Corona Cases in UP: यूपी के गांवों और शहरों में मेडिकल तंत्र रामभरोसे, इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 18, 2021, 07:59 AM IST

उत्तर प्रदेश में कोरोना के मुद्दे पर सरकार बड़े बड़े वादे कर रही है लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कहने में गुरेज नहीं कि राज्य के गांवों और शहरों में मेडिकल सिस्टम रामभरोसे है।

Corona Cases in UP: यूपी के गांवों और शहरों में मेडिकल तंत्र रामभरोसे, इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

अगर कहें कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में सरकारी कोशिशों को पोल पट्टी खुल गई तो गलत ना होगा। आम जनमानस में यह सामान्य सी धारणा है कि सरकारें सिर्फ बड़ी बड़ी बातें कर रही हैं। ऐसी सूरत में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के खिलाफ जो टिप्पणी की है वो ध्यान देने के लायक है। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गांवों और शहरों में मेडिकल सिस्टम भगवना की दया पर है यानी रामभरोसे है। दरअसल यूपी में कोरोना से उपजे हालात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दायर की गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की थी तल्ख टिप्पणी
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मेरठ के एक अस्पताल में एक आइसोलेशन वार्ड में भर्ती संतोष कुमार (64) की मौत को ध्यान में रखते हुए यह टिप्पणी की।एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, वहां के डॉक्टर उसकी पहचान करने में विफल रहे और शव को अज्ञात के रूप में अंतिम क्रियाकर्म कर दिया। संतोष 22 अप्रैल को अस्पताल के एक बाथरूम में बेहोश हो गए थे और उन्हें पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए लेकिन उनकी मृत्यु हो गई।


अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
अस्पताल के कर्मचारी मृतकों की पहचान नहीं कर सके और उनकी फाइल का पता लगाने में विफल रहे। इस प्रकार, इसे एक अज्ञात शरीर के मामले के रूप में लिया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शव को एक बैग में पैक किया गया था और उसका निस्तारण कर दिया गया था।हाई कोर्ट ने सोमवार को इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर मेरठ जैसे शहर के मेडिकल कॉलेज की यही स्थिति है तो छोटे शहरों और गांवों से संबंधित राज्य की पूरी चिकित्सा प्रणाली को एक प्रसिद्ध की तरह ही लिया जा सकता है. हिंदी कह रही है, "राम भरोसा"।

डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ का व्यवहार ठीक नहीं
अगर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ इस तरह के आकस्मिक दृष्टिकोण को अपनाते हैं और अपने कर्तव्य के प्रदर्शन में लापरवाही दिखाते हैं, तो यह गंभीर कदाचार का मामला है क्योंकि यह निर्दोष लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। राज्य को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।पांच जिलों के जिलाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अवलोकन पर, अदालत ने कहा, "हमें यह देखने में कोई संकोच नहीं है कि शहर की आबादी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा बिल्कुल अपर्याप्त है और ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वस्तुतः जीवन रक्षक उपकरणों के संबंध में कमी है।"

अदालत ने राज्य सरकार को पूर्व में जारी अपने निर्देश के अनुपालन में पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।कोरोनोवायरस टीकाकरण के मुद्दे पर, अदालत ने सुझाव दिया कि विभिन्न धार्मिक संगठनों को दान करके कराधान कानूनों के तहत लाभ लेने वाले बड़े व्यापारिक घरानों को टीकों के लिए अपने धन को हटाने के लिए कहा जा सकता है।

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