Jitiya 2021 date: महाभारत काल से जुड़ा है जितिया व्रत, जानें 2021 में कब है जीवित्पुत्रिका व्रत और इसके नियम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 31, 2021, 01:58 PM IST

jivitputrika vrat 2021 : जीवितपुत्रिका व्रत को जितिया भी कहा जाता है। हिंदु पंचांग के अनुसार जितिया का पावन पर्व आश्विन मास में कृष्ण पक्ष के सातवें से नौवें चंद्र दिवस तक मनाया जाता है।

Jitiya 2021 date: महाभारत काल से जुड़ा है जितिया व्रत, जानें 2021 में कब है जीवित्पुत्रिका व्रत और इसके नियम

jivitputrika vrat 2021 : जीवित्पुत्रिका व्रत यानि जितिया को महिलाओं के सबसे कठिन व्रतो में शामिल किया जाता है। छठ की तरह तीन दिनों तक चलने वाला यह व्रत बच्चों की लंबी उम्र और संपन्नता के लिए रखा जाता है। इस व्रत में निर्जला यानि बिना पानी के पूरे दिन उपवास किया जाता है। हिंदु पंचांग के अनुसार जितिया का पावन पर्व आश्विन मास में कृष्ण पक्ष के सातवें से नौवें चंद्र दिवस तक मनाया जाता है। इस पर्व की धूम उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में अधिक देखने को मिलती है। 

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इस बार जितिया का पावन पर्व 28 से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस व्रत का महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।

जितिया का महत्व

छठ की तरह जीवित्पुत्रिका व्रत यानि जितिया को महिलाओं के सबसे कठिन व्रतो में से एक माना जाता है। इस दिन माताएं अपने संतान की लंबी उम्र व सुख शांति की प्राप्ति के लिए निर्जला व्रत करती हैं। व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि से नहाए खाए से होती है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। आपको बता दें छठ की तरह इस दिन भी केवल एक बार ही भोजन किया जाता है। तथा अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और नवमी के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पारण किया जाता है।

महाभारत काल से जुड़ी कथा

पौराणिक ग्रंथों में इस व्रत का महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान चारो तरफ यह खबर फैल गई की अश्वथामा मारा गया, यह सुनकर अश्वथामा के पिता द्रोणाचार्य ने पुत्र शोक में अपने अस्त्र डाल दिए, तब द्रोपदी के भाई ने उनका वध कर दिया। 

पिता की मृत्यु के बाद अश्वथामा के मन में प्रतिशोध की ज्वाला भभक रही थी। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए वह रात के अंधेरे में पांडवो के शिविर जा पहुंचा और उसने पांच लोगों का वध कर दिया, लेकिन पांडव जिंदा थे। परिणामस्वरूप पांडवो को अत्यधिक क्रोध आ गया और अर्जुन ने अश्वथामा से उसकी मणि छीन ली। जिससे अश्वथामा पांडवों से अत्यधिक क्रोधित हो गया और इसका बदला लेने के लिए उसने अभिमन्यू की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने का षडयंत्र रच डाला। 

उसने उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने के लिए ब्रम्हास्त्र का प्रयोग किया। भगवान श्रीकृष्ण इस बात से भलीभांति परिचित थे कि ब्रम्हास्त्र को रोक पाना असंभव होगा। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सभी पुण्यो का फल उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को दे दिया। जिसके फलस्वरूप उत्तरा के गर्भ में पल रहा बच्चा पुनर्जीवित हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के पुण्य प्रताप से उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे के पुनर्जीवित हो जाने के कारण इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका व्रत पड़ा।

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