राजस्थान की राजनीति के इतने रंग, अदालत, राजभवन और सड़क, सचिन पायलट या अशोक गहलोत अब कौन पड़ेगा भारी

Rajasthan government crisis: राजस्थान की सियासय किस करवट बैठेगी देखना दिलचस्प होगा। अदालत से सचिन पायलट को राहत मिल चुकी है और वो फैसला अशोक गहलोत के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

राजस्थान की राजनीति के इतने रंग, अदालत, राजभवन और सड़क, सचिन पायलट या अशोक गहलोत अब कौन पड़ेगा भारी
सचिन पायलट- अशोक गहलोत  

मुख्य बातें

  • राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट खेमे को राहत
  • राजभवन में अशोक गहलोत कैंप ने किया शक्ति प्रदर्शन
  • कांग्रेस ने जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन का किया फैसला

जयपुर। राजस्थान की सियासी लड़ाई का अंत अभी नहीं हुआ है। सीएम अशोक गहलोत विधायकों के समर्थन का दावा भी कर रहे हैं और राजभवन को बताया कि उनकी सरकार खतरे में नहीं है। लेकिन जिस तरह से राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलच खेमे को राहत मिली, गहलोत के लिए परेशानी बढ़ गई। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान बीजेपी सतीश पुनिया का बयान आया कि सचिन पायलट राज्य के सीएम बन सकते हैं। 

अदालत से राजभवन तक
राजभवन में गहलोत कैंप के विधायकों ने शक्ति प्रदर्शन किया और उनके समर्थन में नारे लगाए। अशोक गहलोत ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्रा ने कहा कि मामला अदालत में लिहाजा उन्हें विमर्श के लिए समय चाहिए। बताया जा रहा है कि अशोक गहलोत विधायकों के साथ दिल्ली आ सकते हैं। 

पायलट खेमे के विधायकों के निशाने पर अशोक गहलोत
सचिन पायलट कैंप के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी कहते हैं कि कुछ लोग जो जयपुर में बैठे हुए है वो कह रहे हैं कि हमें बंधक बनाकर रखा गया है। हम मानेसर अपनी इच्छा से आए हैं, वास्तव में उन्हें जिलाधिकारी की तरफ यहां पहुंचने के लिए पास मिला हुआ था।

सचिन पायलट खेमे के विधायक मुरारी लाल मीणा  का कहना है कि हम दिल्ली में बैठे हुए हैं। सीएम अशोक गहलोत कहते हैं कि उन लोगों को बीजेपी ने बंधक बनाया हुआ है। यह सच नहीं है कि वो लोग कभी बीजेपी के संपर्क में थे। इसके उलट एसओजी की कार्रवाई से उनके परिवार के लोग डरे हुए हैं। पायलट खेमे के ही एक और विधायक सुरेश मोदी कहते हैं कि वो लोग कभी बीजेपी के संपर्क में नहीं रहे। सच तो यह है कि अशोक गहलोत ने कभी उन लोगों की दिक्कतों को सुना ही नहीं। 

क्या कहते हैं जानकार
राजस्थान के सियासी घटनाक्रम के बारे में जानकार कहते हैं कि अभी जो मौजूदा तस्वीर है उसमें अशोक गहलोत खेमा भारी है। जिस तरह से उन्होंने राजभवन में विधायकों के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया उसके जरिए वो संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई उन्हें कमजोर ना समझे। लेकिन इसके साथ राजस्थान हाईकोर्ट से सचिन पायलट कैंप को राहत मिल चुकी है ऐसे में अब वो खुलकर दांव खेल सकते हैं। सियासी गणित में एक छोटी सी चूक किसी पक्ष के लिए भारी पड़ सकती है। लेकिन फिलहाल गहलोत कैंप के लिए हालात उनके पक्ष में है। 

अगली खबर