क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है, जो यह बताता है कि आप पैसों के लेन-देन में कितने भरोसेमंद हैं। इसी “फाइनेंशियल रेपुटेशन” के आधार पर बैंक और फाइनेंशियल संस्थाएं तय करती हैं कि आपको लोन मिलेगा या नहीं और अगर मिलेगा तो किस ब्याज दर पर।
आमतौर पर 750+ स्कोर को एक्सीलेंट माना गया है, वहीं 650–749 गुड में और 600 से कम को सुधार की जरूरत की कैटेगरी में रखा गया है।
क्रेडिट स्कोर का करीब 35% हिस्सा आपकी पेमेंट हिस्ट्री पर निर्भर करता है। एक भी लेट पेमेंट से स्कोर 50 पॉइंट तक गिर सकता है। इसके लिए ऑटो-डेबिट सेट करें या रिमाइंडर लगाएं।
अगर आपकी क्रेडिट लिमिट ₹1 लाख है, तो ₹30,000 से ज्यादा इस्तेमाल न करें। इसके लिए जरूरत पड़े तो क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का अनुरोध करें।
करीब 15% स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई पर निर्भर करता है। 5 साल से ज्यादा पुराने कार्ड को बंद करने से स्कोर गिर सकता है। टिप्स के तौर पर आपको बता दें कि पुराने कार्ड से हर महीने छोटी पेमेंट करें, जैसे OTT सब्सक्रिप्शन।
हर लोन आवेदन पर “हार्ड इन्क्वायरी” होती है, जिससे करीब 5 पॉइंट स्कोर कम हो सकता है। 6 महीनों में 2 से ज्यादा लोन अप्लिकेशन न करें।
होम लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का सही मिश्रण स्कोर को 20–30 पॉइंट तक बढ़ा सकता है। सिर्फ क्रेडिट कार्ड पर निर्भर न रहें।
500-600 स्कोर वालों के लिए FD-बेस्ड सिक्योर्ड कार्ड अच्छा विकल्प है। 6–12 महीनों में स्कोर में सुधार दिख सकता है।
साल में एक बार CIBIL से फ्री रिपोर्ट डाउनलोड करें। अगर कोई गलती दिखे, तो डिस्प्यूट दर्ज करें, आमतौर पर 60 दिनों में सुधार हो जाता है।