Ranchi: कांके प्रजन्न इकाई के सूअरों में फैला अफ्रीकन स्वाइन फ्लू, 500 से अधिक सूअरों की मौत से मचा हड़कंप

Ranchi News: रांची में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से संक्रमित होकर सूअरों की लगातार मौत हो रही है। कांके में स्थित बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वेटनरी कॉलेज में शनिवार को इस स्‍वाइन फ्लू से 10 सूअरों की मौत हो गई। वहीं कांके में ही स्थित प्रजन्न इकाई में 500 से अधिक सूअरों की मौत इस फ्लू से हो चुकी है।

African Swine Flu In Ranchi
रांची में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से 500 सुअरों की मौत   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • बीएयू में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से शनिवार को 10 सूअरों की मौत
  • भोपाल से आई जांच रिपोर्ट से हुआ अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का खुलासा
  • यह सिर्फ सूअरों तक ही सीमित, इंसानों में नहीं फैलता यह संक्रमण

Ranchi News: रांची में इस समय अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से संक्रमित होकर सूअरों कर मौत हो रही है। कांके में स्थित बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वेटनरी कॉलेज में शनिवार को इस स्‍वाइन फ्लू से 10 सूअरों की मौत हो गई। वहीं कांके में ही स्थित प्रजन्न इकाई में 500 से अधिक सूअरों की मौत इस इस फ्लू से हो चुकी है। लगातार बढ़ते मौके आंकड़े से अब लोगों में दहशत फैल रही है। इस बीमारी का खुलासा भोपाल के हाई सिक्योरिटी एनीमल डिजीज लेबोरेटरी से आई जांच रिपोर्ट के बाद हुआ। जिसके बाद बीएयू के वैज्ञानिक व वेटनरी डॉक्‍टर इस संक्रमण का इलाज खोजने में जुट गए हैं।

बता दें कि लगातार हो रही मौत के कारण इसी सप्‍ताह बीमारी का पता लगाने के लिए सैम्पल को आरडीडीएल और भोपाल के हाई सिक्योरिटी एनीमल डिजीज लेबोरेटरी भेजा गया था। वहां से आई जांच रिपोर्ट पाया गया कि सूअरों के मरने का कारण अफ्रीकन स्वाइन फ्लू है। कृषि विश्वविद्यालय स्थित वेटनरी कॉलेज के डीन वैज्ञानिक डॉ सुशील प्रसाद ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सूअरों की मौत के आंकड़े अचानक से बढ़ गया था। ये अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के कारण हो रहा है। जिसके रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं।

कोई वैक्सीन नहीं है इस संक्रमण का

विश्वविद्यालय के शूकर इंचार्ज डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि इस संक्रमण का अभी ना तो कोई इलाज है और ना ही कोई वैक्सीन। उन्‍होंने कहा कि इससे बचाव के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संक्रण से मनुष्यों को कोई खतरा नहीं है, यह सिर्फ सूअरों में ही फैलता है। उन्होंने बताया कि यह काफी गंभीर मामला है और इससे निपटने के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ सूअरों की इतनी बड़ी संख्या में मौत होने के कारण इसके पालन से जुड़े किसानों में भी हड़कंप मचा हुआ है। डॉक्‍टरों के अनुसार आसपास के क्षेत्र में ही भी सूअरों की मौत हो रही है। जिसकी वजह से सुअर पालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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