ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज भारत का सबसे लंबा केबल- सिस्टम वाला पुल है। यह गुजरात में कच्छ की खाड़ी और ओखा में बेयट द्वारका द्वीप को जोड़ता है। पुल की कुल लंबाई 2,320 मीटर (7,612 फीट) है।
ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज से डूबते हुए सूर्य का काफी बेहतरीन नजारा देखने को मिलेगा। द्वारका सिग्नेचर ब्रिज से समुद्र की लहरों के बीच यात्रा करने का लुफ्त उठाया जा सकेगा।
बेट द्वारका और ओखा के बीच बने इस सिग्नेचर ब्रिज में 12 व्यूइंग गैलेरी बनाई गई है। साथ ही फुटपाथ पर दोनों साइड पर गीताजी के श्लोक ओर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र लगाए गए हैं।
ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज के फुटपाथ के दोनों साइड के ऊपरवाले हिस्सों में सोलर पैनल लगाए गयर है, जिससे 1 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा। जिससे लाइटिंग और अन्य सिस्टम के लिए बिजली मिल सकेगी।
पुल के निर्माण की मंजूरी 2016 में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2017 को ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज की आधारशिला रखी थी।
ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज के बीच में 500 मीटर के हिस्से में कोई भी पिलर नहीं है, ताकि इंडियन नेवी ओर भारतीय कोस्टगार्ड के जहाज आसानी से समुद्र को क्रॉस कर सकें।
ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज से कई फायदे हैं। अभी ओखा से बेट की यात्रा के लिए नाव का इस्तेमाल होता है। लेकिन अब सड़क से जाना संभव हो जाएगा। पर्यटन में काफी विकास होगा। द्वारका पहुंचने वाली टूरिस्टों की संख्या दोगुनी हो सकती है।