Chanakya Niti for Students: विद्यार्थी जीवन के बेहद अहम हैं ये 5 नियम, इन्‍हीं में छिपा है सफलता का रहस्‍य

Chanakya Niti in Hindi: कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में विश्वविख्यात आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थी जीवन के लिए मार्गदर्शन करते हुए कहा कि यह जीवन त्‍याग का होता है। इसलिए विद्यार्थी को कई चीजों से दूर रहना चाहिए अन्यथा वह गलत रास्ते पर भटक सकते हैं।

Chanakya Niti
इन पांच चीजों से विद्यार्थी को रहना चाहिए दूर   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • लालच और क्रोध से विद्यार्थियों को दूर रहना चाहिए
  • नींद विद्यार्थी की सबसे बड़ी दुश्‍मन, हासिल करें जीत
  • श्रृंगार और स्वादिष्ठ व्यंजन से ज्‍यादा दूरी ही बेहतर

Chanakya Niti in Hindi: चाणक्‍ नीति में जीवन के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। आचार्य चाणक्य अपने नीति में छात्रों का भी मार्गदर्शन करते हुए कई उपयोगी बातें बताई हैं। उन्‍होंने कहा है कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। जिस तरह एक तपस्वी को तक के बाद ईश्वर की प्राप्ति होती है, ठीक उसी तरह विद्यार्थियों को भी अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए तप के समान जीवन जीना पड़ता है। आचार्य चाणक्‍य विद्यार्थियों को लक्ष्‍य हासिल करने के लिए पांच चीजों से दूर रहने की सलाह दी है।

क्रोध

चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थियों के अंदर अगर क्रोध आ जाए तो वह ज्ञान को खत्म कर देता है। जिस विद्यार्थी में क्रोध आ जाता है वह ज्ञान हो कर भी अज्ञानी के समान होता है। क्योंकि क्रोध उसका पूरा ज्ञान हर लेता है। इसलिए हर विद्यार्थी को अपने क्रोध को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।

लालच

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार, जिस विद्यार्थियों के अंदर लालच की भावना होगी वह कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। क्योंकि लालच मनुष्य को बुरे कर्म की ओर धकेलता है और एक बार लालच इंसान के अंदर आ जाए तो वह निरंतर इस दलदल में फंस कर यहीं रह जाता है। उसका ज्ञान भी लालच की मंशा के आगे हार जाता है।

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स्वादिष्ठ व्यंजन

चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थी को अल्‍पहारी बनना चाहिए और ऐसा भोजन करना चाहिए जो उसके बुद्धि विकास में मदद करें। वहीं रोज स्वादिष्ट खाने की तलाश करने वाले विद्यार्थी केवल खाने के बारे में ही सोच सकते हैं। उसका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लग सकता। इसलिए विद्यार्थियों को सादा भोजन ही करना चाहिए।

श्रृंगार

चाणक्‍य नीति के अनुसार, विद्यार्थी जीवन में युवाओं को श्रृंगार से दूर रहना चाहिए। क्‍योंकि अगर श्रृंगाकर करने या सजने-धजने में एक बार मन लग गया तो विद्यार्थी का मन पढ़ने से हटने लगेगा। ऐसे में विद्यार्थी का ज्‍यादातर समय खुद को सजाने-संवारने में ही निकल जाएगा और वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएगा।

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निद्रा

आचार्य चाणक्य ने निद्रा को विद्यार्थी जीवन का सबसे बड़ा दुश्‍मन बताया है। आचार्य मानते हैं कि अगर कोई विद्यार्थी अपनी निद्रा से नहीं जीत पाया तो वह अपने ज्ञान और अनुभव के बाद भी सफलता नहीं पा सकता। नींद इंसान के ज्ञान को खा जाती है। इसलिए सही समय पर जागना और सही समय पर सोने के साथ ही नींद पर काबू रखना बेहद जरूरी है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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