Narak Chaturdashi 2020: आज ये है यम का दीया जलाने का शुभ समय, जानें नर्क चतुर्दशी की पूजा व‍िध‍ि और महत्‍व

Narak chaturdashi yam ka diya: कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरक चतुर्दशी होती है और इस दिन यम का दीया निकलता है। अकाल मृत्‍यु को टालने के लिए आज ये है यम का दीया जलाने का शुभ समय।

Narak chaturdashi yam ka diya, नर्क चतुर्दशी पर निकालें यम का दीया
Narak chaturdashi yam ka diya, नर्क चतुर्दशी पर निकालें यम का दीया 

मुख्य बातें

  • नर्क चतुर्दशी के दिन निकाला जाता है यम का दीया
  • यम का दीया अकाल मृत्यु के भय से परिवार को बचाता है
  • इस बार दिवाली और नर्क चतुर्दशी एक दिन ही होगी

नरक चतुर्दशी पर यम की दृष्‍ट‍ि से बचने के ल‍िए यम का दीया जलाया जाता है। मान्‍यता है क‍ि ऐसा करने से अकाल मृत्‍यु का भय दूर होता है। साल 2020 में नरक चतुर्दशी की तारीख व त‍िथ‍ि को लेकर असमंजस में हैं तो जान लें क‍ि नरक चतुर्दशी इस बार 14 नवंबर को ही मनाई जाएगी, लेकिन यम का दीया 13 नवंबर को ही निकाला जाएगा। 13 नवंबर को त्रयोदशी शाम तक है और रात में चतुर्दशी लग जाएगी। ऐसे में यम का दीया 13 तारीख को ही निकाला जाएगा। तिथि के हास्र होने से इस बार नर्क चतुर्दशी 14 नवंबर को दोपहर तक रहेगी लेकिन दोपहर बाद से अमावस्या लग जाएगा। इसलिए दीवाली भी 14 नंवबर को मनाई जाएगी।

नरक चतुर्दशी का महत्व बहुत अधिक माना गया है। मान्यता है कि इस दिन यदि मनुष्य यम के निमित्त दीया घर के बारह निकालता है तो उसका पूरा परिवार अकाल मृत्यु के भय से बचा रहता है। नरक चतुर्दशी कलयुग में मानव योनि में जन्म लेने वालों के लिए बहुत उपयोगी मानी गई है, क्योंकि मनुष्य इस युग में कई तरह के पाप कर्म करता है और इससे मुक्ति के लिए नर्क चतुर्दशी के दिन पूजा करने और दीप दान किया जाता है।
    

जानें किस दिन होगा धनतेरस, नर्क चतुर्दशी और दिवाली (Narak Chaturdashi 2020 Date)

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 नवंबर को रात 9 बजकर 30 मिनट पर हो रहा है। जो कि 13 नवंबर की शाम 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि में धनतेरस 13 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन ही प्रदोष व्रत रखना उत्तम होगा।

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि का आरंभ 13 नवंबर को शाम 5 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है। चतुर्दशी तिथि 14 नवंबर को दिन में 2 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि में ही पूजा या चतुर्दशी को मनाया जाना चाहिए। ऐसे में 14 नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी,लेकिन यम का दीया 13 नवंबर की रात में ही निकाला जाएगा।

अमावस्या तिथि 14 नवंबर से प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से अगले दिन 15 नवंबर को सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। ऐसे में दिवाली भी 14 नवंबर को मनाई जाएगी। अमावस्या अगले दिन 15 नवबर को 10 बजे तक रहेगी।

धनतेरस पर क्‍यों करते हैं दीपदान (Yam Deep Daan- Kya hai, laabh, aur kyu karein daan)

धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यम के नाम पर एक दीपक जलाने की परंपरा है। धनतेरस की शाम को दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके दीपक जलाया जाता है। इस दीपक को घर की दहलीज पर रखते हैं। दरअसल दक्षिण द‍िशा यमराज की मानी जाती है। मान्‍यता है क‍ि धनतेरस की शाम ये दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय टल जाता है। 

धनतेरस 2020 पर दीपदान का मुहूर्त (Dhanteras 2020 Deep Daan Shubh Muhurt)
यम के नाम का दीपक  धनतेरस की शाम करीब सवा घंटे के ल‍िए जलाया जा सकता है। इसका मुहूर्त शाम 05 : 34 से 06 : 54 बजे तक का है। 

नर्क चतुर्दशी पर क्या करें (What to do on Narak Chaturdashi)

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर शरीर पर तेल लगाएं और नहाने के पानी में चिरचिरी के पत्ते डाल कर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु का दर्शन करें। क्योंकि इस बार नर्क चतुर्दशी 14 नवंबर को दिन में 2 बजकर 18 मिनट तक रहेगी, इसलिए  यम का दीया 13 नवंबर की रात में निकाल देना होगा।

ऐसे जलाएं यम का दीया (Yam ka Diya)

नरक चतुर्दशी के दिन घर में रात का भोजन निपटाने के बाद एक पुराने दीये में सरसों का तेल और पुरानी बाती डाल कर जला लें। फिर एक लोटे में जल लें और घर के बाहर कूड़े या नाली के पास दक्षिण दिशा की ओर इसे रख दें। याद रखें दीया घर से जला कर ले जाना होगा। इसके बाद दीये के पास ही लोटे का जल डाल दें। लोटे का जल डालते हुए निम्न मंत्र का जाप जरूर करें।

मृत्युना पाश्हस्तेन कालेन भार्यया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयाममिति।।

इसके बाद दीये को बिना देखे घर को लौट आएं। दीया जलाने से लेकर घर लौटने तक मौन धारण रखना चाहिए।

नरक चतुर्दशी के दिन जरूर करें ये काम

नरक चतुर्दशी के दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख कर यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से सालभर के पाप नष्ट हो जाते हैं। नरक चतुर्दशी की शाम देवताओं का पूजन करके घर, चौखट, सड़क, नाली आदि प्रत्येक स्थान पर दीपक जलाकर रोशनी अवश्य करें।

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