National Doctors Day: 32 साल के आईटी प्रोफेशनल रोहित (बदला हुआ नाम) ने जिम जाना शुरू किया तो सोशल मीडिया और Google पर फिटनेस से जुड़े वीडियो भी देखने शुरू किए। कुछ फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर उसने बिना किसी डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से पूछे प्रोटीन सप्लीमेंट, प्री-वर्कआउट और कई तरह के विटामिन लेना शुरू कर दिया। शुरुआत में उसे सब ठीक लगा, लेकिन कुछ महीनों बाद उसे लगातार पेट दर्द, थकान और लिवर से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। जांच में पता चला कि ये डिजिटल डॉक्टरी के आधार पर लिए गए सप्लीमेंट उनके शरीर पर नकारात्मक असर डाल रहे थे।
आज के डिजिटल दौर में सेहत से जुड़ी जानकारी हासिल करना बेहद आसान हो गया है। हल्का बुखार हो, सिर दर्द हो, पेट दर्द हो या कोई और परेशानी ऐसे में ज्यादातर लोग सबसे पहले डॉक्टर के पास जाने के बजाय Google पर सर्च करना पसंद करते हैं। कुछ मिनटों में मिलने वाली जानकारी के आधार पर लोग खुद ही बीमारी का अंदाजा लगाकर दवा लेना शुरू कर देते हैं। यही आदत धीरे-धीरे सेल्फ मेडिकेशन (Self Medication) जैसी गंभीर समस्या का रूप ले रही है।
आज 1 जुलाई को मनाया जाने वाला National Doctors Day हमें यह याद दिलाता है कि इंटरनेट जानकारी का माध्यम हो सकता है, लेकिन रोगों के सही निदान और सुरक्षित इलाज केवल एक योग्य डॉक्टर ही कर सकता है। याद रखिए कि हेल्थ के मामले में अनुमान नहीं चलता है, इसकी जगह विशेषज्ञ की सलाह ही सबसे बड़ा भरोसा है। आपकी सेहत से जुड़े इस गंभीर और जरूरी सवाल को लेकर हमने बात की शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से।
क्यों सेहत पर भारी पड़ सकता है ऑनलाइन इलाज ढूंढना
इंटरनेट पर सेहत से जुड़े लाखों लेख, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट मौजूद हैं। डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक इनमें से कई जानकारी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होती हैं, लेकिन कई बार अधूरी, पुरानी या भ्रामक जानकारी भी सामने आ जाती है। ऐसे में बिना एक्सपर्ट की सलाह के खुद इलाज शुरू करना खतरनाक साबित हो सकता है।
इसका कारण है कि एक ही लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों का संकेत हो सकता है। जैसे कि सिरदर्द केवल थकान की वजह से भी हो सकता है और माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर या ब्रेन से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। यही वजह है कि केवल इंटरनेट की जानकारी पर भरोसा करना सही निर्णय नहीं है।
- क्योंकि इंटरनेट हर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता।
- ऑनलाइन मिलने वाली जानकारी सामान्य होती है, किसी के लिए व्यक्तिगत नहीं।
- लक्षणों के आधार पर बीमारी का सही अनुमान लगाना आसान नहीं होता।
- गलत जानकारी इलाज में देरी कर सकती है।
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क्या है सेल्फ मेडिकेशन
यहां सेल्फ मेडिकेशन (Self Medication) का मतलब बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही बीमारी का अनुमान लगाकर दवा लेना है। यह समस्या केवल मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य रूपों में भी देखने को मिलती है।
सेल्फ मेडिकेशन के सामान्य उदाहरण
- बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवा लेना।
- पुराने प्रिस्क्रिप्शन की दवा दोबारा शुरू कर देना।
- किसी दोस्त या रिश्तेदार की सलाह पर दवा लेना।
- सोशल मीडिया या इंटरनेट आदि पर देखकर इलाज करना।
- इंटरनेट पर पढ़कर एंटीबायोटिक शुरू कर देना।
यदि आप इन आदतों को अपनाकर दवाएं लेते हैं, तो इससे बीमारी ठीक होने के बजाय और जटिल हो सकती है।
क्या है सेल्फ मेडिकेशन
हर बीमारी के पीछे नहीं होती समान वजह
डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक, लोग अक्सर सेल्फ मेडिकेशन करते हुए सोचते हैं कि यदि किसी परिचित को एक दवा से आराम मिला था तो वही दवा उनके लिए भी सही होगी। जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
उदाहरण के तौर पर खांसी कई कारणों से हो सकती है, जिसमें वायरल संक्रमण, बैक्टीरियल संक्रमण, एलर्जी, अस्थमा, एसिडिटी, फेफड़ों की बीमारी आदि समस्याएं शामिल हैं। इन सभी स्थितियों का इलाज अलग-अलग होता है। इसलिए बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
तेजी से बढ़ा एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल
आज सेल्फ मेडिकेशन में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना है। डॉ. श्रेय की मानें तो, कई लोग सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल बुखार में भी एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं, जबकि वायरस पर इन दवाओं का कोई असर नहीं होता है। जबकि बार-बार गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से कुछ साधारण समस्याएं हो सकती हैं।
Antibiotic Resistance बढ़ना।
भविष्य में दवा का असर कम होना।
संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाना।
अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति होना।
इन सभी कारणों को देखते हुए कहा जाता है कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक कभी नहीं लेनी चाहिए।
दर्द की दवा का बिना सलाह के इस्तेमाल
सेल्फ मेडिकेशन में सबसे ज्यादा दर्द की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। बहुत से लोग सिरदर्द, बदन दर्द या बुखार होने पर बिना सोचे-समझे पेनकिलर खा लेते हैं। हालांकि इनका लगातार और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकता है। इसके साथ ही पेन किलर के अधिक इस्तेमाल से होने वाले संभावित नुकसान में पेट में अल्सर, गैस्ट्रिक ब्लीडिंग, किडनी को नुकसान, लिवर पर असर, ब्लड प्रेशर बढ़ना जैसे लक्षण शामिल हैं। इसलिए सामान्य दर्द की दवा भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।
सच नहीं है इंटरनेट की हर जानकारी
आज सोशल मीडिया पर हेल्थ से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल होते हैं। कई लोग बिना मेडिकल की डिग्री लिए भी अलग-अलग रोगों के इलाज के दावे करते हैं। इसमें अक्सर ऐसे दावे देखने को मिलते हैं, जैसे-
3 दिन में डायबिटीज खत्म।
एक घरेलू नुस्खे से कैंसर ठीक।
यह जड़ी-बूटी हर बीमारी की दवा है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल ऐसे दावों पर भरोसा करना गंभीर हेल्थ कंडीशन पैदा कर सकता है। इसलिए किसी भी बीमारी का इलाज केवल वायरल वीडियो देखकर नहीं करना चाहिए।
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क्यों जरूरी है डॉक्टर की सलाह
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी से इलाज करते समय केवल हम लक्षणों को देखते हुए इलाज करते हैं। जबकि एक योग्य डॉक्टर केवल बीमारी नहीं देखता, बल्कि मरीज की पूरी हेल्थ कंडीशन का मूल्यांकन करता है। वे रोगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देते हैं। जिसमें मरीज की उम्र, वजन, मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी, पहले से चल रही दवाएं, जीवनशैली, बीमारी की गंभीरता आदि शामिल हैं।
इन्हीं जानकारियों के आधार पर सही इलाज तय किया जाता है। यही काम इंटरनेट पर मौजूद इलाज से जुड़ी जानकारी या कोई ऐप नहीं कर सकता है।
किसके लिए ज्यादा खतरनाक है सेल्फ मेडिकेशन
ऐसे तो सेल्फ मेडिकेशन सभी के लिए नुकसानदायक होती है, लेकिन कुछ खास लोगों के लिए ये ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इसमें गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज, हार्ट पेशेंट, किडनी के रोगी, लिवर की बीमारी वाले मरीज, कैंसर के मरीज शामिल हैं। इन लोगों में दवा की मात्रा और दवाओं के आपसी प्रभाव का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। जो बिना डॉक्टर की सलाह के रख पाना लगभग असंभव है।
क्या इलाज के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कभी न करें
यदि आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इंटरनेट हेल्थ से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने का अच्छा माध्यम है, लेकिन इसे डॉक्टर का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
कैसे करें हेल्थ के लिए इंटरनेट का सही उपयोग
इंटरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पाने का एक उपयोगी माध्यम है, लेकिन इसे कभी भी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह बीमारी को समझने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में मदद करता है। इसलिए इंटरनेट से कुछ जरूरी जानकारी लें। जैसें-
- बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी लेना।
- हेल्दी लाइफस्टाइल के टिप्स सीखना।
- टीकाकरण की जानकारी प्राप्त करना।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई बीमारी को बेहतर समझना।
- अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर की जानकारी जुटाना।
कैसे करें इंटरनेट का सही इस्तेमाल
National Doctors Day का बड़ा संदेश
आज 1 जुलाई National Doctors Day के मौके पर आपको समझ लेना चाहिए कि, डॉक्टर केवल दवा लिखने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे वर्षों की पढ़ाई, ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस के आधार पर मरीज के लिए सबसे सेफ और असरदार इलाज तय करते हैं। इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया हमारी जानकारी बढ़ा सकते हैं, लेकिन मेडिकल से जुड़ा निर्णय लेने की क्षमता किसी सर्च इंजन में नहीं होती है।
आज जब हर सवाल का जवाब कुछ सेकंड में मिल जाता है, तब यह समझना और भी जरूरी है कि हेल्थ के मामले में जल्दबाजी या अनुमान लगाना आपको गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो पहले डॉक्टर से सलाह लें और इंटरनेट को केवल जानकारी का माध्यम ही मानें, इलाज का विकल्प नहीं।
