Rishi Kapoor Parenting Style: दुनिया के हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं। उनकी सुरक्षा, सफलता और खुशियों को लेकर चिंतित रहना स्वाभाविक है। जाने-अनजाने में कई बार यही चिंता बच्चों को पेरेंट्स का कंट्रोलिंह बिहेवियर लगने लगता है। यही बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में तनाव का कारण भी बनता है। हाल ही में ऋद्धिमा कपूर ने अपने पिता ऋषि कपूर को याद करते हुए कहा कि उनकी पेरेंटिंग कंट्रोल वाली बिल्कुल नहीं थी, उन्हें अपने बच्चों की चिंता रहती थी।
हर पेरेंट को सीखनी चाहिए ऋषि कपूर से ये बात (Photo: Riddhima Parenting)
क्या पिता की सख्ती के कारण फिल्मों से दूर रहीं रिद्धिमा?
दरअसल कपूर फैमिली को लेकर ये धारणा सालों तक बनी रही कि इस परिवार के पुरुष औरतों को फिल्मों में काम नहीं करने देते। इस रवायत को सबसे पहले करिश्मा कपूर ने तोड़ा। हाल ही में रिद्धिमा कपूर ने बताया कि वो फिल्मों से इस कारण दूर नहीं रहीं कि उनके पिता नहीं चाहते थे। अगर उस समय या आज भी मैंने पापा से कहा होता कि मुझे फिल्म करनी है, मैं आपको गर्व महसूस कराऊंगी, आप मेरा मार्गदर्शन करें, तो वह मुझे कभी नहीं रोकते। वह खुद वहां खड़े होकर मेरा मार्गदर्शन कर रहे होते।
कैसे पेरेंट थे ऋषि कपूर
रिद्दिमा कपूर के मुताबिक उनके पिता का पेरेंटिंग स्टाइल बहुत कमाल का था। हर पेरेंट्स को ये सीखना चाहिए। रिद्धिमा ने बताया कि जब वह 16-17 की थीं तो एक बार उन्होंने अपने पिता से कहा कि वह पढ़ाई के लिए लंदन जाना चाहती हैं। उन्होंने एक बार तो टालने की कोशिश की। लेकिन जब मैंने उन्हें बताया कि वहां जा कर पढ़ाई करना मेरे लिए जरूरी है तो वो राजी हो गए।
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राजी तो हो गए लेकिन वह इस बात से बहुत तनाव में आ गए थे कि उनकी बेटी अकेले यूके जाएगी, वहां अकेले रहेगी और सब कुछ कैसे संभालेगी। वह करीब आधे घंटे तक कमरे में चक्कर काटते रहे और सोचते रहे। जब भी बच्चों के दूर जाने जैसी कोई नई बात सामने आती, तो वह काफी परेशान हो जाते थे। बकौल रिद्धिमा ऋषि कपूर ने काफी सोचने समझने और अपने दिल को मजबूत करने के बाद उनसे कहा कि तुम जो चाहो करो, मुझे पता है कि तुम जो भी करोगी उसमें अपना 100 प्रतिशत दोगी। उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था।
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कंट्रोलिंग बनाम केयरिंग पेरेंट्स
रिद्धिमा कपूर कहती हैं कि जो लोग इस पेरेंटिंग को कंट्रोलिंग कहते तो ये उनकी गलती है। पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि नियंत्रण और देखभाल के बीच एक बहुत बारीक अंतर होता है। देखभाल में माता-पिता सलाह देते हैं, मार्गदर्शन करते हैं और जरूरत पड़ने पर साथ खड़े रहते हैं। वहीं नियंत्रण की स्थिति में वे बच्चों के लिए फैसले लेने लगते हैं, उनकी पसंद-नापसंद तय करने लगते हैं और उनसे अपनी अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार की उम्मीद करते हैं।
