Lord Krishna 108 Names Mantra: जन्माष्टमी पर बस कर लें श्री कृष्ण के 108 नामों का जाप, खुल जाएगा आपकी सोई हुई किस्मत का द्वार

Lord Krishna 108 Names Mantra in Hindi, Ashtottara Shatanamavali of Lord Krishna: भगवान कृष्ण के जन्म पर उनका जाप,पूजा आदि करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आप भी इस मौके पर भगवान कृष्ण के इन 108 नाम मंत्रों से उनकी अराधना कर सकते हैं।

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Lord Krishna 108 Names in Hindi, Ashtottara Shatanamavali of Lord Krishna 

Lord Krishna 108 Names in Hindi, Ashtottara Shatanamavali of Lord Krishna:आज पूरे भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और कई इस्कॉन मंदिरों में भी कृष्ण जन्माष्टमी आज मनाई जा रही है।  हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। देश में जन्माष्टमी काफी धूम-धाम से मनाई जाती है। इस मौके पर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। खासकर, मथुरा और वृंदावन में काफी हर्षोल्लास के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस मौके पर श्रद्धालु भगवान कृष्ण की विधिवत पूजा करते हैं। आप भी इस मौके पर भगवान कृष्ण के 108 नाम मंत्र से जाप कर सकते हैं ,पूजा कर सकते हैं जिसे कल्याणकारी माना गया है। 

Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra

Lord Krishna 108 Names Mantra  (भगवान कृष्ण के 108 नाम मंत्र)

 1) ॐ श्रीकृष्णाय नम: 
2) ॐ कमलनाथाय नम: 
3) ॐ वासुदेवाय नम: 
4) ॐ सनातनाय नम: 
5) ॐ वसुदेवात्मजाय नम: 
6) ॐ पुण्याय नम: 
7) ॐ लीलामानुषविग्रहाय नम: 
8) ॐ यशोदावत्सलाय नम: 
9) ॐ हरये नम: 
10) ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशंखाम्बुजायुधाय नम: 
11) ॐ देवकीनंदनाय नम: 
12) ॐ श्रीशाय नम: 
13) ॐ नंदगोपप्रियात्मजाय नम: 
14) ॐ यमुनावेगसंहारिणे नम: 
15) ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नम: 
16) ॐ पूतनाजीवितहराय नम: 
17) ॐ शकटासुरभंजनाय नम: 
18) ॐ नंदव्रजजनानंदिने नम: 
19) ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नम: 

Janmashtami 2022 Puja Muhurat, Vidhi, Mantra

20) ॐ नवनीतविलिप्तांगाय नम: 
21) ॐ नवनीतनटाय नम: 
22) ॐ अनघाय नम: 
23) ॐ नवनीतनवहाराय नम: 
24) ॐ मुचुकुंदप्रसादकाय नम: 
25) ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नम: 
26) ॐ त्रिभंगीमधुराकृतये नम: 
27) ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नम: 
28) ॐ गोविंदाय नम: 
29) ॐ योगिनांपतये नम: 
30) ॐ वत्सवाटचराय नम: 
31) ॐ अनंताय नम: 
32) ॐ धेनुकासुरमर्दनाय नम: 
33) ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नम: 
34) ॐ यमलार्जुनभंजनाय नम: 
35) ॐ उत्तालतालभेत्रे नम: 
36) ॐ तमालश्यामलाकृतये नम: 
37) ॐ गोपगोपीश्वराय नम: 
38) ॐ योगिने नम: 
39) ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नम: 
40) ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नम: 
41) ॐ इलापतये नम: 
42) ॐ परस्मै ज्योतिषे नम: 
43)  ॐ यादवेंद्राय नम: 
44) ॐ यदुद्वहाय नम: 
45) ॐ वनमालिने नम: 
46) ॐ पीतवाससे नम: 
47) ॐ पारिजातापहारकाय नम: 
48) ॐ गोवर्धनाचलोद्धत्रै नम: 
49) ॐ गोपालाय नम: 
50) ॐ सर्वपालकाय नम: 
51) ॐ अजाय नम: 
52) ॐ निरंजनाय नम: 
53) ॐ कामजनकाय नम: 
54) ॐ कंजलोचनाय नम: 
55) ॐ मधुघ्ने नम: 
56) ॐ मथुरानाथाय नम: 
57) ॐ द्वारकानायकाय नम: 

Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Muhurat

58) ॐ बलिने नम: 
59) ॐ वृंदावनांतसंचारिणे नम: 
60) ॐ तुलसीदामभूषणाय नम:
61) ॐ स्यमंतकमणिहत्रै नम: 
62) ॐ नरनारायणात्मकाय नम: 
63) ॐ कुब्जाकृष्णांबरधराय नम: 
64) ॐ मायिने नम:
65) ॐ परमपुरुषाय नम: 
66) ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नम: 
67) ॐ संसारवैरिणे नम: 
68) ॐ कंसारये नम: 
69) ॐ मुरारये नम: 
70) ॐ नरकांतकाय नम: 
71) ॐ अनादिब्रम्हचारिणे नम: 
72) ॐ कृष्णाव्यसनकर्शकाय नम: 
73) ॐ शिशुपालशिरच्छेत्रे नम: 
74) ॐ दुर्योधनकुलांतकाय नम: 
75) ॐ विदुराक्रूरवरदाय नम: 
76) ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नम: 
77) ॐ सत्यवाचे नम: 
78) ॐ सत्यसंकल्पाय नम: 
79) ॐ सत्यभामारताय नम: 
80) ॐ जयिने नम: 
81) ॐ सुभद्रापूर्वजाय नम: 
82) ॐ जिष्णवे नम: 
83) ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नम: 
84) ॐ जगदगुरवे नम: 
85) ॐ जगन्नाथाय नम: 
86) ॐ वेणुनादविशारदाय नम: 
87) ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नम: 
88) ॐ बाणासुरकरांतकाय नम: 
89) ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नम: 
90) ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नम: 
91) ॐ पार्थसारथये नम: 
92) ॐ अव्यक्ताय नम: 
93) ॐ गीतामृतमहोदधये नम: 
94) ॐ कालीयफणिमाणिक्यरंजितश्रीपदांबुजाय नम: 
95) ॐ दामोदराय नम: 
96) ॐ यज्ञभोक्त्रे नम: 
97) ॐ दानवेंद्रविनाशकाय नम: 
98) ॐ नारायणाय नम: 

99) ॐ परब्रम्हणे नम: 
100) ॐ पन्नगाशनवाहनाय नम: 
101) ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नम: 
101) ॐ पुण्यश्लोकाय नम: 
102) ॐ तीर्थकृते नम: 
103) ॐ वेदवेद्याय नम: 
104) ॐ दयानिधये नम: 
105) ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नम: 
106) ॐ सर्वग्रहरुपिणे नम: 
107) ॐ परात्पराय नम: 
108) ॐ बालकृष्णाय नम: 

हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक जन्माष्टमी पर नीशीथ काल में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण की पूजा करने से जीवन सुखमय रहता है। इसके साथ श्री कृष्ण की कृपा सदैव अपने भक्तों पर बनी रहती है।

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