​भारत के 5 सबसे अनोखे रेलवे स्टेशन, कहीं खाली बोर्ड तो कहीं साल में सिर्फ 2 बार ट्रेन​

भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जिसकी कुल लंबाई 68,584 किमी से अधिक है। यह 8,000 से अधिक स्टेशनों के जरिए रोजाना 13,000 से अधिक यात्री ट्रेनें चलाता है। ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग 99% हिस्सा विद्युतीकृत है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इस विशाल नेटवर्क में कुछ बेहद अनोखे रेलवे स्टेशन भी है जिनके बारे में आपको जानना चाहिए।

Authored by: Updated Apr 28 2026, 11:55 IST
​बंगाल का बिना नाम वाला रेलवे स्टेशन​Image Credit : Wikimedia commons01 / 05

​बंगाल का बिना नाम वाला रेलवे स्टेशन​

पश्चिम बंगाल में वर्धमान के पास भारत का सबसे अनोखा रेलवे स्टेशन माना जा सकता है क्योंकि इसके पीले स्टेशन बोर्ड पर आज तक कोई नाम नहीं लिखा गया है। यह बांकुरा-मैसग्राम रेल लाइन पर रैना (Raina) और रैनागढ़ (Rainagar) गांवों के बीच स्थित है, बिना नाम का एक अनोखा स्टेशन है। 2008 में बने इस स्टेशन का नाम दो गांवों के बीच विवाद के कारण नहीं रखा जा सका, जिसके बाद रेलवे ने यहां पीले रंग के साइनबोर्ड को कोरा छोड़ दिया है।

​हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन (पंजाब)​Image Credit : Wikimedia commons02 / 05

​हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन (पंजाब)​

यहां साल में सिर्फ 2 बार ट्रेन आती है, जो भगत सिंह की शहादत दिवस और बैसाखी पर चलती है। पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्थित हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन भारत-पाकिस्तान सीमा के पास का एक ऐतिहासिक और अनोखा स्टेशन है, जो साल में केवल दो दिन (23 मार्च और 13 अप्रैल) स्पेशल ट्रेनों के लिए खुलता है।

​शकुंतला रेलवे ट्रैक (महाराष्ट्र)​Image Credit : AI Image03 / 05

​शकुंतला रेलवे ट्रैक (महाराष्ट्र)​

यह एकमात्र ऐसा ट्रैक है जिस पर आजादी के बाद भी अंग्रेजों (ब्रिटिश कंपनी) का 99% तक नियंत्रण माना जाता था।यह ट्रैक ऐतिहासिक रूप से एक ब्रिटिश कंपनी के अधीन था, और भारतीय रेलवे को इस पर ट्रेन चलाने के लिए रॉयल्टी देनी पड़ती थी। जर्जर हालत के कारण, इस पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को 2020 में बंद कर दिया गया।भारत सरकार अब इस 190 किमी लंबे नैरो गेज को ब्रॉड गेज में बदलने की प्रक्रिया पर काम कर रही है।

​रानी कमलपति रेलवे स्टेशन (भोपाल)​Image Credit : Wikimedia commons04 / 05

​रानी कमलपति रेलवे स्टेशन (भोपाल)​

यह देश का पहला निजी तौर पर प्रबंधित (Private) लक्जरी रेलवे स्टेशन है। इसका नाम हबीबुल्लाह खान के नाम पर हबीबगंज रखा गया था। रेल मंत्रालय ने जून 2017 में रेलवे स्टेशन का निजीकरण कर दिया, जिससे यह भारत का पहला निजी रेलवे स्टेशन बन गया। नवंबर 2021 में, मध्य प्रदेश सरकार ने गोंड रानी कमलापति की स्मृति में रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कर दिया।

​नवापुर (गुजरात/महाराष्ट्र)​Image Credit : Wikimedia commons05 / 05

​नवापुर (गुजरात/महाराष्ट्र)​

यह स्टेशन दो राज्यों की सीमा पर स्थित है, जिसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र में और आधा गुजरात में आता है। इसे देखकर हर कोई चौंक उठता है। सिर्फ एक कदम पर ही स्टेशन बदल जाता है। नवापुर रेलवे स्टेशन (Navapur Railway Station) भारत का एक अनूठा रेलवे स्टेशन है, जो महाराष्ट्र (नंदुरबार जिला) और गुजरात (तापी जिला) की सीमा पर स्थित है। इसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र में और आधा गुजरात में आता है। टिकट काउंटर महाराष्ट्र में है, जबकि स्टेशन मास्टर गुजरात में बैठते हैं।

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