भगवान राम को किस नाम से पुकारती थीं माता सीता? दे दिया जवाब तो कहलाएंगे सच्चे सनातनी

Sita Ji Ram Ji Ko Kis Naam Se Pukarte The: सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि पत्नी को पति का नाम नहीं लेना चाहिए। इसलिए माता सीता भी भगवान राम का वास्तविक नाम नहीं लेती थी। लेकिन वो उन्हें किसी खास नाम से पुकारती थीं। ये शायद ही कोई जानता हो।

Authored by: लवीना शर्माUpdated Sep 15 2024, 08:07 IST
भगवान राम को इस खास नाम से बुलाती थीं सीता जी01 / 06

भगवान राम को इस खास नाम से बुलाती थीं सीता जी

माता सीता और भगवान राम को पहली ही नजर में एक-दूसरे से प्रेम हो गया था। कहते हैं दोनों की पहली मुलाकात वाटिका में हुई थी। श्री राम जी गुरु विशिष्ठ की आज्ञा से पूजा के लिए वाटिका में फूल लेने गए थे। माता सीता भी उस समय वहां मौजूद थीं। तब दोनों ने एक-दूसरे को देखा और उन्हें प्यार हो गया। इसके बाद उनका विवाह संपन्न हुआ। माता सीता अपने पति यानी भगवान राम से बहुत प्रेम करती थीं और उन्हें एक खास नाम से पुकारती थीं।

02 / 06Photo : Instagram

कोई नहीं जानता था ये नाम

भगवान श्रीराम को माता सीता करूणानिधान कहकर पुकारती थीं। कहते हैं यह नाम प्रभु श्रीराम और माता सीता जी ही जानती थीं।

03 / 06Photo : Instagram

क्यों सीता जी ने चुना ये नाम

कहते हैं जब सीता जी इस चीज को लेकर चिंतित थीं कि कहीं उनके पिता द्वारा रखी गयी शिव धनुष भंग करने की शर्त को किसी और ने पूरा कर दिया तो उनका विवाह राम जी से नहीं हो पाएगा। अपनी इस चिंता को दूर करने के लिए माता सीता अपनी अराध्य देवी मां पार्वती की शरण में गयी। (पढ़ें- घर में कौन-कौन से 5 पौधे लगाने चाहिए? जानिए वास्तु शास्त्र का जवाब)

04 / 06Photo : Instagram

माता सीता को बहुत पसंद आया ये नाम

तब माता पार्वती सीता जी को समझाती हुए कहती हैं कि राम साक्षत परमेश्वर हैं। इसलिए राम ही तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। माता पार्वती कहती हैं कि श्रीराम करूणानिधान और शीलवान और सर्वज्ञ हैं।

05 / 06Photo : Instagram

करूणानिधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो

पार्वती जी द्वारा कहे गये शब्दों को ध्यान में रखते हुए सीता जी ने तय किया कि वह श्री राम को अब से करूणानिधान के नाम से ही पुकारेंगी। कहते हैं तभी से मां सीता प्रभु श्री राम को इसी नाम से बुलाने लगीं।

06 / 06Photo : Instagram

जब भगवान हनुमान को श्री राम ने बताया ये खास नाम

कहते हैं जब सीता माता का पता लगाने के लिए हनुमान जी लंका जाने लगे तब श्री राम ने हनुमान जी को अपनी मुद्रिका सीता माता को देने के लिए कहा। जिससे सीता जी जान सकें कि हनुमान जी राम जी के ही दूत हैं। लेकिन हनुमान जी ने शंका जताई कि फिर भी माता सीता नहीं मानीं तब क्या करेंगे। तब श्री राम ने हनुमान जी से कहा कि तुम सीता को कहना की आपके करूणानिधान ने यह मुद्रिका दी है। क्योंकि ये नाम मेरे और सीता के अलावा किसी को भी नहीं पता।​