Arafat Ka Roza 2026 : इस्लाम धर्म में आराफात का दिन बेहद पवित्र और फजीलत वाला माना जाता है। यह दिन जुलहिज्जा (जिलहिज्जा) महीने की 9वीं तारीख को आता है और हज के सबसे अहम अरकानों में शामिल माना जाता है। आज 27 मई 2026 को एशियाई देशों के मुसलमान आराफात का दिन मना रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब में आज बकरीद है। सऊदी अरब के मक्का में लाखों हाजी मैदान-ए-आराफात में इबादत, दुआ और अल्लाह की याद में मशगूल हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आराफात का दिन रहमत, मगफिरत और दुआओं की कबूलियत का दिन माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह अपने बंदों के सबसे करीब होते हैं और सच्चे दिल से मांगी गई दुआओं को कबूल करते हैं। यही वजह है कि जो लोग हज पर नहीं भी गए हैं, वे भी इस दिन रोजा, इबादत, दुआ और तौबा के जरिए अल्लाह की रहमत पाने की कोशिश करते हैं।
क्या है आराफात (Kya Hai Arafat)
आराफात का दिन इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जुलहिज्जा की 9वीं तारीख को आता है। यह वही दिन होता है जब हाजी मक्का के पास मैदान-ए-आराफात में जमा होकर अल्लाह से दुआ करते हैं। इस अमल को ‘वुकूफ-ए-आराफात’ कहा जाता है और इसे हज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हदीस में भी कहा गया है कि ‘हज का मतलब ही आराफात है।’ यानी जो व्यक्ति आराफात पहुंच गया, उसका हज पूरा माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने अपना आखिरी खुत्बा दिया था, जिसे खुत्बा-ए-विदा कहा जाता है।
आराफात के दिन क्या करना चाहिए
आराफात का दिन इबादत, तौबा और नेक अमल का दिन माना जाता है। इस दिन ज्यादा से ज्यादा अल्लाह को याद करना चाहिए और अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए अच्छे कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
आराफात का रोजा है बेहद अहम
जो लोग हज पर नहीं गए हैं, उनके लिए आराफात के दिन रोजा रखना सवाब माना गया है। हदीस के अनुसार इस दिन का रोजा पिछले और आने वाले एक साल के गुनाहों का कफ्फारा बन सकता है। इस कारण दुनियाभर के मुसलमान इस दिन रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। हालांकि जो लोग हज पर होते हैं, उनके लिए आराफात में रोजा रखना जरूरी नहीं माना गया, क्योंकि उन्हें पूरे दिन इबादत और दुआ में शक्ति बनाए रखनी होती है।
इस दिन करें दुआ
इस दिन दुआ की खास अहमियत बताई गई है। माना जाता है कि आराफात के दिन मांगी गई दुआ जल्दी कबूल होती है। इसलिए अपने लिए, अपने परिवार, माता-पिता, बच्चों और पूरी उम्मत के लिए दुआ करनी चाहिए। इस दिन अल्लाह से अपनी गलतियों की माफी मांगना, दिल से तौबा करना और अच्छे जीवन की दुआ करना बेहद खास माना जाता है। कई लोग इस दिन अपनी जरूरतों और ख्वाहिशों की दुआओं की लिस्ट भी बनाते हैं।
तस्बीह और जिक्र करें
आराफात के दिन अल्लाह का जिक्र करना बहुत फजीलत वाला माना गया है। इस दिन 'ला इलाहा इल्लल्लाह', 'अल्लाहु अकबर', 'अल्हम्दुलिल्लाह' और 'सुब्हानअल्लाह' का ज्यादा से ज्यादा जिक्र करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दिल से किया गया जिक्र इंसान के दिल को सुकून देता है और अल्लाह की रहमत को करीब लाता है।
कुरान शरीफ की तिलावत करें
आराफात के दिन कुरान पढ़ना और उसके मायनों पर गौर करना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है। माना जाता है कि अल्लाह के कलाम को पढ़ने और समझने से इंसान का ईमान मजबूत होता है और दिल को सुकून मिलता है। इस दिन सूरह इखलास, सूरह यासीन, सूरह रहमान और दूसरी पसंदीदा सूरहों की तिलावत करना अच्छा माना जाता है।
सदका और दान करें
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना भी बहुत नेक काम माना जाता है। खाने-पीने की चीजें बांटना, जरूरतमंदों को कपड़े देना या किसी भूखे को खाना खिलाना बहुत सवाब वाला काम माना गया है। अगर संभव हो तो रोजेदारों को इफ्तार करवाना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
पांचों वक्त की नमाज का खास ध्यान रखें
आराफात के दिन पांचों वक्त की नमाज समय पर अदा करनी चाहिए। इसके साथ ही नफ्ल नमाज और तौबा की नमाज पढ़ना भी अच्छा माना जाता है। यह दिन इंसान को अल्लाह के और करीब लाने का मौका माना जाता है।
गुनाहों से बचने की कोशिश करें
इस दिन झूठ, गुस्सा, लड़ाई-झगड़ा, चुगली और गलत कामों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इंसान को इस दिन अपने व्यवहार और सोच को भी बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
क्यों खास माना जाता है आराफात का दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आराफात का दिन रहमत और मगफिरत का दिन है। कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह सबसे ज्यादा लोगों को जहन्नम की आग से आजादी देते हैं और उनके गुनाह माफ करते हैं। यही वजह है कि मुसलमान इस दिन को बेहद खास मानते हैं। यह दिन केवल हज करने वालों के लिए नहीं, बल्कि हर मुसलमान के लिए इबादत और आत्मचिंतन का मौका माना जाता है। इसलिए आज के दिन ज्यादा से ज्यादा दुआ, इबादत, जिक्र और नेक काम करने की कोशिश करनी चाहिए।
