एक गलती की वजह से हुआ था माइक्रोवेव का अविष्कार, बहुत ही दिलचस्प है यह किस्सा

Microwave Invention Story: कई बार कुछ गलतियां भी दुनिया को नई चीज दे जाती हैं। माइक्रोवेव ओवन का अविष्कार भी ऐसी ही एक चौंकाने वाली गलती से हुआ था। आइए आज जानते हैं हमारे घरों में दिखने वाले माइक्रोवेव ओवन के आविष्कार के पीछे की कहानी।

Authored by: पंकज यादवUpdated Dec 12 2025, 11:24 IST
एक गलती और हो गया बड़ा आविष्कारImage Credit : IStock01 / 07

एक गलती और हो गया बड़ा आविष्कार

आज माइक्रोवेव हम सबके घरों में होना आम बात है। खाना गर्म करने से लेकर पॉपकॉर्न बनाने तक यह कुछ ही मिनट में हमारा काम आसान कर देता है। लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे घरों में दिखने वाले माइक्रोवेव ओवन का आविष्कार किसी वैज्ञानिक प्रयोग से नहीं, बल्कि एक अकस्मात गलती से हुआ था।

साल 1945 में हुई माइक्रवेव की खोजImage Credit : IStock02 / 07

साल 1945 में हुई माइक्रवेव की खोज

आज हम आपको माइक्रोवेव के आविष्कार के पीछे की कहानी बताएंगे। उससे पहले बता दें कि माइक्रोवेव ओवन का आविष्कार साल 1945 में हुआ। उस समय सेकंड वर्ल्ड वॉर चल रहा था और तमाम देशों के वैज्ञानिक बड़े-बड़े रडार और हथियारों पर रिसर्च कर रहे थे। इन्हीं में से एक वैज्ञानिक थे, पर्सी स्पेंसर, जो अमेरिकन कंपनी रेथियॉन में काम करते थे।

रडार टेस्ट करते-करते हुई अजीबोगरीब घटनाImage Credit : IStock03 / 07

रडार टेस्ट करते-करते हुई अजीबोगरीब घटना

एक दिन पर्सी स्पेंसर रडार मशीनों में इस्तेमाल होने वाले एक खास ट्यूब मैग्नेट्रॉन का टेस्ट कर रहे थे। मैग्नेट्रॉन माइक्रोवेव तरंगें पैदा करता है। जब वे मशीन के पास खड़े थे, अचानक उन्हें कुछ अजीब लगा। उन्होंने देखा कि उनकी जेब में रखी चॉकलेट बिना वजह पिघल गई है। गर्मी आसपास कहीं थी ही नहीं, फिर ऐसा कैसे हुआ? यही घटना माइक्रोवेव के खोज का पहला संकेत बनी।

पहले मक्के के दाने पर किया टेस्टImage Credit : IStock04 / 07

पहले मक्के के दाने पर किया टेस्ट

इस घटना के बाद पर्सी ने सोचा कि क्या मैग्नेट्रॉन की माइक्रोवेव तरंगें खाने को गर्म कर देती हैं? इसी चीज को परखने के लिए उन्होंने मक्का के एक दाने को मैग्नेट्रॉन के सामने रखा। अचानक मक्के का यह दाना पॉपकॉर्न में बदल गया, जिससे यह बात साफ हो गई कि माइक्रोवेव तरंगें खाने को अंदर से गर्म कर सकती हैं।

​दूसरा टेस्ट अंडे पर कियाImage Credit : IStock05 / 07

​दूसरा टेस्ट अंडे पर किया

इसके बाद अपनी खोज को और भी पुख्ता बनाने के लिए पर्सी ने तुरंत दूसरा प्रयोग किया। इस बार उन्होंने माइक्रोवेव तरंगों के सामने एक अंडे को रखा, जहां अंडा थोड़ी ही देर में फट गया। यह देख पर्सी को इतना यकीन हो गया कि माइक्रोवेव खाने में मौजूद पानी के अणुओं को तेजी से हिलाकर गर्म कर देता है।

पहला माइक्रोवेव बहुत बड़ा थाImage Credit : IStock06 / 07

पहला माइक्रोवेव बहुत बड़ा था

पर्सी के इन एक्सपेरिंमेंटस के बाद साल 1946 में रेथियॉन कंपनी ने अपना पहला माइक्रोवेव ओवन बनाया, जिसका नाम था राडारेंज (Radarange) उस वक्त की यह मशीन आज के माइक्रोवेव ओवन की तरह छोटी नहीं थी। वह एक फ्रिज जितनी बड़ी थी, जिसका वजन लगभग 340 किलो था, और ये काफी महंगी थी।

पहला घरेलू माइक्रोवेव 1967 में आयाImage Credit : IStock07 / 07

पहला घरेलू माइक्रोवेव 1967 में आया

इस आविष्कार के करीब 20 साल बाद जाकर माइक्रोवेव छोटे, सस्ते और घरों में रखने लायक बनाए जाने लगे और साल 1967 में बाजार में घरेलू माइक्रोवेव बिकने शुरू हुए। आज की माइक्रोवेव तकनीक उसी गलती की देन है। आज हम घर में 2 मिनट में पॉपकॉर्न बना लेते हैं, खाना गर्म कर लेते हैं। ये सब एक जेब में पिघली चॉकलेट की वजह से संभव हो पाया।

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