Janmashtami 2022 Puja Muhurat, Vidhi: शुभ मुहूर्त पर ही खोलें जन्माष्टमी का व्रत, जानिए कहां बना था पहला इस्कान मंदिर
Krishna Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra, Live: श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के पर्व को देश भर में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी का व्रत समृद्धि, संतान प्राप्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। यहां जानें कब करें कान्हा का स्वागत, क्या है जन्माष्टमी का मुहूर्त और क्या लगाएं भोग। जानिए श्री कृष्ण की आरती के लिरिक्स और मंत्र।
Krishna Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी तिथि की अर्ध रात्रि को विष्णु जी ने कृष्ण भगवान का अवतार लिया था। जन्माष्टमी पर भक्त पूरे दिन का व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को रखने और विधि पूर्वक पूजा करने से समृद्धि, संतान प्राप्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। जन्माष्टमी पर कान्हा का स्वागत झांकियोंयों, सजावट आदि के साथ किया जाता है। साथ ही लड्डू गोपाल को सजाकर उनको पालना भी झुलाया जाता है। जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी कब है और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
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Krishna Janmashtami 2022 Puja Muhurat And Shubh Muhurat In Hindi
जन्माष्टमी तिथि- 19 अगस्त 2022
अष्टमी तिथि आरंभ- गुरुवार 18 अगस्त रात्रि 09: 21 से
अष्टमी तिथि समाप्त- शुक्रवार 19 अगस्त रात्रि 10:59 तक
अभिजीत मुहूर्त- 12:05 -12:56 तक
अमृत काल- शाम 06:28 – 08:10 तक
पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी पर रात्रि 12:03 से 12:47 तक नीशीथ काल रहेंगा। ऐसे में श्रीकृष्ण की पूजा के लिए 44 मिनट का शुभ मुहूर्त होगा।
Krishna Janmashtami Puja Vidhi In Hindi
श्री कृष्ण की पूजा जन्माष्टमी पर विधि अनुसार करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। जन्माष्टमी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद अपने घर के मंदिर को सजाएं। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण के सामने व्रत करने का संकल्प लें और श्री कृष्ण का झूला सजाने के साथ उनका श्रृंगार करें। इस दिन श्रीकृष्ण का बांसुरी, मोर मुकुट, वैजयंती माला कुंडल, कुंडली, तुलसी दल आदि से श्रृंगार किया जाता है। इसके साथ उन्हें मक्खन, मिठाई, मेवे और मिश्री का भोग लगाया जाता है।
न्यूयॉर्क में बना था पहला इस्कॉन मंदिर
इस्कॉन का यह पहला मंदिर है। इसे 1966 में बनाया गया था। और यही इसे इस्कॉन की शुरुआत भी हुई थी। जिसके हरे कृष्ण आंदोलन भी कहा जाता है। इस समय दुनिया भर में इस्कॉन के 500 से ज्यादा केंद्र हैं।
व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन लोग फलहार व्रत रखते हैं। व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए।
व्रत पारण समय- 19 अगस्त, रात 10 बजकर 59 मिनट के बाद
व्रत पारण समय - 20 अगस्त को प्रातः 05:45 बजे के बाद
श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन
श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन, नन्द नन्दन सुन्दरम्।
अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥
सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्।
मुख चन्द्र द्विति नख चन्द्र द्विति, पुष्पित निकुंजविहारिणम्॥
मुस्कान मुनि मन मोहिनी, चितवन चपल वपु नटवरम्।
वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम्॥
वृषुभान नंदिनी वामदिशि, शोभित सुभग सिहासनम्।
ललितादि सखी जिन सेवहि, करि चवर छत्र उपासनम्॥
॥ हरि: ॐ तत् सत् ॥
श्री कृष्ण चालीसा के लिरिक्स
॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥
चौपाई
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
जय नट-नागर नाग नथैया।कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।आओ दीनन कष्ट निवारो॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी।होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो।आज लाज भारत की राखो॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
रंजित राजिव नयन विशाला।मोर मुकुट वैजयंती माला॥
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।कटि किंकणी काछन काछे॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे।छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
करि पय पान, पुतनहि तारयो।अका बका कागासुर मारयो॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।मसूर धार वारि वर्षाई॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।गोवर्धन नखधारि बचायो॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो।कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
करि गोपिन संग रास विलासा।सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
केतिक महा असुर संहारयो।कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
महि से मृतक छहों सुत लायो।मातु देवकी शोक मिटायो॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी।लाये षट दश सहसकुमारी॥
दै भिन्हीं तृण चीर सहारा।जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
असुर बकासुर आदिक मारयो।भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो।तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे।दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
लखि प्रेम की महिमा भारी।ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
भारत के पारथ रथ हांके।लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये।भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥
मीरा थी ऐसी मतवाली।विष पी गई बजाकर ताली॥
राना भेजा सांप पिटारी।शालिग्राम बने बनवारी॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो।उर ते संशय सकल मिटायो॥
तब शत निन्दा करी तत्काला।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।दीनानाथ लाज अब जाई॥
तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया।डूबत भंवर बचावत नैया॥
सुन्दरदास आस उर धारी।दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो।क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै।बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
'आरती कुंज बिहारी की' के लिरिक्स
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की॥
चंडीगढ़ और देहरादून में शुभ मुहूर्त
चंडीगढ़: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:05 बजे से मध्य रात्रि 12:49 तक
देहरादून: 19 अगस्त की रात के 12:20 बजे से 01:05 बजे तक
जयपुर और हैदराबाद में शुभ मुहूर्त
जयपुर: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:09 से मध्य रात्रि 12:53
हैदराबाद: 19 अगस्त रात 11:57 से मां की रात्रि 12:43
चेन्नई: 19 अगस्त रात 11:50 से मध्य रात्रि 12:36 तक
पुणे: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:16 से मध्य रात्रि 01:01
मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में शुभ मुहूर्त
मुंबई: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:20 से मध्य रात्रि 01:05
बेंगलुरु: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:01 से मध्य रात्रि 12:46
कोलकाता: 19 अगस्त रात 11:18 से मध्यरात्रि 12:03
अहमदाबाद: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:21 से मध्य रात्रि 1:06
दिल्ली एनसीआर में पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू शास्त्रों के मुताबिक जन्माष्टमी पर नीशीथ काल में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। जानिए दिल्ली एनसीआर का शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:03 से मध्य रात्रि 12:47 तक है।
गुरुग्राम: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:04 से मध्य रात्रि 12:48
नोएडा: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:03 से मध्य रात्रि 12:46
गाजियाबाद: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:03 से मध्य रात्रि 12:46
Janmashtami 2022: भगवान को लगाएं ये भोग
पंचामृत में मक्खन और मिश्रि मिलाएं और धनिया की पंजीरी के साथ फल आदि चढ़ा कर भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद आप आरती करें। इसके बाद भगवान का प्रसाद खुद भी खाएं और दूसरों को भी बांटें।
शंख से देना चाहिए अर्घ्य
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के अभिषेक के बाद शंख से अर्घ दें चाहिए। शंख में सुगंधित जल भरें और अर्घ दें। अर्घ के बाद षोडशोपचार विधि से भगवान की पूजा करें।
जन्माष्टमी में काले रंग से रहें दूर
मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को भूलकर भी काले रंग की चीजें अर्पित नहीं करें। इस दिन काले रंग के कपड़े पहनकर भी पूजा करना चाहिए। काला रंग शनि से संबंधित है और यह अशुभ माना जाता है।
कर्क राशि वालों को वाणी से मिलेगा लाभ
जन्माष्टमी के दिन कर्क राशि के जातकों को वाणी से लाभ होगा। बुध वाणी का कारक ग्रह है। इसके अलावा वह वाहन खरीद सकते हैं। कर्क राशि के जातक व्यवसाय में सफल रहेंगे। आज हरा रंग शुभ है और गाय को गुड़ खिलाएं।
Janmashtami 2022: श्री कृष्ण को लगाएं इस चीज का भोग
कृष्ण जन्मोत्सव पर सिंह राशि के जातकों को पूजा के समय माखन-मिश्री का भोग लगाना चाहिए।
Janmashtami 2022 पर श्री कृष्ण को लगाएं इस चीज का भोग
वृष राशि के जातक श्री कृष्ण को लगाएं माखन का भोग।
Janmashtami 2022 Manihari Ka Bhes Banaya Shyam Chudi Bechne Aaya
मनिहारी का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
झोली कंधे धरी,
उस में चूड़ी भरी,
गलिओं में शोर मचाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
राधा ने सुनी,
ललिता से कही,
मोहन को तुरंत बुलाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
चूड़ी लाल नहीं पहनू,
चूड़ी हरी नहीं पहनू,
मुझे श्याम रंग है भाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
राधा पहनन लगी,
श्याम पहनाने लगे,
राधा ने हाथ बढाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
राधे कहने लगी,
तुम हो छलिया बड़े,
धीरे से हाथ दबाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
मनिहारी का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
मनिहारी का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया |
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया ||
Janmashtami 2022
श्रीकृष्ण के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, जिनमें जीवन को सफल और सुखी बनने की सीख भी शामिल है। यहां देखें श्री कृष्ण और क्या-क्या सीख देते हैं। Lessons given by lord krishna
Janmashtami 2022 Puja Muhurat: यहा देखें पूजा के लिए मुहूर्त
कृष्ण जन्माष्टमी पर नीशीथ काल में श्री कृष्ण की पूजा करने का विधान है। यहां देखें आपके शहर में पूजा के लिए मुहूर्त कब है... Janmashtami 2022 Puja Shubh Muhurat Today
गीता का ये मंत्र है बहुत प्रभावशाली
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
Janmashtami 2022: आज करें यह उपाय
मेष राशि के जातकों को आज कृष्ण जन्माष्टमी पर गेहूं का दान देना चाहिए। माना जाता है कि यह उपाय करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
Janmashtami 2022 Puja Muhurat in Gurgaon
गुरुग्राम: 19 अगस्त मध्य रात्रि 12:04 से मध्य रात्रि 12:48
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जन्माष्टमी की दी शुभकामनाएं
Janmashtami 2022 का मंत्र
ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
Janmashtami 2022: कान्हा को जरूर चढ़ाएं तुलसीदल
भगवान श्री कृष्ण की पूजा में तुलसीदल का विशेष महत्व है। आज जन्माष्टमी की पूजा में उन्हें तुलसीदल अर्पित करना ना भूलें।
Krishna Janmashtami 2022 पर भूलकर भी ना करें इन चीजों का सेवन
कृष्ण जन्माष्टमी पर मांस मदिरा का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक चीजों का सेवन करने से भी मना किया जाता है।
Krishna Janmashtami 2022 पर पढ़ें यह कथा और जानें क्या है जन्माष्टमी का महत्व
स्कंदपुराण के अनुसार, बहुत पहले ययाति वंश के राजा उग्रसेन का राज किया करते थे। उग्रसेन का सबसे बड़ा पुत्र कंस था। जिसकी चचेरी बहन देवकी थी। कंस अपने ही पिता को जेल में डालकर स्वयं राज करने लगा। वहीं दूसरी ओर कश्यप ऋषि का जन्म राजा शूरसेन के पुत्र के रूप में यानि वासुदेव का जन्म हुआ। आगे चलकर वासुदेव का ब्याह देवकी से संपन्न हुआ। देवकी को विदा करने के दौरान एक आकाशवाणी वाणी होती है - हे कंस!...
यहां पढ़ें जन्माष्टमी की पूरी कथा
भारत में आज मनाई जा रही है Krishna Janmashtami 2022
भारत में आज भी जन्माष्टमी मनाई जा रही है। बांके बिहारी मंदिर के साथ दिल्ली, मथुरा, वृंदावन और बैंगलोर के इस्कॉन मंदिरों में आज जन्माष्टमी मनाई जा रही है।
गाय-बछड़े की पूजा
गाय और बछड़े से भगवान कृष्णा का प्रेम सभी जानते हैं, इसलिए जन्माष्टमी पर दो काम जरूर करें। पहला गाय और बछड़े की पूजा करें और एक ऐसी तस्वीर पूजा घर में स्थापित करें जिमसें भगवान के साथ गाय और बछड़े भी हों। इनकी नियमित पूजा करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होगी।
राशि के अनुसार करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा
मेष राशि के जातक कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण का श्रृंगार लाल रंग के वस्त्रों से करें। इसी तरह वृषभ राशि वाले भगवान कृष्ण के बाल गोपाल रूप का श्रृंगार चांदी की वस्तुओं से करें।
कृष्ण जन्माष्टमी में पूजा करते वक्त जरूर करें इस मंत्र का जाप
शुद्धि मंत्र
ओम अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोअपि वा। यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।
जन्माष्टमी पूजन संकल्प मंत्र
‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः कार्य सिद्धयर्थं कलशाधिष्ठित देवता सहित, श्रीजन्माष्टमी पूजनं महं करिष्ये।
विधि विधान से करें पूजा
मान्यता है कि कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि विधान से करने वाले व व्रत रखने वाले लोगों पर भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात में पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में हुआ था, इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात में की जाती है।
ये हैं श्रीकृष्ण के 108 नाम
1. कृष्ण
2. कमलनाथ
3. वासुदेव
4. सनातन
5. वसुदेवात्मज
6. पुण्य
7. लीलामानुष विग्रह
8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय
9. यशोदावत्सल
10. हरि
11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
13. देवाकीनन्दन
14. श्रीशाय
15. नन्दगोप प्रियात्मज
16. यमुनावेगा संहार
17. बलभद्र प्रियनुज
18. पूतना जीवित हर
19. शकटासुर भञ्जन
20. नन्दव्रज जनानन्दिन
21. सच्चिदानन्दविग्रह
22. नवनीत विलिप्ताङ्ग
23. नवनीतनटन
24. मुचुकुन्द प्रसादक
25. षोडशस्त्री सहस्रेश
26. त्रिभङ्गी
27. मधुराकृत
28. शुकवागमृताब्दीन्दवे
29. गोविन्द
30. योगीपति
31. वत्सवाटि चराय
32. अनन्त
33. धेनुकासुरभञ्जनाय
34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय
35. यमलार्जुन भञ्जन
36. उत्तलोत्तालभेत्रे
37. तमाल श्यामल कृता
38. गोप गोपीश्वर
39. योगी
40. कोटिसूर्य समप्रभा
41. इलापति
42. परंज्योतिष
43. यादवेंद्र
44. यदूद्वहाय
45. वनमालिने
46. पीतवससे
47. पारिजातापहारकाय
48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
49. गोपाल
50. सर्वपालकाय
51. अजाय
52. निरञ्जन
53. कामजनक
54. कञ्जलोचनाय
55. मधुघ्ने
56. मथुरानाथ
57. द्वारकानायक
58. बलि
59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
60. तुलसीदाम भूषनाय
61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
62. नरनारयणात्मकाय
63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
64. मायिने
65. परमपुरुष
66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
67. संसारवैरी
68. कंसारिर
69. मुरारी
70. नाराकान्तक
71. अनादि ब्रह्मचारिक
72. कृष्णाव्यसन कर्शक
73. शिशुपालशिरश्छेत्त
74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत
75. विदुराक्रूर वरद
76. विश्वरूपप्रदर्शक
77. सत्यवाचॆ
78. सत्य सङ्कल्प
79. सत्यभामारता
80. जयी
81. सुभद्रा पूर्वज
82. विष्णु
83. भीष्ममुक्ति प्रदायक
84. जगद्गुरू
85. जगन्नाथ
86. वॆणुनाद विशारद
87. वृषभासुर विध्वंसि
88. बाणासुर करान्तकृत
89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
90. बर्हिबर्हावतंसक
91. पार्थसारथी
92. अव्यक्त
93. गीतामृत महोदधी
94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
95. दामोदर
96. यज्ञभोक्त
97. दानवेन्द्र विनाशक
98. नारायण
99. परब्रह्म
100. पन्नगाशन वाहन
101. जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
102. पुण्य श्लॊक
103. तीर्थकरा
104. वेदवेद्या
105. दयानिधि
106. सर्वभूतात्मका
107. सर्वग्रहरुपी
108. परात्पराय
Krishna Janmashtami 2022 Upay: बेहतर आर्थिक स्थिति के लिए करें यह उपाय
श्रीकृष्ण वैजयंती माला धारण करके रखते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी पर वैजयंती माला घर लाने से आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि वैजयंती माला में माता लक्ष्मी का वास होता है।
भोग के लिए पीला या सफेद मक्खन?
जन्माष्टमी के त्योहार में लड्डू गोपाल को मक्खन का भोग जरूर लगाया जाता है, क्योंकि मक्खन भगवान कृष्ण को सबसे प्रिय है। पीला मक्खन कृत्रिम रंग, अधिक नमक फैट और चीनी से मिलकर बना होता है, जबकि सफेद मक्खन घर पर बनाया जा सकता है और इसमें इन चीजों की मात्रा नहीं होती है। सफेद मक्खन में विटामिन ए और डी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। सफेद मक्खन को हर कोई खा सकता है और स्वास्थ्य को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। यहांजानें कौन सा मक्खन है बेहतर।
Janmashtami पर ऐसे सजाएं बाल गोपाल का झूला
बाल गोपाल का पालना/झूला सजाने के लिए ताजे फूलों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आपके पास ताजे फूल नहीं हैं, तो आप सजावट के लिए कृत्रिम फूलों का उपयोग कर सकते हैं। फूल लगाने के बाद दूसरी तरफ दो बेलनाकार तकियों वाला एक छोटा सा पलंग लगाएं।
Krishna Janmashtami 2022: स्नान करने के पानी में मिलाएं पवित्र नदी का जल
कृष्ण जन्माष्टमी पर पवित्र नदियों में स्नान करना लाभदयक माना जाता है, लेकिन आप इस दिन नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो स्नान करने के पानी में किसी भी पवित्र नदी का जल मिला लें।
Krishna Janmashtami 2022 पर बन रहा है बेहद शुभ संयोग
कृष्ण जन्माष्टमी पर इस वर्ष 4 शुभ योग और 4 राजयोग बनने वाले हैं, जिनकी वजह से इस वर्ष 400 साल बाद बेहद शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग 18 नहीं बल्कि 19 अगस्त को बन रहा है जो खरीदारी के लिए लाभदायक माना जा रहा है।
Krishna Janmashtami 2022 पर बन रहा है महालक्ष्मी योग
इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी यानी 19 अगस्त को महालक्ष्मी योग भी बन रहा जो खरीदराी, निवेश और प्रॉपर्टी की खरीदी-बिक्री के लिए लाभदायक माना गया है।
Janmashtami 2022: बुधादित्य योग और हर्ष राजयोग
बुधादित्य योग में किए जाने वाले सारे काम सफल होते हैं। ये सूर्य और बुध की शुभ स्थिति से बनता है। इसके अलावा हर्ष राजयोग में नए कार्य की शुरुआत करने वाले व्यक्ति की किस्मत उसका साथ जरूर देती है।
Janmashtami 2022: छत्र योग और महालक्ष्मी योग
शुक्रवार जन्माष्टमी के दिन छत्र योग कृतिका नक्षत्र में बन रहा है। इस योग से नए व्यापार या जॉब की शुरुआत करना लोगों के लिए मंगलमय होगा। वहीं, चंद्रमा और मंगल की शुभ स्थिति से महालक्ष्मी योग बन रहा है। इस योग में निवेश करना बेहद फलदाई माना गया है।
जानिए क्या होता है ध्रुव योग
जन्माष्टमी में इस साल 400 साल बाद कुल आठ योग बन रहे हैं। इनमें चार शुभ योग और चार राजयोग है। इसमें पहला योग है ध्रुव योग। ध्रुव योग शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए लाभदायक माना जाता है।
जन्माष्टमी में पढ़े भगवान श्री कृष्ण की ये आरती
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की...........
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं,
गगन सों सुमन रासि बरसै,
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
आरती कुंजबिहारी की.......
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की........
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
आरती कुंजबिहारी की......
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
आकाल मृत्यु से मिलती है मुक्ति
जन्माष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु और पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है व मोक्ष की प्राप्ति होती है। जन्माष्टमी पर कान्हा को पीले चंदन का और केसर का तिलक जरूर लगाएं।
Janmashtami 2022: 20 करोड़ एकादशी का मिलता है फल
मान्यताओं के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से 20 करोड़ एकादशी का फल मिलता है। जन्माष्टमी के व्रत में आप बिल्कुल भी अन्न गृहण न करें। इस दिन केवल फलहार ही करें। इस दौरान तामसिक भोजन न पकाएं।
जानिए दही हांडी उत्सव का महत्व
पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण को बचपन नंद बाबा के गांव गोकुल में बीता था। बचपन में भगवान श्रीकृष्ण काफी नटखट थे और माखन, दूध और दही चुराया करते थे। इस दौरान वह मटकी भी फोड़ दिया करते थे। इससे उनकी शिकायत मां यशोदा से की जाती थी। दही हांडी का उत्सव यहां से शुरू हुआ था।
Janmashtami 2022: जानिए दही हांडी महोत्सव का महत्व
जन्माष्टमी के दिन देश के कई हिस्से खासकर महाराष्ट्र में दही हांडी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। दही हांडी के जरिए भगवान श्री कृष्ण का बाल लीलाओं का प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाता है। इस दिन घरों में मटकी फोड़कर माखन चोरी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस उत्सव से दुख दूर होते हैं।
Janmashtami 2022: घर पर कैसे मनाएं
19 तारीख यानी शुक्रवार बेहद शुभ डेट मानी जा रही है। इस दिन पूरब दिशा की ओर घर में आप झांकी सजा सकते हैं। पालना लेकर इसे फूल व लाइट से डेकोरेट किया जा सकता है।
Janmashtami 2022 Date : कब है जन्माष्टमी की तिथि
अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात 9:20 से लगेगी। यह 19 अगस्त को रात 10:59 पर समाप्त होगी। कहा जा रहा है कि तकरीबन 400 साल बाद जन्माष्टमी तिथि पर आठ शुभ संयोग बन रहे हैं।
Janmashtami 2022 Date: कब मनाएं जन्माष्टमी
19 अगस्त को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की उदया तिथि होने के कारण इसी तारीख तो मुख्य रूप से जन्माष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन भक्त व्रत रखकर और सजावट के साथ कान्हा का स्वागत करते हैं।

