए। सूर्य व मंगल के बीज मंत्र का जप करें।
कन्या- बुध व सूर्य के बीज मंत्र का जप करें। लाल वस्त्र व अन्न का दान करने से धन की प्राप्ति होगी। बुध व सूर्य के द्रव्यों का दान करें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें।
तुला- अपने राशि के स्वामी ग्रह यानी शुक्र व बुध के साथ सूर्य के बीज मंत्र का जप अवश्य करें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। तिल का दान करें।
वृश्चिक- मंगल व गुरु के बीज मंत्र का जप करें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। लाल फलों व तिल का दान करें।
कम्बल का दान करें।
राशि के अनुसार दान व उपाय
मेष- गायत्री मंत्र का जप करें। सूर्य उपासना व हनुमान जी की पूजा करें। भगवान विष्णु जी की व शिव जी की पूजा करें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का 03 पाठ अत्यंत आवश्यक है। गेंहू का दान करें।
वृष- श्री सूक्त व आदित्यहृदयस्तोत्र का 03 पाठ करें। विष्णुसहस्रनाम के पाठ से कष्टों से मुक्ति मिलेगी। तिल व गुड़ का दान करें।
मिथुन- श्री अरण्यकाण्ड का पाठ करें। भगवान विष्णु के साथ साथ सूर्य पूजा भी करें। सूर्य के बीज मंत्र का जप करें व फिर हवन करें। शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए गायत्री मंत्र का जप करें।
कर्क- जो लोग रोग या किसी भय से परेशान हैं,वो हनुमानबाहुक का 09 बार पाठ करें। जिनको लगता है कि अब हम असुरक्षित हैं ,ऎसे लोगों को श्री रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना बहुत प्रभावी है। श्री सूक्त के पाठ से धन की प्राप्ति होगी।
जरूर करें ये 7 महत्वपूर्ण काम
1. सूर्य की करें आराधना
हिंदू शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में की ओर जाता हैं। शास्त्र के अनुसार इसी दिन से ठंड में कमी आनी शुरू हो जाती है। इसलिए लोग इस दिन सूर्य देवता की आराधना करते है।
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2. स्नान करना
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव को मनाने के लिए उनके घर गए थे। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से हजार गुना पुण्य प्राप्त होता हैं।
राशि में सूर्य के प्रवेश का आप पर क्या पड़ेगा असर
मेष- स्वास्थ्य की स्थिति पहले से बेहतर होगी। मनोवांछित कामना पूर्ण होगी। मकान या जमीन खरीद सकते हैं।आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है लेकिन उदर विकार से परेशानी हो सकते हैं। हनुमान जी की उपासना करते रहें।
वृष- आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धन का व्यय होगा। जॉब में परिवर्तन हो सकता है। मित्रों से आपको लाभ होगा। राजनीतिज्ञ सफल रहेंगे। गरीब व्यक्तियों में कम्बल वितरण करें। प्रतिष्ठा के प्रति थोड़ा सचेत रहना होगा। किसी नए व्यवसाय की तरफ मुड़ेंगे।
Makar Sankranti 2022 Date: कब मनाई जा रही है मकर संक्रांति?
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022, शुक्रवार के दिन मनाई जा रही है। धनु राशि से मकर राशि में सूर्य देव के गोचर से खरमास की समाप्ति होगी। मकर संक्रांति तिथि तब प्रारंभ होती है जब सूर्य देव राशि परिवर्तन कर मकर राशि में गोचर करते हैं। वर्ष 2022 में सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 02:27 पर गोचर करेंगे इसीलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
Makar Sankranti 2022: क्या है तिल दान का महत्व
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। मकर संक्रांति के दिन तिल दान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर तिल दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देने से सम्मान में वृद्धि होती है।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर बन रहे हैं चार महासंयोग
इस वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है। मकर संक्रांति पर सूर्य भगवान धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर इस बार चार महासंयोग बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्म, व्रज, बुध और आदित्य का समागम हो रहा है।
Makar Sankranti Puja Samagri: मकर संक्रांति की पूजा के लिए सामग्री
14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाएगा। यह त्यौहार हिंदू धर्मावलंबियों के लिए बहुत विशेष माना गया है। मकर संक्रांति की पूजा के लिए शुद्ध घी, गुड़, काला तिल, मिठाई, धूप-दीप, फूल, अक्षत, वस्त्र, गेहूं, तांबा, सुपारी, नैवेद्य, गंध, नारियल और लड्डू इकट्ठा कर लें।
Makar Sankranti 2022 Shubh Muhurat: कब लगेगा महा पुण्य काल?
मकर संक्रांति के दिन महा पुण्य काल दोपहर 02:43 से शाम 04:28 तक लगेगा। इस दिन शुभ मुहूर्त दोपहर 12:09 से दोपहर 12:51 तक रहेगा।
मकर संक्रांति पर रखें इन बातों का ध्यान
मकर संक्रांति के दिन साधु या किसी जरूरतमंद को दान दें। इस दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पूजा-पाठ जरूर करें। मकर संक्रांति पर तिल, मूंग दाल और खिचड़ी का सेवन करना लाभदायक माना गया है। इस दिन किसी जरूरतमंद को काले तिल का दान करें और सात्विकता का पालन करें।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर रखें इन बातों का ध्यान
मकर संक्रांति के दिन लोगों को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। इस दिन गुस्सा करने से बचें और किसी को भी बुरा-भला ना कहें। मकर संक्रांति पर लोगों को किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए और मसालेदार भोजन से दूर रहना चाहिए।
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर ना करें यह गलती
मकर संक्रांति के दिन लोगों को लहसुन, प्याज और मास नहीं खाना चाहिए। इस त्यौहार को सादगी के साथ मनाना चाहिए। इसके साथ मकर संक्रांति पर फसल भी नहीं काटना चाहिए।
मकर संक्रांति पर करें इन मंत्रों का जाप
मकर संक्रांति का त्यौहार भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भक्त भगवान सूर्य की विधिवत पूजा करते हैं। सूर्य देव की पूजा के दौरान भक्तों को कुछ मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
मकर संक्रांति के दिन कब होगा पुण्य काल, जानें यहां
मकर संक्रांति पर पुण्य काल 14 जनवरी की रात 08:49 से प्रारंभ होकर 15 जनवरी के दिन दोपहर 12:49 तक समाप्त हो जाएगा।
Makar Sankranti Puja Mantra: मकर संक्रांति पूजा मंत्र
14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है। इस दिन सूर्य पूजा के समय यह मंत्र पढ़ने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
ॐ सूर्याय नम:
Makar Sankranti Pooja Vidhi: मकर संक्रांति पर कैसे करें पूजा?
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह शुभ मुहूर्त में स्नान करते समय पानी में काला तिल, गुड़ और गंगाजल जरूर मिला लें। नहाने के बाद साफ कपड़ा पहनें और तांबे के लोटे में पानी भरें। फिर इस लोटे में काला तिल, गुड़, लाल फूल, अक्षत और लाल चंदन डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। पूजा के बाद शनि देव को काला तिल अर्पित करें।
Makar Sankranti 2022: कब मनाया जा रहा है मकर संक्रांति?
मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोग अक्सर उलझन में रहते हैं। ज्योतिष आचार्यों के मुताबिक, 14 जनवरी को सूर्य सूर्यास्त से पहले मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं इसीलिए 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया जाएगा।
खत्म होगा खरमास
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने से खरमास की समाप्ति होती है। इसी के साथ ही विवाह आदि सभी मांगलिक कार्यों की शुरूआत हो जाती है।
सूर्य को दें अर्घ्य
मान्यताओं के अनुसार इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य भगवान को अर्घ्य देने से पद और सम्मान में वृद्धि होती है। माना जाता है कि इससे शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है।
मकर संक्रांति के नाम
मकर संक्रांति को उत्तरायण, पोंगल, पौष संक्रांति, खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्नान और दान का खासा महत्व बताया गया है। वहीं सूर्य पूजन की भी इस पर्व पर परंपरा है।

