चंदा मामा नहीं हैं दूर! पर सफर में कितना लगेगा समय; जानें

Moon Interesting Facts: पृथ्वी की रातों को रोशन करने वाला चांद हमारे सौरमंडल का 5वां सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है। चंद्रमा एक आकर्षण और रहस्यमयी स्थानों में से एक है तभी तो खगोलविद लंबे समय से चंद्रमा का लगातार अध्ययन कर रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मानना है कि चंद्रमा का निर्माण संभवत: कई अरब साल पहले मंगल जितने आकार वाले किसी एक पिंड के पृथ्वी से टकराने के बाद हुआ था, लेकिन आज हम चंद्रमा के निर्माण की नहीं, बल्कि पृथ्वी और उसके बीच की दूरी की बात करेंगे और जानेंगे कि चंद्रमा तक पहुंचने में आखिर कितना समय लगता है।

Slideshow/s by: अनुराग गुप्ताUpdated Dec 12 2024, 11:47 IST
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चंदा मामा को लेकर विकसित हो रही समझ

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा सहित दुनियाभर की कई अंतरिक्ष एजेंसियां चंद्रमा को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाती हैं। तभी तो चंद्रमा के प्रति हमारी और आपकी समझ विकसित हुई है। अन्यथा हम चंदा मामा के बारे में ज्यादा कुछ जान नहीं पाते।

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आसान नहीं चांद पर जाना

चांद पर जाना कोई आसान काम नहीं है। हमारा प्राकृतिक उग्रह पृथ्वी की कक्षा में औसतन 3,84,400 किमी की दूरी पर परिक्रमा करता है। ऐसे में चांद पर पहुंचने में कितना समय लग सकता है।

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कितना समय लगेगा

पिछले कुछ दशकों के चंद्र मिशनों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि चंद्रमा पर पहुंचने में 8 घंटे से लेकर साढ़े चार माह तक का समय लग सकता है। हालांकि, सबसे तेज अंतरिक्ष यान से और भी जल्दी पहुंचा जा सकता है।

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न्यू होराइजन अंतरिक्ष यान

नासा ने 2006 में प्लूटो का अध्ययन करने के लिए न्यू होराइजन अंतरिक्ष यान को लॉन्च किया था। लॉन्चिंग के महज 8 घंटे और 35 मिनट बाद अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पास से गुजरा था, लेकिन जिन मिशनों का गंतव्य स्थान ही चंद्रमा है, उनके लिए यात्रा थोड़ी लंबी होती है। (फोटो साभार: NASA)

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चंद्रमा पर पहुंचने में लूना 1 को कितना समय लगा?

साल 1959 में पहली बार किसी एजेंसी ने चंद्र मिशन को अंजाम दिया। इस दौरान सोवियत संघ के लूना 1 को चंद्रमा तक पहुंचने में 34 घंटे का समय लगा था। इस मानवरहित मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर प्रभाव डालना था, लेकिन अंतरिक्ष यान अपने रास्ते से भटक गया और चंद्रमा से 5,995 किमी दूर चला गया। (फोटो साभार: iStock)

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अपोलो 11 को कितना समय लगा

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1969 में अपोलो 11 के उड़ान भरने और एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग के चंद्रमा पर पहला कदम रखने में 109 घंटे और 42 मिनट लगे थे। यह किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी का चांद पर पहला मानव मिशन था। (फोटो साभार: iStock)

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कम ईंधन में तय करें दूरी

बकौल रिपोर्ट, ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र के संस्थापक सदस्य प्रोफेसर ग्रेटचेन बेनेडिक्स ने बताया कि एक बार पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से बाहर जाने के बाद मामूली कक्षा सुधारों की जरूरत होती है, इसलिए चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण सारा काम कर देता है और ईंधन कम लगता है। (फोटो साभार: iStock)