Asha Bhosle Death Reason: भारत की जानी-मानी और बॉलीवुड की दिग्गज आवाज आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। मल्टी ऑर्गन फेलियर की वजह से 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।। उन्होंने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों को यादगार गाने दिए, ऐसे गाने जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। बता दें कि एक रात पहले सिंगर को कार्डियक अरेस्ट के शक के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल (Breach Candy Hospital) में भर्ती कराया गया था, बाद में उनकी पोती जनाई ने बताया कि उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मल्टी ऑर्गन फेलियर के चलते आशा भोसले ने 92 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा (Pc- Pinterest.com)
लेकिन आज दोपहर में डॉ. प्रतीत समदानी ने अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आशा भोसले का निधन मल्टी ऑर्गन फेलियर (Multiple Organ Failure) के कारण हुआ। ऐसे में अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मल्टिपल ऑर्गन फेल्योर होता है क्या है, किस वजह से इसका रिस्क बढ़ता है और क्यों खासकर बुजुर्गों में यह इतना गंभीर बन जाती है। चलिए आशा भोसले की मौत के कारण को विस्तर से समझते हैं।
मल्टी ऑर्गन फेलियर क्या होता है (Multiple Organ Failure kya hota hai in hindi)
अगर आसान शब्दों में समझें, तो यह शरीर की ऐसी स्थिति है जब एक नहीं बल्कि कई जरूरी अंग एक साथ कमजोर पड़ जाते हैं और ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि दिल, किडनी, लिवर और फेफड़े - ये सभी अंग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इसलिए जब एक पर असर पड़ता है, तो बाकी भी प्रभावित होने लगते हैं।
सिंगर आशा भोसले के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके शरीर के कई अंग एक साथ ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के लिए भी मरीज को स्थिर रखना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
शरीर में क्यों बढ़ता है इसका खतरा?
एक्सपर्ट्स की मानें तो यह समस्या अक्सर अचानक नहीं होती, बल्कि शरीर में धीरे-धीरे बनती है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई बीपी या कोई गंभीर इंफेक्शन होता है, उन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में लंबे समय तक शरीर पर दबाव रहने से अंग कमजोर हो जाते हैं और धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकते हैं।
उम्र के साथ क्यों हो जाता है ज्यादा खतरनाक
डॉक्टर बताते हैं कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की ताकत और बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती जाती है। 90 साल के बाद शरीर जल्दी रिकवर नहीं कर पाता। ऐसे में अगर कोई गंभीर समस्या सामने आती है, तो उससे उबरना बहुत मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि 92 साल की उम्र में यह स्थिति जानलेवा बन सकती है।
क्या इससे बचाव किया जा सकता है?
पूरी तरह इससे बच पाना हर बार संभव नहीं होता, लेकिन कुछ चीजें हैं जिनसे खतरे को कम किया जा सकता है। जैसे नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित खानपान, पुरानी बीमारियों को कंट्रोल में रखना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना। खासकर बुजुर्गों के लिए यह बेहद जरूरी है कि उनकी सेहत को नजरअंदाज न किया जाए।
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक सीख भी है कि उम्र बढ़ने के साथ अपने शरीर की देखभाल करना कितना जरूरी हो जाता है। छोटी-छोटी सावधानियां ही आगे चलकर बड़ी परेशानियों से बचा सकती हैं।
