विमान के इंजन आमतौर पर दो स्थानों पर लगाए जाते हैं: पंखों के नीचे (विंग-माउंटेड) या धड़ (फ्यूज़लेज) के पिछले हिस्से में (रियर-माउंटेड)। इन दोनों स्थानों के चयन के पीछे कुछ तकनीकी और संरचनात्मक कारण होते हैं। वर्तमान में अधिकांश बड़े वाणिज्यिक विमानों में पंखों के नीचे इंजन व्यवस्था अपनाई जाती है, क्योंकि यह संरचनात्मक मजबूती, रखरखाव में सुविधा, और कम शोर के कारण अधिक लाभकारी है। हालांकि, छोटे विमानों में धड़ के पिछले हिस्से में इंजन व्यवस्था भी अपनाई जाती है, जो विशेष परिस्थितियों में उपयुक्त होती है।
यह सबसे सामान्य और आधुनिक वाणिज्यिक विमानों में पंखों के नीचे इंजन लगाया जाता है जिसे विंग माउंटेड कहते हैं। यह एक सबसे बेहतरीन व्यवस्था है। इसका प्रयोग आमतौर पर बोइंग 737, एयरबस A320 और बोइंग 787 में होता है। इंजन पंखों के नीचे होने से पंखों पर भार बढ़ता है, जिससे पंखों के झुकाव (बेंडिंग) को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप पंखों को हल्का और मजबूत बनाया जा सकता है।
पंखों में स्थित ईंधन टैंक से इंजन तक ईंधन की आपूर्ति गुरुत्वाकर्षण बल से आसानी से की जा सकती है, जिससे पंप फेल होने की स्थिति में भी ईंधन आपूर्ति बनी रहती है। इंजन पंखों के नीचे होने से जमीन पर खड़े विमान में इंजन तक पहुंचना आसान होता है, जिससे रखरखाव और निरीक्षण सरल होते हैं। इंजन पंखों के नीचे होने से इंजन से उत्पन्न शोर पंखों द्वारा अवरुद्ध होता है, जिससे यात्रियों को कम शोर का अनुभव होता है।
कुछ छोटे विमानों में इंजन धड़ के पिछले हिस्से में लगाए जाते हैं, जैसे एम्ब्रेयर ERJ और कनाडियन रीजनल जेट (CRJ)। इंजन के धड़ के पिछले हिस्से में होने से यात्रियों को कम शोर का अनुभव होता है। इंजन के धड़ के पिछले हिस्से में होने से लैंडिंग गियर को छोटा और सरल बनाया जा सकता है। इंजन के पीछे होने से विमान का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है, विशेषकर इंजन विफलता की स्थिति में।
विमान के नीचे इंजन लगाने से रनवे पर उड़ान भरते और लैंड करते समय इंजन के ग्राउंड से टकराने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर छोटे विमानों में, इंजन को नीचे लगाने से ग्राउंड क्लीयरेंस कम हो जाता है, जिससे उड़ान भरते समय इंजन के ग्राउंड से टकराने की संभावना बढ़ जाती है। विमान के नीचे इंजन लगाने से रखरखाव और मरम्मत कार्य में कठिनाई हो सकती है। इंजन तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है, और इंजन की स्थिति के कारण तकनीशियनों के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है।
विमान के नीचे इंजन लगाने से विमान का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इंजन का वजन विमान के निचले हिस्से में होने से विमान का गुरुत्वाकर्षण केंद्र (Center of Gravity) बदल सकता है, जिससे उड़ान की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। विमान के नीचे इंजन लगाने से विमान की संरचना में जटिलता बढ़ सकती है। इंजन को सहारा देने के लिए अतिरिक्त संरचनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है, जिससे विमान का वजन बढ़ सकता है और निर्माण लागत में वृद्धि हो सकती है।
विमान के ऊपर इंजन लगाने से विमान का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इंजन का वजन विमान के ऊपर होने से विमान का गुरुत्वाकर्षण केंद्र (Center of Gravity) बदल सकता है, जिससे उड़ान की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। विमान के ऊपर इंजन लगाने से विमान की संरचना में जटिलता बढ़ सकती है। इंजन को सहारा देने के लिए अतिरिक्त संरचनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है, जिससे विमान का वजन बढ़ सकता है और निर्माण लागत में वृद्धि हो सकती है।