Mumbai money laundering case : ED की बड़ी कार्रवाई, अनिल देशमुख की 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 16, 2021, 04:29 PM IST

प्रर्वतन निदेशालय ने मुंबई मनी लॉन्ड्रिंग के केस में बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्‍ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है।

Mumbai money laundering case : ED की बड़ी कार्रवाई, अनिल देशमुख की 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क
Photo Credit: ANI

मुंबई : मुंबई मनी लॉन्ड्रिंग केस में शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और उनके परिवार से संबद्ध 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्‍त कर ली। मामले की जांच कर रही ईडी ने पूछताछ को लेकर कई समन अनिल देशमुख को भेजे थे, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। ईडी इस मामले में एनसीपी नेता की पत्‍नी आरती देशमुख से भी पूछताछ करेगा।

महाराष्‍ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर करीब 100 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद सीबीआई और ईडी ने देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज किया था और अब इस मामले में कार्रवाई करते हुए ईडी ने देशमुख व उनके परिवार की 400 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति कुर्क कर ली है।

4.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क

ईडी ने शुक्रवार को बताया कि इसने महाराष्‍ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और उनके पर‍िवार से संबद्ध 4.20 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई भ्रष्‍टाचार के केस में धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत की गई है। जो संपत्ति कुर्क की गई है, उनमें 1.54 करोड़ रुपये का एक आवासीय फ्लैट है, जो मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित है। इसके अतिरिक्‍त महाराष्‍ट्र के रायगढ़ जिले के उड़ान गांव में स्थित भूमि है, जिसकी कीमत करीब 2.67 करोड़ रुपये है।

ईडी की यह कार्रवाई अनिल देशमुख के वकील के बयान के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि उनके मुवक्किल को लगता है कि कथित धनशोधन मामले में उनके खिलाफ ईडी की जांच 'वास्‍तव‍िक' नहीं है, बल्कि यह 'उत्‍पीड़न' की तरह दिखती है और इसलिए उनके मुवक्किल जांच में शामिल नहीं हो रहे हैं। देशमुख के वकील कमलेश घुमरे का यह बयान एनसीपी नेता को ईडी की ओर से कई समन जारी कर बयान दर्ज करने के लिए उपस्थित होने को कहे जाने के बावजूद ऐसा नहीं करने के बाद आया था।

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