इन तिथियों पर जन्मे बच्चे खुद ही नहीं, परिवार पर भी पड़ सकते हैं भारी- जानें व‍िस्‍तार से

Be careful on these birth dates : घर में बच्चे का जन्म खुशियों का आगमन होता है, लेकिन क्या आप जातने हैं कि कुछ तिथियों पर जन्मे बच्चे खुद ही नहीं परिवार के लिए भी भारी पड़ सकते हैं?

Be careful on these birth dates, इन तिथियों पर जन्में बच्चें तो रहें सावधान
Be careful on these birth dates, इन तिथियों पर जन्में बच्चें तो रहें सावधान 

मुख्य बातें

  • तिथियों का प्रभाव बच्चे के परिवार पर भी पड़ता है
  • बच्चा यदि अशुभ तिथि में जन्मा है तो उसका प्रभाव सही नहीं होता
  • ग्रह शांति और पूजन के बाद अशुभ फल के प्रभाव दूर होते हैं

बच्चे के जन्म का समय और दिन ज्योतिष शास्त्र में बहुत मायने रखता है। जन्म तिथि और समय के आधार पर ही उसकी कुंडली तैयार होती है। इतना ही नहीं उसके और उसके परिवार के भाग्य का निर्धाण भी उसी अनुसार होता है। कुछ तिथियों पर जन्म लेना जहां बहुत ही शुभफल देने वाला माना जाता है वहीं, कुछ तिथियां जन्म के लिहाज से अशुभ होती है। ज्योतिष में कुछ तिथियों को अच्छा नहीं माना गया है और ऐसी तिथियों पर यदि बच्चे का जन्म हो तो कई बार वह खुद के लिए और कई बार परिवार के लिए अच्छा नहीं होता है। तो चलिए आज आपको कुछ ऐसे ही तिथियों के बारे में बतांए जिसमें जन्म लेना ज्योतिष के अनुसार सही नहीं होता है और यदि ऐसी तिथि में बच्चे का जन्म हो तो सावधानी के साथ कुछ उपाय जरूर करने चाहिए।

जानें कौन सी है ये आठ तिथियां

1. कृष्ण चतुर्थी

कृष्ण चतुर्थी पर बच्चे का जन्म सही नहीं होता। कृष्ण चतुर्थी पर जन्मे बच्चों के जन्म को समायानुसार छह हिस्सों में रखा गया है। प्रथम भाग में जन्म होने तो शुभफल देता है, लेकिन  द्वितीय भाग में जन्म हो तो पिता का नाश, तृतीय भाग में जन्म हो तो मां की मृत्यु, चतुर्थ भाग में जन्म हो तो मामा का नाश, पंचम भाग में जन्म हो तो कुल का नाश और छठे भाग में जन्म हो तो धन का नाश या जन्म लेने वाला खुद का नाश करता है।

करें ये उपाय : यदि घर में बच्चे का जन्म ऐसी तिथि पर हुआ है तो भगवान गणेश की पूजा करें या सोमवार का व्रत रखकर शिवजी की पूजा नियमित रूप से करें। हनुमान चालीसा पढ़ें या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। यदि आपका मकान दक्षिणमुखी है तो उसे तत्काल प्रभाव से छोड़ दें।

2. अमावस्या

अमावस्या पर जन्म लेने वाले बच्चों का जीवन बहुत ही कठिन और संघर्ष से भरा होता है। इस दिन बच्चे के जन्म से परिवार में आर्थिक संकट आता है। इसलिए बच्चे के जन्म के साथ ही शांति का उपाय करना चाहिए। अमावस्या के देवता पितरों के अधिपति अर्यमा हैं। अमावस्या तिथि में जब अनुराधा नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण का मिलन होता है उस समय संतान का जन्म लेना ज्यादा दोषपूर्ण होता है।
ये उपाय करें : इस दोष के निवारण के लिए कलश स्थापना कर उसमें पंच पल्लव, जड़, छाल और पंचामृत डालकर अभिमंत्रित करके अग्निकोण स्थान पर रखें। सूर्य, चंद्रमा की प्रतिमा बनवाकर स्थापना करें और षोडशोपचार पूजन करें। फिर इन ग्रहों की समिधा से हवन करें। बच्चे के माता-पिता का भी अभिषेक करें और ब्राह्मण भोजन कराएं।

3. भद्रा

भद्रा, क्षय तिथि, व्यतिपात, परिध, वज्र या यमघंट में बच्चे का जन्म शुभ नहीं होता है।

उपाय- बच्चे के जन्म के दिन ही शांति करानी चाहिए। भगवान विष्णु व शंकरजी की पूजा और अभिषेक कर पीपल वृक्ष की पूजा करें और दीपदान करें। इसके बाद विष्णु भगवान के मंत्र का 108 बार हवन कराएं।

4. ग्रहण काल

बच्चे का जन्म यदि ग्रहण काल में हो तो यह अशुभ होता है। ऐसे जन्म से बच्चे या परिवार पर व्याधि, कष्ट, दरिद्रता और मृत्यु का भय बना रहता है।

करें ये उपाय- ग्रहण काल के जन्म की शांति के उपाय करें और राहु-केतु के नाम पर दान करें।

5. संक्रांति

सूर्य की 12 संक्रातियां होती हैं। उनमें से कुछ शुभ और कुछ अशुभ मानी गई हैं। ग्रहों की संक्रांतियों के नाम घोरा, ध्वांक्षी, महोदरी, मंदा, मंदाकिनी, मिश्रा और राक्षसी इत्यादि हैं। सूर्य की संक्रांति में जन्म लेने वाला दरिद्र हो जाता है इसलिए शांति करानी आवश्यक है।

ये करें उपाय- दोष निवारण के लिए नवग्रह का यज्ञ कराएं और उत्तरमुखी मकान में यदि रहते हों तो देवी लक्ष्मी की पूजा जरूर कराएं।

6. समान नक्षत्र में जन्म

यदि बच्चे का जन्म अपने माता-पिता या सगे भाई-बहन के नक्षत्र में होता है तो उसको मरणतुल्य कष्ट होता है।

करें ये उपाय- इस दोष निवारण के लिए अग्निकोण से ईशान कोण की तरफ जन्म नक्षत्र की सुंदर प्रतिमा बनाकर कलश पर स्थापित करें। फिर लाल कपड़े से प्रतिमा को ढंककर जन्म लिए नक्षत्रों के मंत्र का जाप करें। मंत्र से 108 बार घी और समिधा से आहुति दें और कलश के जल से पिता, पुत्र और सहोदर का अभिषेक करें।

7. गंडांत योग में जन्मे जातक

गंडात योग में जन्में बच्चे भी शुभ नहीं माने जाते हैं। यदि किसी जातक का जन्म उक्त योग में हुआ है तो उसे इसके उपाय करना चाहिए।

करें ये उपाय- शांति के लिए इन्द्र सूक्त और महामृत्युंजय का पाठ किया जाता है। साथ ही 3 गायों का दान देना चाहिए।

8.मूल

मूल नक्षत्र में जन्में बच्चों पर भी दोष लगता है। मूल का प्रथम चरण पिता के लिए भारी होता है, दूसरा चरण माता, तीसरा धन और अर्थ का नुकसान कराता है। वहीं चौथा चरण जातक के लिए शुभ होता है।

करें ये उपाय – मूल शांत कराने के लिए सताइसा पूजा जाता है। इसमें नवग्रह की विधिवत पूजा होती है। यह पूजा जन्म के सवा महीने बाद की जाती है। गंडांत योग में जन्म लेने वाले बच्चे के पिता उसका मुंह शांति पूजा के समय ही देखते हैं।

ये तिथि और योग प्राथमिक और सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई हैं। बच्चे के जन्म की तिथि की सही गणना और प्रभाव केवल ज्योतिषाचार्य ही कर सकते हैं।

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