Shiva Muthi: सावन के सोमवार में भगवान शिव को चढ़ाएं 'शिवा मुट्ठी', सभी परेशानियां होंगी दूर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 24, 2022, 12:23 PM IST

Benefits Of Shiva Muthi On Sawan: सावन के महीने में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से हर मनोकामना की पूर्ति होती है। इसके अलावा सावन के महीने में शिवा मुट्ठी का विशेष महत्व है...

Shiva Muthi: सावन के सोमवार में भगवान शिव को चढ़ाएं 'शिवा मुट्ठी', सभी परेशानियां होंगी दूर
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Sawan Shiva Muthi: सावन महीने की शुरुआत 14 जुलाई से हो चुकी है। इस बार सावन के महीने में चार सोमवार पड़ रहे हैं। सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को हो चुका है। सावन का दूसरा सोमवार 25 जुलाई को पड़ेगा। सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। यह महीना शिव भक्तों के लिए भी सबसे खास होता है। सावन के महीने में भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन हो जाते हैं। मंदिरों में भगवान शिव की पूजा पाठ करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त तरह तरह की विधि विधान से पूजा करते हैं। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ बेल, धतूरा व भांग भगवान शिव के ये प्रिय फूल उन पर अर्पित करते हैं, लेकिन इसके अलावा भगवान शिव को शिवा मुट्ठी चढ़ाना भी बेहद शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि शिवा मुट्ठी चढ़ाने से भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है।

हर सोमवार इन नियमों से चढ़ाएं शिवा मुट्ठी
भगवान शिव को पहले सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी, दूसरे सोमवार को सफेद तिल एक मुट्ठी, तीसरे सोमवार को खड़े मूंग एक मुट्ठी, चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और अगर 5 सोमवार हों तो पांचवे सोमवार को एक मुट्ठी सतुआ चढ़ाना चाहिए। अगर पांच सोमवार न हो तो आखिरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते हैं।

सावन के दूसरे सोमवार के दिन ऐसे करें पूजा
सावन का दूसरा सोमवार 25 जुलाई को पड़ेगा। इस दिन पूजा करने के लिए स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं और शुद्ध आसन पर बैठकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद 108 बेलपत्र पर नाम लिखकर चढ़ाएं। उसके बाद पहले दूध अर्पित करें, फिर इत्र से भगवान को स्नान कराएं और गुलाल लगाएं। एक मुट्ठी सफेद तिल भगवान शिव को चढ़ाएं। इसके बाद गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें। शहद भी शिवलिंग पर अर्पित करें। फिर पीली धोती शिवलिंग पर चढ़ाएं और माता पार्वती को चुनरी चढ़ाएं।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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