सिर्फ तमाशबीन नहीं, बनें जागरूक पड़ोसी, आपकी एक आवाज बचा सकती है किसी बेटी की जिंदगी

How Neighbours Can Help A Dowry Victim: नोएडा की ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर जैसे दहेज के मामलों ने फिर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है - क्या इसमें पड़ोसियों की चुप्पी भी जिम्मेदार है? जानिए कैसे एक जागरूक पड़ोसी दहेज और घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाकर किसी बेटी की जिंदगी बचा सकता है।

How Neighbours Can Help A Dowry Victim: नोएडा की ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर जैसी बेटियों की कहानियां सिर्फ दो परिवारों का दर्द नहीं हैं, बल्कि समाज के लिए बड़ा सवाल भी हैं। दोनों ने शादी के बाद नए सपनों के साथ ससुराल में कदम रखा था, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी मौत की खबर आई। एक फांसी के फंदे पर मिली तो दूसरी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। ऐसे मामलों के बाद एक सवाल बार-बार मन में आता है कि क्या आसपास रहने वाले लोगों को कुछ भी महसूस नहीं हुआ होगा? क्या किसी ने कभी घर से आने वाली चीखें दहेज को लेकर दबाव नहीं देखा होगा, झगड़े या ताने नहीं सुने होंगे?

Dowry harassment in india

जागरूक पड़ोसी बचा सकता है बेटी की जान

जिस समाज में हम रहते हैं वहां अक्सर सुनने को मिलतै कि 'घर की बातें घर में ही रहनी चाहिए।' लेकिन कई बार यही सोच किसी बेटी की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। दहेज, घरेलू हिंसा (dowry harassment) और मानसिक प्रताड़ना जैसी चीजें बंद दरवाजों के पीछे शुरू होती हैं, लेकिन उनकी आवाज दीवारों के पार भी सुनाई देती है। सच्चाई यह है कि कई बार पड़ोसी सब समझते हैं, लेकिन 'हमें क्या लेना-देना' या 'ये उनका निजी मामला है' सोचकर चुप रह जाते हैं। जबकि कई बार एक जागरूक पड़ोसी की छोटी-सी कोशिश भी किसी बेटी की जिंदगी बचा सकती है।

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