Ekadashi vrat ka paran time 6 November 2026: रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। घर में सुख-शांति आती है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर को रखा गया और आज, 6 नवंबर को व्रत का पारण किया जाएगा। एकादशी व्रत में पारण का भी उतना ही महत्व है जितना व्रत रखने का। इसलिए सही समय पर पूजा और पारण करना जरूरी माना जाता है।
आज एकादशी व्रत का पारण कब है
रमा एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत खोलना शुभ रहता है। इस दिन सुबह भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद पारण करना चाहिए।
नोएडा और दिल्ली के अनुसार पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 48 मिनट तक है। वहीं, इस्कॉन की परंपरा का पालन करने वाले भक्त सुबह 10 बजकर 15 मिनट तक पारण कर सकते हैं। द्वादशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।
रमा एकादशी व्रत पारण की विधि क्या है
रमा एकादशी का व्रत खोलने से पहले कुछ धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। उन्हें फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। अपनी मनोकामना कहें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद किसी जरूरतमंद को भोजन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें। फिर पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें।
एकादशी व्रत के पारण में क्या खाना चाहिए
पारण के समय खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत खोलने के लिए सबसे पहले जल ग्रहण कर सकते हैं। इसके बाद फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन लें। कई घरों में इस दिन चावल, दाल और सब्जी से बना भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण में तामसिक भोजन से बचना चाहिए। प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। भोजन को लेकर अपने परिवार की परंपरा का भी ध्यान रखें।
रमा एकादशी का धार्मिक महत्व
रमा एकादशी को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का व्रत माना जाता है। इसका नाम भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी के एक नाम रमा से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
